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Gems Stone Science for all Astrology Planets | Sabhi Grhaon ke liye Ratn Vigyan | सभी ग्रहों के लिए रत्न विज्ञानं



कुंडली द्वारा हमें पता चलता है की हमें कौन सा रत्न पहनना चाहिए और कौन सा रत्न नहीं पहनना चाहिए. रत्न सबके लिए एक समान नहीं  होते. रत्न सुन्दरता की वस्तु नहीं होते. रत्न हमारे लिए प्राणवान उर्जा के स्रोत हैं. जन्म कुंडली में शुभ ग्रहों और लग्न की राशी के अनुसार रत्नों का चयन करना चाहिए, नहीं तो रत्न फायदे की जगह नुकसान भी कर सकता है. कई रतन बड़े प्रभावशाली होते हैं और वे अपना प्रभाव जल्दी दिखाते हैं. दशा-महादशाओं का अध्ययन भी रत्न पहनने से पहले बहुत आवश्यक है. केंद्र या त्रिकोण के स्वामी ग्रह की महादशा में उसी ग्रह का रत्न पहनने से ज्यादा फायदा मिलता है. त्रिकोण जन्म कुंडली में सदा लाभ देता है. लग्नेश, पंचमेश व नवमेश का रत्न धारण किया जा सकता है. इन तीनों में से कोई भी ग्रह अपनी उच्च राशी में हो तो रत्न धारण नहीं किया जाता. शुभ ग्रह अस्त हो या निर्बल हो तो उसका रत्न पहने. ऐसा करने से शुभ ग्रह का प्रभाव बढकर शुभ फल देता है. लग्न होने की स्थिति में या लग्नेश अस्त होने की स्थिति में लग्नेश का रत्न पहने. भाग्येश निर्बल या अस्त होने की स्थिति में भाग्येश का रत्न पहने. लग्नेश का रत्न जीवन-रत्न कहलाता है, पंचमेश का रत्न करक रत्न कहलाता है, और नवमेश का रत्न भाग्य-रत्न कहलाता है. त्रिकोण का स्वामी नीच होने की स्थिति में वह रत्न न पहनें. मारक, बाधक, नीच या अशुभ ग्रह का रत्न कभी न पहने. सभी रत्नों को शुक्ल पक्ष में निर्धारित वार को पहनना चाहिए. 
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सभी ग्रहों के लिए रत्न विज्ञानं
सभी ग्रहों के लिए रत्न विज्ञानं
जन्म लग्न के अनुसार रत्नों का चयन करें ---


मेष --- मूंगा  इस लग्न के जातकों के लिए ठीक है. शुकल पक्ष मंगलवार के दिन या मंगल की होरा में इस मंत्र से जाग्रत सोने में अनामिका अंगुली में धारण करें. मूंगा रत्न धारण करने से रक्त के विकार दूर होते है, रक्त साफ़ होता है. रक्त, साहस और बल बढता है. यह रत्न महिलाओं के शीघ्र विवाह मैं सहायता करता है.  प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है. बच्चों में नजर के विकार को दूर करता है. वर्श्चिक लग्न वाले जातक भी मूंगा धारण कर सकते हैं.



वृष; इस लग्न के जातकों के लिए हीरा रत्न अनुकूल है और राजयोग कारक रत्न नीलम है. हीरा को शुक्ल पक्ष में शुक्र की होरा में जाग्रत कर किसी भी शुक्रवार को धारण किया जाता है. हीरा धारण करने से स्वस्थ्य ठीक रहता है व साहस बढता है. हीरा धारण करने से बल और बुद्धि बढती है. हीरा द्वारा विवाह जल्दी होता है. हीरा आग , डर व चोरी से बचाता है. हीरा पहनने से महिलाओं में गर्भाशय के रोग दूर हो जाते हैं. हीरा धारण करने से वीर्य दोष दूर रहता है. कहा गया है कि जो महिलाये  पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखती हैं उन्हें हीरा धारण नहीं करना चाहिए. वे महिलायें जो पुत्र सन्तान चाहती हैं या जिन महिलाओं को  पुत्र सन्तान हैं उनको परीक्षण के बाद ही हीरा धारण करना चाहिए. हीरे को तुला रत्न वाले जातक भी धारण कर सकते हैं.   
 
