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Ayurved mein Angur ka Mahattav | आयुर्वेद में अंगूर का महत्तव | Importance of Grapes in Ayurveda

1.        कान बहने की बीमारी कुछ लोगो को हो जाती है. जिससे उन्हें सुनने में भी परेशानी होती है, तथा कान से पित्त भी बहता है.इस बीमारी को दूर करने में खट्टे अंगूर का पका हुआ रस बहुत ही उपोयोगी होता है.इससे पकाने के लिए एक बर्तन में अंगूर के रस को डालकर अच्छी तरह पकाना चाहिए. इसे जब तक पकाना चाहिए जब तक की यह गाढ़ा न हो जाये. जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसे आँच पर से उतारकर ठंडा करने के बाद एक सीसी में बंद कर देना चाहिए. पके हुए रस में शहद को मिलाकर कान में 2 – 2 बूंद सुबह और शाम को डालना चाहिए . अगर पित बहना फिर भी कम न हो तो अंगूर के रस में दोगुना शहद को डालकर उसे थोडा गरम करके कान में डालना चहिये .एसा करने से अवश्य ही कान से पित्त बहना बंद हो जायेगा.

2.          गठिया के रोग में अंगूर का सेवन करना लाभदायक होता है. इस रोग में रोजाना सुबह और शाम को अंगूर के सेवन से यह रोग ठीक हो जाता है. 

3.          अक्सर बच्चों के दांत टूट जाते है या निकल जाते है. जिससे बच्चो को दांतों में दर्द भी होता है . ऐसा तब अधिक होता ही जब बच्चो के दूध के दांत टूट जाते है तथा उसकी जगह पर नये दांत आने लगते है.ऐसे में बच्चो को रोजाना  सुबह और रात को दो – दो चम्मच अंगूर का रस पिलाना चाहिए. जिससे बच्चों  को दांत के दर्द से जल्द ही आराम मिलता है. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
आयुर्वेद में अंगूर का महत्तव
आयुर्वेद में अंगूर का महत्तव

4.          कभी – कभी शरीर पर छोटे –छोटे दाने निकल जाते है जिन्हें चेचक कहा जाता है. चेचक की बीमारी से मुक्ति पाने के लिए अंगूर खाना बहुत ही उपयोगी होता . चेचक की बीमारी से मुक्त होने के लिए अंगूर को गरम पानी से धो कर खाने से चेचक की बीमारी ठीक हो जाती है.

5 .    ख़ासी – जुखाम ख़ासी जुखाम ऐसि बीमारी है जो किसी भी व्यक्ति को बहुत ही जल्दी हो जाती है.थोडा सा मौसम में परिवर्तन हुआ नही की ख़ासी जुखाम की परेशनी हो गई .ख़ासी जुखाम की बीमारी में अधिकतर गले में दर्द हो जाता है तथा जुखाम में नाक बंद हो जाती है. जिससे साँस लेने में बीमार व्यक्ति को बहुत ही दिक्कत होती है. खासकर की जब ख़ासी जुखाम बच्चो को हो जाता है.बच्चो को ख़ासी जुकाम की बीमारी होने पर या बुखार होने पर मुनक्का का सेवन अत्यधिक लाभदायक होता है. परन्तु कवल मुनक्का का ही सेवन न करके  उसके साथ मुलेठी का भी सेवन करने से ख़ासी जुखाम जल्दी ठीक हो जाता है. क्योंकि मुलेठी खासतौर से ख़ासी की शिकायत होने और गले को ठंडक प्रदान करती है.
 
Ayurved mein Angur ka Mahattav
Ayurved mein Angur ka Mahattav

6.    मलेरिया का रोग मच्छरों के काटने के कारण होता है. यह रोग कभी – कभी शरीर के लिए बहुत ही घातक भी सिद्ध हो जाता है. मलेरिया के मच्छर हमेशा गंदे रुके हुए पानी में पनपते है. इस रोग से बचने के लिए सबसे पहले हमे अपने आस – पास सफाई का दयां रखना चाहिए. अगर मेरिय हो भी जाता है तो इससे छुटकारा पाने के लिए हमे मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को अंगूर के रस का सेवन करना चाहिए . अंगूर का रस मलेरिया की बीमारी में पीना बहुत ही फायदेमंद होता है. छोटे बच्चो को अक्सर निमोनिया की शिकायत हो जाती है. निमोनिया की बीमारी में भी अंगूर के रस का सेवन करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और उनको निमानिया से मुक्ति दिलाने के लिए बहुत ही सहायक होता है. 

7.       अगर किसी व्यक्ति को भूख कम लगती हो या जिस समय भूख लगी हो उस समय खाना न खाने से उनकी भूख मिट जाती हो और जब खाना खाने बैठते हो तो कम खाना खाया जाता हो , इस प्रकार की शिकायत हो तो ऐसे में अंगूर के रस को पीना बहुत ही लाभदायक होता है, लेकिन केवल अंगूर का रस न पीकर उसमे निम्बू का रस और काला नमक मिलकर पीने से भूख ज्यादा लगेगी. तथा पेट की पाचन क्रिया भी ठीक तरीके से होगी.
 
Importance of Grapes in Ayurveda
Importance of Grapes in Ayurveda

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