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Brhamcharya Kya hai Iski Mahima Bataiye | ब्रह्मचर्य क्या है, ब्रह्मचर्य महिमा का उल्लेख कीजिये



ब्रह्मचर्य उपवास सब उपवासों से अधिक जरुरी है. सभी उपवास एक सत्य से पैदा होते हैं.और उन उपवासों का वजूद भी सत्य के लिए ही है. जो आदमी सत्य को चुनता है, सत्य का पालन करता है वह कि९सि दूसरी चीज़ की कमाना नहिकर्ता है.विकार की कामना तो कभी नहीं करता जिसकी सारी कामनाएं सत्य के दर्शन के लिए हैं, वो विवाह करके गृहस्थी चलने के चक्कर में नही पड़ता. काम के भोग से आज तक किसी को सत्य प्राप्त नहीं हुआ है.


हिंसा का पालन ब्रह्मचर्य के बिना नहीं हो सकता. अहिंसा यानि सभी जगह फैला हुआ प्रेम. एक आदमी जब औरत को या एक औरत आदमी को अपना सब कुछ सोंप देते हैं तो वहाँ दुसरे के लिए कुछ नहीं बचता. इसका मतलब ये हुआ की दुसरे सब बाद में और सबसे पहले हम दो. आदमी में पूरा भरोसा रखने वाली औरत या पत्नी में पूरा भरोसा रखने वाला आदमी औरत के लिए अपना सब कुछ सोंपने के लिए तैयार रहता है. इसलिए यह साफ़ है की उससे सब जगह व्याप्त प्रेम का पालन कभी नहीं हो सकता. वह सारे संसार को अपना परिवार नहीं बना सकता क्योंकि उसके पास पहले से ही एक परिवार है या परिवार तैयार हो रहा है. अहिंसा का उप्व्वास करने वाला कभी भी शादी नहीं कर सकता. संसार में हम इसके सरे उदाहरण देख रहे हैं.
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ब्रह्मचर्य की महिमा
ब्रह्मचर्य की महिमा

जो शादी कर चुके हैं उनका क्या होगा. उन्हें क्या सत्य की प्राप्ति कभी नहीं होगी. क्या वे अपना सब कुछ अर्पण नहीं कर पायंगे. इसका मार्ग हमने निकाल लिया है --- विवाहित का अविवाहित की तरह हो जाना. इससे अधिक दूसरी बात देखने में नहीं आती. इस अवस्था का सामना जिसने भी किया है वह गवाही दे सकता है. आज यह प्रयोग सफल माना जा सकता है. विवाहित स्त्री-पुरुष एक दूसरे को भाई बहन मानने लगें तो सरे झगडे ख़त्म हो जाते हैं. सरे संसार की स्त्रियाँ माँ बहने और लड़कियां हैं --- यह विचार आदमी को एकदम से ऊपर ले जाता है, बंधन से मुक्ति देता है. 
इससे पति या पत्नी को कोई हानि नहीं होती बल्कि फायदा होता है. परिवार बड़ता है. मन का मेल निकालने से प्रेम बढता है, विकार दूर हो जाते है. विकार दूर होने से आपस में कलह नहीं होती. जहाँ पर प्रेम स्वार्थी है मतलबी है वहाँ कलह होने की संभावना अधिक रहती है.
 
Brhamcharya Kya hai, Brhamcharya Mahima Bataiye
Brhamcharya Mahima Bataiye

इस विचार को समझने और अमल करने से शरीर के लाभ, वीर्य लाभ बहुत छोटे हो जाते हैं. भोग विलास के लिए वीर्य को नष्ट करना बहुत बड़ी गलती है.शारीरिक और मानसिक शक्ति बढाने के लियेवीर्य आवश्यक होता है. भोग-विलास में वीर्य का इस्तेमाल गलत है. वीर्य का गलत प्रयोग अनेक रोग पैदा कर्ता है. 


ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए मन, वचन और क्रम तीनो जरुरी हैं. हमें बात समझनी चाहिये. गीता से हमें जान पड़ता है की जो शरीर को तो वश में रखता है लकिन मन विकार का पोषण कर्ता है वह मुर्ख है.मन से विकार का पोषण करना और शरीर को दबाना से नुकसान होता है. जहाँ पर मन होता है अन्त में शरीर भी वहीँ चला जाता है.