Sabhi Grhaon ke liye Ratn Vigyan
Sabhi Grhaon ke liye Ratn Vigyan

मिथुन: पन्ना मिथुन लग्न के जातकों के लिए अनुकूल रत्न है. पन्ना धारण करने के लिए बुधवार का दिन शुभ दिन बुधवार है. बुद्ध की होरा में मंत्र द्वारा जाग्रत करने के बाद ही पन्ना धारण करना चाहिये. पन्ना पहनने से निर्धनता खत्म हो जाती है. पन्ना धारण करने से हमारे मन को शान्ति मिलती है. पन्ना पहनने से परीक्षायों में सफलता मिलती है. पन्ना पहनने से खांसी और अन्य गले के रोग खत्म हो जाते हैं. पन्ना धारण करने से मन एकाग्र होता है. पन्ना काम, क्रोध आदि मानसिक विकारों को दूर करता है. पन्ना धारण करने से हमारे मन को शान्ति मिलती है. कन्या लग्न वाले जातक भी पन्ना पहन सकते हैं.



कर्क: कर्क लग्न वाले जातकों के लिए मोती रत्न अनुकूल है. मोती सोमवार के दिन सुबह चन्द्र की होरा में धारण करना चाहिये. पहनने से पहले मन्त्रों द्वारा जाग्रत करना चाहिये. मोती धारण करने से याददास्त बढती है. मोती धारण करने से बल, विद्या और बुद्धी बढती है. मोती पहनने से गुस्सा कम होता है. मोती पहनने से मानसिक तनाव दूर होता है. मोती अनिद्रा को दूर करता है. दांत और मूत्र के रोगों में लाभ देता है. मोटी धारण करने से पुरुषों का विवाह जल्दी हो जाता है. मोती महिलाओं को सुमंगली बनाता है. मूंगा भी इस लग्न वाले जातको को बहुत लाभ देता है. मूंगा इस लग्न वाले व्यक्ति का राजयोग कारक रत्न है.



सिंह: माणिक्य इस लग्न वाले जातकों के लिए अनुकूल रत्न है. माणिक्य को प्रातः काल रविवार के दिन रवि की होरा में मंत्र से जाग्रत कर धारण करना चाहिये. माणिक्य धारण करने से साहस बढता है. माणिक्य धारण करने से भय और दुःख का नाश होता है. माणिक्य धारण करने से नौकरी में तरक्की मिलती है, प्रतिष्ठा बढती है. माणिक्य धारण करने से अस्थि के रोग दूर हो जाते हैं. सिर के दर्द की समस्या से मुक्ति मिलती है. इस लग्न वाले व्यक्ति मूंगा धारण करें तो बहुत अधिक लाभ मिलता है. इसका कारण यह है की इस लग्न वाले व्यक्ति का राजयोग कारक रत्न मूंगा होता है.



कन्या: ---कन्या लग्न वाले जातकों का अनुकूल रत्न पन्ना है. पन्ना को बुधवार के दिन बुद्ध की होरा में मंत्र से जाग्रत कर पहनना चाहिये. इस लग्न के जातकों के लिए पन्ना, हीरा, नीलम रत्न शुभ होते हैं.



तुला: --- तुला लग्न वाले जातकों के लिए हीरा अनुकूल रत्न है तथा नीलम राजयोग कारक रत्न है. हीरा किसी भी शुक्रवार को शुक्र की होरा में , शुक्ल पक्ष में जाग्रत कर धारण करना चाहिये.

वृश्चिक: --- मूंगा इस लग्न वाले जातकों के लिए अनुकूल रत्न है. मूंगा को शुक्ल पक्ष में मंगलवार को मंगल की होरा में मंत्र के द्वारा जाग्रत कर सोने में अनामिका अंगुली में पहनना चाहिये.

