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Buaai ke liye Mitti Taiyar karna | बुवाई के लिए मिटटी तैयार करना



मिटटी तैयार करना फसल उगाने की परक्रिया में सबसे पहला कार्य होता है मिट्टी को तैयार करना. मिटटी को ट्रेक्टर दवारा उलट-पलट कर पोला बनाया जाता है. मिटटी को उलट-पलट कर पोला बनाने से पोधों की जडें अधिक गहराई तक पकड़ करती हैं और मिटटी को पोला बनाने से केचुए और अन्य  सुचम जीवों की अधिक मात्रा मैं वर्धि होती है. जितनी अधिक मात्रा में केंचुए व अन्य सूक्षम जीवों की वर्धि होगी मिटटी की उर्वरक छमता उतनी ही अधिक होगी. इसके आलावा मिटटी को उलटने-पलटने से मिटटी के पोषक तत्व ऊपर आ जाते हैं. ये पोषक तत्व फसल उगाने में बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 


बुवाई – यह फसल उगने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है. बुवाई के लिए पहले उत्तम व स्वस्थ बीजों का चुनाव किया जाता है. इसके बाद बुवाई के औजारों की मदद से बीजों को मिटटी में बोया जाता है. ये औज़ार दो तरह के होते हैं – १. परम्परागत औजार , २. सील ड्रिल.
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Buaai ke liye Mitti Taiyar karna
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१.       परम्परागत औजार – परम्परागत औजार कीप के आकार का होता है. मिटटी को औजार से खोद कर बीज मिटटी में डाले जाते हैं.


२.       सील ड्रिल- यह प्रक्रया ट्रेक्टर से मशीन  जोड़कर की जाती है. ट्रेक्टर और मशीन द्वारा बुवाई करने से बीजो में अक समान फासला बना रहता है. बीजों की गहराई भी एक समान बनी रहती है. ट्रेक्टर दवारा बुवाई करने से समय और मेहनत दोनों कम लगते हें और पक्षिओं दवारा कम बीज ख़राब होते हैं.



निराई – जमीन से खरपतवार हटाने को नीरे कहते हैं. यह बहूत अधिक आवश्यक प्रक्रिया होती हे. यदि जमीन में से खरपतवार नही हटाई जाये तो ये खरपतवार पानी, खाद और मिटटी के अन्य पोषण देने वाले तत्वों को ग्रहण कर फसल की पैदावार को परभावित करती है. फसल उगानेसे पहले खेत जोतने से खरपतवार मरकर मिटटी में मिल जाते हैं. पुष्पण एव बीज बनने से पहले का समय खरपतवार हटाने का सबसे उचित समय होता है. हाथ से, खुरपी से, हैरो आदि की सहायता से खरपतवार हटाई जाती है.



थ्रेशिंग – फसल को काटने के बाद बीजों को भूसे से अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं. थ्रेशिंग करने के लिए भी किसान कई तरह के तरीके अपनाते हैं,जैसे छोटे खेतों वाले किसान फाटक कर अनाज के दानो को भूसे से अलग करते हैं और बड़े खेतों वाले किसान कॉम्बिने मशीन – जो की हार्वेस्टर और थ्राशेर का संयुक्त रूप है – का इस्तेमाल करते है.

 
बुवाई के लिए मिटटी तैयार करना
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