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Guru Nanak Jayanti Prkash Parv Katha Story | गुरु नानक जयंती प्रकाश पर्व कथा

गुरु नानक जयंती / प्रकाश पर्व

प्राचीन समय से ही गुरु का स्थान माता पिता और भगवान से भी बड़ा माना जाता है, गुरु से जुडी अनेक महिमायें ग्रंथो और पुराणों में मिलती है. इसी तरह सिख धर्म के सबसे बड़े और प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी ने भी अपने  सम्पूर्ण  जीवन में गुरु की महिमा का ही व्याख्यान किया है और समाज में प्रेम भाव को फैलाने का प्रयास किया है. गुरु नानक देव जी की शिक्षा से लोगो में एकता और प्रेम का भाव बढ़ा. इन्हें सिख धर्म का संस्थापक भी माना जाता है.


गुरु नानक  देव जी सिक्खों के आदि गुरु कहलाते है और इन्हें बाबा नानक और नानकशाह के नाम से भी जाना जाता है. इनका जन्म आज के पाकिस्तान में लाहौर के पास तलवंडी में एक हिन्दू परिवार में हुआ था और इनका जन्मदिन प्रकाश दिवस के रूप में कार्तिक माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है. जिस जगह इनका जन्म हुआ था अब उस जगह को ननकाना साहब के नाम से भी जाना जाता है.कहा जाता है कि बचपन से ही इनमे प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देते थे और इसीलिए इन्होने उपनयन संस्कार के समय किसी हिन्दू आचार्य से जनेऊ पहनने से भी इंकार कर दिया था. इनका पढाई लिखाई में बिलकुल भी मन नथा, इसी वजह से इन्होने 7 – 8 साल की उम्र में ही स्कूल को छोड़, अपना सारा समय आध्यात्म चिंतन और सत्संग में लगाना शुरू कर दिया था.


इनका विवाह 16 साल की उम्र में सुखमिनी नाम की कन्या से हुआ था और इनके दो पुत्र थे जिनका नाम श्री चाँद और लक्ष्मीचंद था. गुरु नानक देव जी को एक महान क्रांतिकारी, समाज सुधारक और राष्ट्रवादी व्यक्ति माना जाता था, इनके व्यक्तित्व में धर्मसुधारक, कवी, दार्शनिक,समाजसुधारक, योगी, गृहस्थ, देशभक्त और विश्वबंधु के गुण समाहित थे. ये मूर्तिपूजा के खिलाफ थे, साथ ही इन्होने रुढ़िवादी और कुसंस्कार जैसी प्रथाओं का भी विद्रोध किया. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
Guru Nanak Jayanti Prkash Parv Katha Story
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गुरु  नानक देव जी से जुडी कथा :

गुरु नानक देव जी प्रतिदिन बेई नदी में स्नान करने जाते थे. एक दिन की बात है जब वे स्नान करने के बाद सीधे वन में चले गये और प्रभु का ध्यान करने लगे. कथा के अनुसार उस दिन उन्हें वहां परमात्मा का साक्षात्कार हुआ. परमात्मा ने गुरु नानक को अमृत पिलाया और कहा कि “ मै सैदव तुम्हारे साथ हूँ, मैंने तुम्हे आनंदित किया है तो जो भी तुम्हारे संपर्क में आएगा, वो भी आनंदित होगा. जाओ नाम में रहो, दान दो, उपासना करो, स्वयं नाम लो और दुसरो को भी नाम स्मरण कराओ ”.इस घटना के बाद वो अपने परिवार को छोड़कर धर्म के प्रचार के लिए निकल गये. 


गुरु नानक जी की शिक्षायें :

1.   गुरु नानक जी ने की सबसे  पहली शिक्षा के अनुसार बताया गया है कि  ईश्वर एक है. 


2.   साथ ही कहा गया है कि हमेशा एक ही ईश्वर की उपासना करनी चाहियें.


3.   उन्होंने कहा है कि ईश्वर सब जगह है, साथ ही ईश्वर हर प्राणी में मौजूद है. 
 