धनु: --- पुखराज इस लग्न वाले जातकों का अनुकूल रत्न है. शुक्ल पक्ष में गुरुवार के दिन सुबह गुरु की होरा में मंत्र से जाग्रत कर धारण करना चाहिये. पुखराज धारण करने से बल व् बुद्धी बढती है. ज्ञान व् मान सम्मान बढता है. पुखराज को धारण करने से पुत्र की प्राप्ति होती है. पुखराज बुरे कर्मों से दूर रखता है. पुखराज धारण करने से अजीर्ण प्रदर, कैंसर और चर्म रोग खत्म हो जाते हैं.



मकर: --- इस लग्न वाले जातकों के लिए नीलम अनुकूल रत्न है. नीलम को शनिवार के दिन धारण किया जाता है. शनिवार के दिन प्रातः शनि की होरा में मंत्र से जाग्रत कर नीलम धारण करना चाहिये. नीलम धारण करने से धन वैभव बढता है. सुख प्राप्त होते हैं व् प्रसिद्धी बढती है. नीलम धारण करने से मन में सद्विचार आते हैं. नीलम हमें सन्तान का सुख देता है. नीलम धारण करने से वायु रोग, गठिया व् हर्निया आदि रोगों में लाभ मिलता है. नीलम धारण करने से पहले परीक्षण करना आवश्यक होता है. नीलम धारण करने से पहले ज्योतिषी से सलाह ले लेनी चाहिये.



कुम्भ : --- इस लग्न वाले जातकों का अनुकूल रत्न नीलम है. नीलम को शनिवार के दिन सुबह शनि की होरा में मन्त्र द्वारा जाग्रत कर पहनना चाहिए. नीलम को धारण करने से धन व् सुख प्राप्त होता है व् प्रसिद्धी बढती है.



मीन: --- पुखराज मीन लग्न वाले जातकों का अनुकूल रत्न है. पुखराज को शुक्ल पक्ष में किसी भी गुरुवार को सुबह गुरु की होरा में मंत्र से जाग्रत कर धारण करना चाहिये. मिथुन, कन्या, वृश्चिक,धनु, कुंभ, मीन लग्न वाले जातक पुखराज धारण कर सकते हैं. वर्ष, कर्क, सिंह,तुला और मकर लग्न वाले जातकों को पुखराज धारण नही करना चाहिये. मेष लग्न वाले जातकों को भी पुखराज धारण नहीं करना चाहिये. गुरु जन्म कुंडली प्रथम, पंचम, व् नवम भावस्थ हो तो धारण करना अच्छा होता है. जिस कन्या का विवाह न हो रहा हो उसे पुखराज अवश्य धारण करना चाहिये लेकिन उसकी राशी या लग्न धनु या मीन होनी चाहिये.

रत्न धारण करने में हाथ का चयन: --- चिकित्सा शास्त्र के अनुसार पुरुष का दायाँ हाथ व् महिला का बायां हाथ गरम होता है. इसी तरह से पुरुष का बांया हाथ व् महिला का दायाँ हाथ ठंडा होता है. अपनी प्रक्रति के अनुसार रत्न भी ठंडे या गरम होते हैं. यदि ठंडे हाथ में डंडे रत्न व् गरम हाथ में गरम रत्न धारण किये जायें तो उम्मीद से अधिक लाभ मिलता है. 



अपनी प्रकृति के अनुसार पुखराज, हीरा, माणिक्य, मूंगा गर्म रत्न होते हैं. मोती, पन्ना, नीलम, गोमेद लहसुनिया ठंडे रत्न होते हैं. रत्न को धारण करने के बाद रत्न की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए. रत्न पहन कर अशुभ स्थान, दाह-संस्कार आदि में नहीं जाना चाहिए. अगर ऐसे स्थान पर जाना है तो रत्न उतारकर जाना चाहिए. रत्न उतारकर देवस्थान में रख दें और दोबारा निर्धारित समय में ही रत्न को धारण करना चाहिए. रत्न को दोबारा से धारण करना हो तो रत्न शुक्ल पक्ष के दिन निर्धारित वार की निर्धारित होरा में ही दोबारा धारण करना चाहिए. खंडित रत्न को कभी भी धारण नहीं करना चाहिए.
 
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