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Janam Kundli Milaan ke Liye Aath Karak | जन्म कुंडली मिलान के लिए आठ करक

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली व्यक्ति के भविष्य, स्वभाव, उसकी पसंद, नापसंद, उसके व्यव्हार और उसकी कुशलता के बारे में बताता है. कुंडली मिलान और गुण गणना भारत में बहुत प्रचलित प्रथा है.  कुछ ज्योतिष ऐसे है जो कुंडली मिलाने के लिए परंपरागत तरीका का ही इस्तेमाल करते है वहीँ कुछ कॉमपोसाईट चार्ट का इस्तेमाल करते है.वैवाहिक परंपरा और उसकी मान्यताओं के अनुसार वर और वधु की सम्यक कुंडली का मिलान किया जाता है ताकि ये निर्धारित किया जा सके कि शादी के बाद दोनों में मैत्री और सामंजस्य की स्थिति ठीक रहे और दंपति का आने वाले भविष्य सुख समृद्धि और वंशवृद्धि से परिपूर्ण हो.
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विवाह को 16 संस्कारों में से सर्वश्रेष्ठ संस्कार माना जाता है क्योकि इसमें व्यक्ति धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सभी की प्राप्ति करता है. विवाह के उपरांत ही व्यक्ति देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण से मुक्त हो पाता है. इसीलिए विवाह से पहले हर तरह की सावधानी को  बरता जाता है. ताकि  दंपति के जीवन में सुख हो और वो इस संस्कार को सही तरह से निभा सके. इन्ही में सबसे पहले आता है कुंडली मिलान, कुंडली मिलाने की प्रक्रिया को बहुत ही मुश्किल कार्य माना जात्ता है, क्योकि इसमें सभी ग्रहों, उनकी चलो, उनके भावो आदि अनेक तरह की जानकारी को ध्यान में रखा जाता है, साथ ही उनमें भविष्य में होने वाले परिवर्तन और उनके प्रभावों को भी बारीकी से  देखा जाता है. जो इस कार्य को और भी कठिन और पेचीदा बनता है. आज हम आपको जन्म कुंडली से संबंधित बातो को बता रहे है, जिन्हें जानकर आप भी कुंडली मिलन के महत्त्व को समझ पाओगे. 


कुंडली मिलान के लिए देखे जाने वाले अष्टकूट :

शादी से पहले गुण मिलान के लिए वर वधु की जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति के आधार पर निम्न आठ चीजो को ध्यान में रखा जाता है. 


1.   वर्ण

2.   वश्य

3.   तारा या दिन

4.   योनि

5.   ग्रह मैत्री

6.   गण

7.   भकूट

8.   नाडी


इन सभी घटकों को कुछ निश्चित अंक दिए है जैसेकि वर्ण को 1 अंक, वश्य को 2 अंक, तारा या दिन को 3 अंक, योनि को 4 अंक, ग्रह मैत्री को 5 अंक, गण क 6 अंक, भकूट को 7 अंक और नाडी को 8 अंक दिए गये है. इन सभी अंको को जोड़ कर कुल 36 अंक होते है, इन्ही के आधार पर ये देखा जाता है कि वर वधु में कितने गुण मिलते है. जितने अधिक गुण का योग मिलता है उतनी ही अधिक इनके दाम्पत्य जीवन में खुशहाली आती है. 36 में से 18 गुणों के मिलने परउसे औसत कुंडली माना जाता है वहीँ 28 गुणों के मिलने वाली कुंडली को संतोषजनक समझा जाता है. 


इन अष्टकूटो और गुणों के आधार पर अनेक तरह के निर्णयों को लिया जाता है जैसेकि अगर दोनों की नाडी एक जैसी है तो इसे दोष माना जाता है और ऐसे दंपति को बच्चे के जन्म में दिक्कतों को आ सकती है. साथ ही लड़की के स्वान ( कुत्ते ) योनि से में पैदा होने और लड़के के मंजर ( बिल्ली ) योनि में पैदा होने पर लड़की हमेशा लड़के पर हावी होगी. इसी तरह से हर गुण का अपना एक महत्त्व होता है. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
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कुंडली मिलान से जुड़े 10 कारक :

-       धिना : इसमें दंपति के सितारो के आधार पर देखा जाता है कि उनका जीवन कितना लम्बा होगा.


-       गण : ये दंपति के सुखी जीवन और उनकी सामान्य भलाई का प्रतिनिधित्व करता है. 


-       महेंद्र : इससे दंपति के जीवन में बच्चे की सम्भावना को देखा जाता है. 


-       स्त्री दीर्घा : इससे भी दंपति के जीवन में सुख समृद्धि  को देखा जाता है.


-       योनि : इससे दंपति के आनंदित और संतुलित वैवाहिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है. 


-       राशि : ये संतान और संतान से मिलने वाले सुख के बारे में बताता है. 


-       वैस्य : इसमें विवाह से मिलने वाले प्रेम और खुशियों की  सम्भावना को देखा जाता है. 


-       रज्जू : ये दंपति के लम्बे वैवाहिक जीवन के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है.


-       वेधई : जितना कम वेधई होता है उतनी ही कम आपके जीवन में विपदाएं आती है.


माना जाता है कि फलित ज्योतिष में जन्मलगन की प्रधानता अहम होती है किन्तु वर वधु से जुडी जन्मकुंडली का मिलान करते वक़्त जन्मराशि  ही मेलापक का मूल आधार बनती है. इसमें चंद्रमा के नक्षत्र की स्थिति के आधार पर मेलापक संबंधी निर्णय लिए जाते है. लेकिन आज नाम के प्रथम अक्षर के आधार पर भी जन्मनक्षत्र का निर्धारण किया जाने लगा है किन्तु ये उसी स्थिति में होता है जहाँ जातक को अपने जन्म से संबंधित जानकारी जैसे जन्मतिथि, समय और स्थान का ज्ञात नहीं होता. इस तरह से जन्म कुंडली का मिलान करना उचित नही माना जाता क्योकि इसे किसी भी तरीके से शास्त्र में सम्मिलित नही किया गया है और न ही इसे  तर्कसंगत माना जाता है. कुछ ज्योतिष इस तरह जन्मकुंडली के मिलान को ज्योतिष विद्या का दुरुपयोग मानते है और इससे ज्योतिष की विद्या पर विश्वास पर एक बहुत ही बड़ा प्रसन्न चिह्न खड़ा करते है. इसके अलावा आजकल कुंडली के मिलान के लिए कंप्यूटर का सहारा लिया जाने लगा है जो सही है क्योकि कंप्यूटर मात्र गाणितिक संख्याओं की ही गणना करता है अंतिम निर्णय तो ज्योतिष ही लेता है. 

जन्म कुंडली मिलान के लिए आठ करक
जन्म कुंडली मिलान के लिए आठ करक



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