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Yoga Asan Baith kar karne wale | बैठकर करने वाले योगा आसन



 1.       वामपाद / दक्षिनपाद द्वि पाद जानुशिरासन :

इस आसन को करने से चर्बी घटती है, मोटापा दूर होता है.

इस आसन से पेट के रोग दूर होते हैं.

यह आसन करने वाला आदमी पूरी उम्र स्वस्थ रहता है. इस आसन से नाडी संस्थान ठीक रहता है.

यह आसन पैर की अनावश्यक चर्बी को खत्म करता है.

इस आसन को करने से ब्रह्मचर्य बना रहता है. वीर्य के रोग खत्म करता है.

इस आसन को करने से नितंब और कमर की मंस्पेशीयाँ स्वस्थ रहती हैं.

जठराग्नि तेज हो जाती है व भूख बढती है.

2.       विपरीत दन्डासन:

यह आसन करने से कंधे व छाती मजबूत होती हैं.

रीढ़ की हड्डी में लचक आती है.

3.       पदमासन:

यह सबसे अधिक लोकप्रिय ध्यानासन है.

देर तक ध्यान लगाने में मदद करता है.

इस आसन को करने से जांघों की चर्बी कम हो जाती है. 
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बैठकर करने वाले योगा आसन
बैठकर करने वाले योगा आसन
 4.       डोलायमान पदमासन:

यह आसन हमारी पाचन शक्ति को बढाता है.

इस आसन को करने से पेट का आकार ठीक हो जाता है.

इस आसन को करने से हाथ व कंधों की मांसपेसियों को बल मिलता है.

5.       कटी चक्करासन:

इस आसन द्वारा ब्रह्मचर्य स्थिर रहता है.

यह आसन करने से शूक्रग्रंथियों पर प्रभाव पड़ता है.

यह आसन करने से मोटापा कम हो जाता है.

यह आसन पैरों के दर्द को खत्म करता है. अमाशय व जिगर को स्वस्थ रखता है.

6.       विस्तृत हस्तपाद आसन:

यह आसन पुरे नाड़ी संस्थान को उत्तेजित करता है. नाड़ी संस्थान की क्रियशीलता बढाता है.

उदर संबंधित रोगों को खत्म करता है.

कोष्ठबद्धता को खत्म करता है.

यह आसन ब्रह्मचर्य को बनाये रखने में बहुत लाभदायक है.

7.       वामपाद \ दक्षिण पाद आकर्ण धनुरासन:

यह आसन उदर प्रवेश के अंगों को ताकतवर बनाता है.

इस आसन को करने से मेरुदण्ड का व्यायाम हो जाता है.

भुजाओं के स्नायुओं को ताकत देता है.

टखनों को ताकत देता है.

8.       वामपाद \ दक्षिण पाद अर्ध मत्स्येन्द्र आसन:

इस आसन को करने से हमारी पीठ की मांसपेसियों की मालिश हो जाती है.

यह आसन करने से वात के दोष दूर हो जाते हैं.

इस आसन को करने से हमारी नाड़ियों को शक्ति मिलती है.

इस आसन को करने से मधुमेह का रोग ठीक हो जाता है.

यह आसन करने से हमारे सारे शरीर को ताकत मिलती है.

9.       गोरक्षासन :

यह आसन उदरस्थ अंगों को मजबूत करता है. मांसपेशियों को ताकत देता है.

इस आसन द्वारा कामशक्ति की रक्षा होती है.

इस आसन को करने से पैरों और पंजों में लचक आ जाती है.
 
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