4.   नानक जी कहते है कि ईश्वर की भक्ति करने वाले व्यक्ति को किसी का भय नही होता.


5.   इन्होने कहा कि ईमानदारी से जियो और अपनी मेहनत से अपने पेट को भरो.


6.   अगली शिक्षा में इन्होने कहा कि व्यक्ति को बुरा काम नही करना चाहियें और न ही किसी व्यक्ति को सताना चाहियें. 


7.   व्यक्ति को हमेशा खुश रहना चाहियें, साथ ही ईश्वर से सदा  अपने अपराधो की क्षमा मांगनी चाहियें. 


8.   इनका मानना था कि व्यक्ति को अपनी मेहनत की कमाई का छोटा सा हिस्सा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को देना चाहियें.


9.   नानक साहब मानते  थे कि स्त्री और पुरुष दोनों बराबर  है. 


10. इनकी शिक्षा बताती है कि व्यक्ति को जीवित रहने के  लिए भोजन की आवश्यकता होती है किन्तु उनका लोभ लालच और संग्रहवृति इनकी बुराई को दिखाती है. 
 
Guru Nanak Dev Wallpapers Photos Images
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इनकी इन शिक्षाओं को ध्यान से देखा जाये तो इसका सरल भाषा में एक अर्थ निकलता है कि हम सब इंसान एक दुसरे के भाई है और ईश्वर हम सब का साझा पिता है. तो एक पिता की संतान होने के बाद हम उंच नीच के जाल में न रहे बल्कि एक दुसरे की सहायता कर खूद को मजबूत करें. 


गुरु नानक जी ने अपनी इन सब शिक्षाओं को अपने जीवन में भी अमल किया और सभी के लिए एक आदर्श सदभाव की मिसाल कायम की. उन्होंने अपने पुरे जीवन को समाज में एकरूपता लाने के लिए अर्पित कर दिया. 


गुरु नानक जी द्वारा लाये गये बदलाव : 

लंगर - इन्होने लंगर परंपरा की भी शुरुआत की, जहाँ अछूत भी उच्च जाति के लोगो के साथ पंक्ति में बैठकर भोजन करते थे. लंगर उच्च नीच के फर्क को दूर करता है और सबको बराबरी का हक देता है. आज भी सभी गुरुद्वारों में लंगर की परंपरा कायम है, जहाँ बिना भेदभाव के संगत की सेवा की जाती है.  


संगत - जातिगत वैमनस्य को खत्म करने के लिए गुरु नानक जी ने संगत परंपरा की शुरूआती की, जहाँ हर जाती के लोग एक साथ इक्कठे होते है और प्रभु की आराधना करते है. 


भाई - गुरु नानक जी ने निम्न जात्ति के लोगो को भाई कहना आरंभ किया ताकि लोगो के मन से एक दुसरे के प्रति द्वेष दूर हो सके और भाईचारे की भावना प्रसारित हो सके. 


प्रकाश पर्व उत्सव :

गुरुनानक जयंती के दिन गुरुद्वारों को बहुत सुन्दर तरीके से सजाया जाता है. साथ ही इस दिन हर गुरुद्वारे में लंगर लगाया जाता है. इस दिन सभी गुरुद्वारों में पूजनीय ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहब जी का अखंड पाठ किया जाता है और इस ग्रंथ को फूलो से सजाया जाता है. इसके बाद इस  पवित्र ग्रंथ को एक पालकी में रखकर नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है. मान्यता के अनुसार पालकी  के आगे पंजप्यारे चलते है और श्रद्धालु चल समारोह के लिए मार्ग को साफ़ करते है. न सिर्फ सिख बल्कि हर धर्म के लोगो में इस उत्सव को लेकर बहुत उत्साह होता है. 

ऐसा कहा जाता है कि जब गुरु नानक देव जी ने अपने शरीर को त्यागा तो उनके शरीर के स्थान पर सिर्फ  फुल मिले थे. इन फूलो का गुरु जी के हिन्दू और मुसलमान अनुयायिओं ने अपनी अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया.
 
गुरु नानक जयंती प्रकाश पर्व कथा
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