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इस राजा ने किया था उर्वशी अप्सरा के साथ विवाह – Is Raja Ne Kiya Tha Urvashi Apsara ke Saath Vivaah

दोस्तों, हमारे इतिहास में प्रचीन किस्सों से लेकर आज तक हम अप्सरा साधना के बारे में सुनते और देखते आये है. और उनमे से कितने सफल हुए और कितने असफल ये भी उनमे उल्लेख है. लेकिन इस राजा की तो जोड़ी ही आकाश में बनी थी तो बिना किसी साधना के ही उसको मिल गयी थी अप्सरा और वो भी सबसे खुबसूरत और सुंदर अप्सरा उर्वशी .... लेकिन कैसे ? आइये जानते है ... 

इस राजा का नाम था गंगाराव, ये राजस्थान के महाराज थे. एक दिन ये शिकार के लिए वन में गये हुए थे. शिकार करते -२ इनका प्यास से इतना बूरा हाल हुआ की प्राण कंठ तक आ गये. तब इश्वर की क्रपा से पक्षियों को देखकर इनको एक सरोवर का आभास हुआ और तब राजा उसी तरफ चला गया. और वास्ताव में उसको वहां पर एक सरोवर भी मिला.
 
इस राजा ने किया था उर्वशी अप्सरा के साथ विवाह
इस राजा ने किया था उर्वशी अप्सरा के साथ विवाह
चारों तरफ वृक्ष थे और बीच में वो सरोवर सुन्दरता का एक अद्वित्य द्रश्य था लेकिन इस सरोवर की सुन्द्रता को कई गुना बढ़ा रही थी वहां स्नान कर रही अप्सराएँ. जी हाँ चार अप्सरा और वो भी एक से बढ़ कर एक सुन्दर. अप्सरा के कपडे किनारे रखे हुए थे ओर उनके उभरे हुए शरीर के भाग को देख कर राजा कर प्यास तक भूल गया और उनको देखने में ही अपनी सुध बुध खो बैठा. इनमे सबसे छोटी अप्सरा को देख कर राजा उस पर पूर्ण रूप से मोहित हो चूका था. 

अब राजा के दिमाग में केवल एक ही विचार था, की किस तरह अप्सराओं से वो अपनी इच्छा पूरी कर सकता है. उसने चोरी चुपके से उनके कपडे उठा लिए और छिपा लिए. लेकिन ये करते वक़्त अप्सराओं ने राजा को देख लिया. ओर ये सब देख कर उनकी सांस बहार की बहार रुक गयी. उन्होंने अपना शारीर पानी में छुपाने की कोशिस की, लकिन पानी में भही उनके अंगों की झलक राजा को पागल कर रही थी.

इस पर हिम्मत करके उनमे से जो बड़ी अप्सरा जिसका नाम तिलोत्मा था वो बोली, हे राजन हम चारों देव लोक की अप्सराएँ है और इस मनोहर सरोवर को देखकर स्नान और आनंद लेने के लिए यहाँ रुक गयी थी. लेकिन तुम इस तरह हमारे वस्त्र लेकर कहां जा रहे हो और बिना वस्त्र के हम कैसे बहार आएँगी, क्या आपको बिलकूल ही शर्म नहीं आती???
 
Is Raja Ne Kiya Tha Urvashi Apsara ke Saath Vivaah
Is Raja Ne Kiya Tha Urvashi Apsara ke Saath Vivaah
राजा ने कहा आपको कपडे उतारने में शर्म नहीं आई तो मुझे वस्त्र उठाने में कैसी शर्म. अच्छा आप सब देवलोक की आप्सराएँ है तो आप जरा आपना नाम बताएं. राजा की बाँतें सुनकर अप्सराओं के मुख शर्म से लाल हो गये. बड़ी अप्सरा बहुत शर्माती हुई बोली मेरा नाम तिलोत्मा है. बाकी तीनों अप्सरा राजा की खूबसूरती और ताकतवर शरीर को देख कर मुग्ध हो रही थी. और शर्म से उनके मुख से कोई शब्द भी नहीं निकल रहा था. सबसे छोटी अप्सरा की तो पलक भी नहीं झपक पा रही थी.

राजा सब समझ गया. और बोला मैंने सुना है देवलोक की अप्सरा नाच गाने में बड़ी निपुण होती है. और शायद आप बड़ी और इन सबकी रानी है. तिलोत्मा अप्सरा बोली बिना कपड़ों के हमें ठण्ड लगनी शरू हो गयी है, क्रप्या कर कपडे हमें दे दे और तब आपको गाना भी सुना दिया जायेगा. राजा बोला – गाना तो जैसा आप चाहो में आपको सुना सकता हूँ. अगर इन वस्त्रों के बदले बस इतना ही तो मैं चलता हूँ.

राजा की ये बाँतें सुनकर अप्सराओं की कंपकपी छुट गयी और आँखों के आगे अँधेरा छा गया और तिलमिला कर बोली. आप अपनी शर्त बताएं और हम वादा करती है अपनी शक्ति के अनुसार आपकी इच्छा पूरी करने के लिए कोसिस कार्नेगी. 

राजा बोला आप चारों के वस्त्रों के बदले मुझे केवल आप चारों में से सबसे छोटी अप्सरा जो ये खड़ी है ये चाहिए. इनसे शादी करके इनको में अपनी महारानी बनाना चाहता हूँ क्योंकि इनकी कजराई आँखों ने मेरा पहले ही क़त्ल कर दिया है. तो आप क्रप्या इनका नाम बताएं और मेरी मनोकामना पूर्ण करें.

बड़ी अप्सरा तिलोत्मा बोली ये सबसे छोटी अप्सरा उर्वशी है और ये  इन्द्रदेव के दरबार की शान है. और इसे आपको देना हमारे वश में नहीं. हाँ हम तीनो में से जिसे चाहो आप अपने पास रख सकते हो. लेकिनी उर्वशी को तो आप को इंद्र देव से ही मांगना होगा और उसके लिए क्या करना चाहिए वो भी आपको ही सोचना होगा.

इस पर राजा ने विचार किया, सोचा और उनसे उनकी बात की आन लेकर तब उनके साथ जाने के लिए तयार हो गया. तब राजा ने उनके कपडे उनको प्रदान कर दिए और मुंह फेर लिया. कपडे पहन कर वो राजा को अपने साथ सशरीर स्वर्गलोक लेकर चल पड़ी. 

वहां राजा ने वेश बदलकर गाना गा कर और उन चारों अप्सराओं को नचाकर ईन्द्र्देव का मन मोह लिया. इंद्र ने गंगाराव से मनचाहा वर मांगने के लिए कहा. और तब इन्द्रदेव से राजा ने उर्वशी का हाथ मांग लिआ और कहा की में राजस्थान का नरेश हूँ और उर्वशी को अपनी महारानी बनाना चाहता हूँ. ये सुनकर इन्द्रदेव के पैरो तले से जमीन निकल गयी लेकिन अब दूसरा कोई आप्शन भी उसके पास नहीं था और उसे उर्वशी राजा गंगा राव को देनी ही पड़ी.

दोस्तों ये एक सच्चा किस्सा है जो श्री गोगा महापुराण से लिया गया है और आपके सामने प्रस्तुत किया गया है. अगर आपको पसंद आया है तो लाइक जरूर करें और कमेंट करना भी बिलकूल न भूलें. 



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