ब्रहमचर्य का पालन बहुत कठिन या असम्भव माना जाता है. ऐसा प्रतीत होता है की ब्रह्मचर्य को बहुत ही छोटे अर्थ में लिया गया है. जन्म इंद्री को काबू में करना ब्रह्मचर्य माना गया है. यह सोच बिल्कुल गलत है. यह परिभाषा संपूरण नहीं है. हम केवल एक इंद्री जनन इंद्री को तो काबू में कर लेते हैं लकिन बाकि की इंद्री भटकती रहती हैं. इससे हमारी सारी कोशिश विफल हो जाती है. मन भटकने वाली बातें सुनना, मन भटकाने वाली चीजें देखना, विकार पैदा करने वाली वस्तु का जीभ से स्वाद लें, हाथ से विकार बढाने वाली चीजें का स्पर्श करना और फिर जनन इंद्री को रोकना गलत है. यह आग में हाथ डालकर आग से बचने की कोशिश के समान है. मेरा मानना है की ब्रह्मचर्य की सिमित परिभाषा नुकसान देती है. यह मेरा अपना मानना है की जब हम सब इन्द्रयों को काबू में करने की कोशिश करते हैं तो जनन इंद्री तुरंत काबू में हो जाती है. उपवासों में स्वाद इंद्री को काबू में करना सबसे प्रमुख होता है.


ब्रह्मचर्य का वास्तविक मतलब ध्यान रखें ब्रह्मचर्य का मतलब होता है ब्रह्म की , सत्य की चर्चा अर्थात तत्व से सम्बंधित आचार. वास्तविक अर्थ में से जो अर्थ निकलता है वह ये है की हमें सब इन्द्रीओं पर काबू करना चाहिये.सिर्फ जनन इंद्री को काबू में करना अधुरा अर्थ है.

ब्रह्मचर्य के गुण


अपने सभी शिष्यों को भगवन धन्वन्तरी ने सभी तरह की बिमारियों को ठीक करने का उपाय बताया है. प्रत्येक बीमारी का इलाज अलग अलग है, लकिन मैं एक ईएसआई खास दवाई बताता हूँ जो शरीर के सभी रोगों में फायदेमंद है.यह दवाई है ब्रह्मचर्य.


पेशाबके रास्ते कभी भी वीर्य का नाश ना हो पाना ब्रह्मचर्य है. खून की चालीस बूंदों से वीर्य की एक बूँद बनती है. संयम रखने और ब्रह्मचर्य का पालन करने से हमारी शक्तियां बहुत अधिक हो जाती हैं.

बड़ा शरीर और बहुत ज्यादा ताकत होने के बाद भी हाथी डरपोक होता है, इसका कारण यह है की हाथी  कामुक होता है. शेर हाथी से बहुत अधिक छोटा होता है लकिन शेर की संयम शक्ति हाथी से बहुत ज्यादा होती है. एक शेर हाथीयों के पुरे झुण्ड को डराकर भगा देता है.

मीराबाई, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, शंकराचार्य, संत ज्ञानेश्वर, संत ज्ञानेश्वर की बहन मुक्ताबाई ये सब ब्रह्मचर्य का पालन करने से ही महान बने हैं. शिवाजी और महाराणा प्रताप ने अपार संयम रखते हुए अपना जीवन बिताया. हमें भी लंगोट का इस्तेमाल करना चाहिए. हमें शाकाहारी रहना चाहिए. प्याज़ लहसुन का परहेज़ करना चाहिए. कब्ज़ का रोग न होने दें. प्रतिदिन नियमित व्यायाम करना चाहिए पूजापाठ भी जरूरी है. मैडिटेशन भी जरूरी है. ऐसा करने से हमारी बुद्धि का विस्तार होगा. याद रखने के ताकत बढेगी. आँखों की रोशनी तेज़ होगी. शारीर व मन को शांति मिलेगी. स्वभाव भी अच्छा बना रहेगा. ब्रह्मचर्य सफलता का मूल मंत्र है.
 


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