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Maharishi Parashari ke Bhagya Parivatan Upay or Totke | महर्षि पाराशरी के भाग्य परिवर्तन के उपाय और टोटके

ऋषि पाराशरी उपाय
ज्योतिष शास्त्र में ज्योतिष की एक नही बल्कि अनेक धाराएँ चलती है, उन्ही धाराओं में से एक है पाराशरी पद्धति, इस पद्धति को दशा गणना के लिए सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है. इसे ज्योतिष शास्त्र के पितामह महर्षि पाराशरी ने निर्मित किया था. लाल किताब के अनुसार पराशर पद्धति के उपाय बाकि सभी विद्याओं से शीघ्र प्रभाव डालते है. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
महर्षि पाराशरी के भाग्य परिवर्तन के उपाय और टोटके
महर्षि पाराशरी के भाग्य परिवर्तन के उपाय और टोटके
इसलिए जब भी किसी ग्रह से संबंधित कोई दशा प्रारंभ हो रही हो, चाहे वो अच्छी ग्रहदशा हो या बुरी, उस वक़्त पराशर उपायों को जरुर अपनाना चाहियें. इसका फायदा ये होता है कि गोचर में दशानाथ / अंतदर्शानाथ की खराब स्थिति होने पर भी आपको कोई अशुभ प्रभाव नही झेलना पड़ता. महर्षी पराशर का अनुसरण मुख्यतः दैवज्ञ समाज के लोग करते है. आज हम आपको हिन्दू समाज से जुड़े 3 प्रारब्ध / भाग्य के बारे में बता रहे है. जो निम्नलिखित है –
·         दृढ़ प्रारब्ध / भाग्य : ये वो प्रारब्ध है जो कभी परिवर्तित नही होता.
·         अदृढ़ प्रारब्ध / भाग्य : इस प्रारब्ध को बदला जा सकता है.
·         दृढादृढ़ प्रारब्ध / भाग्य : इसे आधा तो बदला जा सकता है किन्तु आधा नही बदला जा सकता.
इन तीनो प्रारब्धो में दृढादृढ़ प्रारब्ध को प्रधान माना जाता है. इसके अनुसार जो भी प्रारब्ध में लिखा गया है, उन कष्टों को ग्रहशांति के प्रयोगों को अपनाकर सफलतापूर्वक घटाया जा सकता है.
महर्षि पाराशर द्वारा दिए गये दर्शनों का सारांश कुछ इस प्रकार है –
ज्योतिष शास्त्र के पितामह द्वारा बताये भाग्य परिवर्तन मंत्र
ज्योतिष शास्त्र के पितामह द्वारा बताये भाग्य परिवर्तन मंत्र
-    सूर्य : अगर सूर्य की महादशा चल रही है तो महामृत्युंजय मंत्र, शिवजी की कर्मकांड, स्त्रोतपाठ और मंत्रजाप आदि रूपों में आराधना करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.
-    चन्द्र : चन्द्र की महादशा होने पर जातक को सफ़ेद गाय को दान करना चाहियें और शिव सहस्त्रनामस्त्रोत का नियमित रूप से पाठ करना चाहियें.
-    मंगल : वैदिक मंत्र व सूक्तो का जाप, अथर्वशीषो का जप, वैदिक मंत्रो से संध्यावंदन और चंडी पूजन से मंगल की महादशा से मुक्ति मिलती है.
-    बुध : बुध की महादशा के होने पर जातक को विष्णु सहस्त्रनामस्त्रोत का पाठ करना चाहियें, इससे जातक के सभी कष्टों का हनन होता है.
-    गुरु : इन जातको को अपने इष्ट देव को हमेशा खुश रखना चाहियें, अपने से बडो और गुरुओं का आदर करना चाहियें और शिव सहस्त्रनामस्त्रोत का पाठ करना चाहियें, इससे इनके जीवन से  गुरु की महादशा हट जाती है.
-    शुक्र : अगर आप पर शुक्र की महादशा चल रही है तो आपको यजुर्वेद में दिए रुद्री का पाठ व अनुष्ठान करना चाहियें. साथ ही आप भगवान शिव महामृत्युन्जय का भी पाठ करना चाहियें.
-    शनि : शनि की दशा होने पर भी जातक को महामृत्युंजय का जाप करना चाहियें किन्तु ध्यान रहे कि इस स्थिति में पाठ का जाप स्वयं खुद करें. 
-    राहू : माता दुर्गा जी की आराधना कर्मकांड, स्त्रोतपाठ और मंत्रजाप करने से आपको राहू की महादशा से मुक्ति मिलती है. साथ ही आप काली गाय या भैंस का भी दान जरुर करें.
-    केतु : केतु की महादशा होने पर भी जातक को देवी दुर्गा की ही पूजा करनी चाहियें. इसके लिए जातको को शतचंडीपाठ का अनुष्ठान करना चाहियें. साथ ही बकरी का दान इनके लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
कुंडली में द्वितीयेश या सप्तमेश की दशा या भाव को सुधारने के लिए भी महामृत्युंजय मंत्र का ही जाप या हवन करना चाहियें. महर्षि पाराशर का माना था कि मंत्रजाप कभी विफल नही होते और इनका उपयोग ग्रहदोष को कम करने के लिए पुर्णतः सहायक है. इसके अलावा सभी मनीषी ये भी मानते है कि किसी भी ग्रह की महादशा को शांत करने के लिए शिवमंत्रो और विष्णुसहस्त्रनाम का जाप ही सबसे अधिक लाभदायी होता है. 
Maharishi Parashari ke Bhagya Parivatan Upay or Totke
Maharishi Parashari ke Bhagya Parivatan Upay or Totke
Maharishi Parashari ke Bhagya Parivatan Upay or Totke, महर्षि पाराशरी के भाग्य परिवर्तन के उपाय और टोटके, Mahamrityunjay Mantra or Vishnusahastranaam Mantra ka Mahatv, Bhagya Parivartan Mantra by Grandfather of Astrology, ज्योतिष शास्त्र के पितामह द्वारा बताये भाग्य परिवर्तन मंत्र.



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