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Speaker Kya Hota hai | स्पीकर्स क्या होते है | Explain Speaker and its Works

स्पीकर ( Speaker )

स्पीकर कंप्यूटर हार्डवेयर के बाहरी यंत्रो में से एक है. इनको कंप्यूटर के साथ जोड़ने का उद्देश्य ये है कि आप कंप्यूटर की ऑडियो साउंड को सुन सको. ये कंप्यूटर से जुड़े CD, DVD इत्यादि में सेव ऑडियो ( जैसे गाने और विडियो ) से इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को लेता है और उन्हें ऑडियो में बदल देता है. मल्टीमीडिया और गेम बहुत ही विख्यात होते जा रहे है तो उनके इस्तेमाल में स्पीकर का बड़ा योगदान होता है. कंप्यूटर साउंड कार्ड इतना ज्यादा पावरफुल नही होता कि वो एक स्पीकर को चला सके इसीलिए स्पीकर को काम करने के लिए अलग से विधुत की आवश्कता होती है. आज हमे अलग अलग आकार और फ्रीक्वेंसी पर काम करने वाले स्पीकर मिलते है.   


स्पीकर के काम करने का मुल्यांकन ज्यादातर तीन चीजों के आधार पर किया जाता है.

1.       Frequency : ये स्पीकर की आवाज की रेंज ( कम या ज्यादा ) की पहचान करता है और उसे नापता है.

2.       THD ( Total Harmonic Distortion ) : ये एम्पलीफायर द्वारा दिए गये सिग्नल में से आवाज़ की विकृति को नापता है.

3.       Watts : ये इस बात का ध्यान रखता है कि स्पीकर में कितनी क्षमता की amplification हो रही है. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
Speaker Kya Hota hai
Speaker Kya Hota hai

स्पीकर कार्य कैसे करता है?

स्पीकर का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यही होता है कि वो एलेक्ट्रोमेग्नटिक ( electromagnetic ) वेव को साउंड वेव में बदले. इसके लिए स्पीकर सबसे पहले डिवाइस ( जैसेकि कंप्यूटर या कोई ऑडियो रिसीवर ) से आवाज को लेता है. ये आवाज़ या तो एनालॉग होती है या फिर डिजिटल. अगर आवाज़ की परवर्ती एनालॉग है तो एक एनालॉग स्पीकर इसे सीधे ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव से साउंड वेव में बदल देता है.  किन्तु अगर आप आवाज़ की परवर्ती डिजिट है तो एक डिजिटल स्पीकर इसे पहले एनालॉग सिग्नल में बदलता है फिर इसे साउंड वेव में बदला जाता है. 


जो साउंड निकलती है उसे frequency या amplitude कहा जाता है. फ्रीक्वेंसी बताती है कि आवाज़ कितनी ऊँची या नीची थी. एक अच्छी आवाज का निर्धारण इस बात से होता है कि स्पीकर के पास कितनी अच्छी आवाज के सिग्नल मिल रहे है. अब बाजार में ऐसे स्पीकर मिलते है जिनमे एक से ज्यादा स्पीकर कोन होते है जो आवाज की गुणवत्ता को बढ़ा देते है. 


जबकि amplitude का काम होता है कि वो साउंड वेव के द्वारा बनाये गये दबाव को महसूस करे. जितना ज्यादा आप आवाज पर दबाव देते हो उतना ही ज्यादा तेज आवाज़ आपको सुनाई देती है. इसीलिए स्पीकर का इस्तेमाल उन यंत्रो में किया जाता है जिनमे ऑडियो का सोर्स अच्छा नही होता जैसेकि साउंड कार्ड. इनकी आवाज़ की क्षमता और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ही स्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है. 
 
Explain Speaker and its Works
Explain Speaker and its Works

हमेशा स्पीकर जोड़े में आते है ताकि ये स्टीरियो ( स्टीरियो ) साउंड निकल सके. जिसका अर्थ है कि दोनों स्पीकर अलग अलग चेंनेल की आवाज को निकल कर उसकी गुणवत्ता को बढ़ा सके. इनके इस्तेमाल से संगीत की आवाज नेचुरल लगी है और आपको संगीत सुनने का पूरा आनंद मिल पाता है. किन्तु बाजार में आज subwoofer मिलते है जिनमे 4 से 7 स्पीकर का इस्तेमाल एक साथ किया जाता है. इसके इस्तेमाल से आपको आवाज़ का ओर भी ज्यादा सजीव अनुभव मिलता है.


स्पीकर के प्रकार :

स्पीकर की फ्रीक्वेंसी के और उसके आवाज पर दबाव के आधार पर आज आपको अनेक प्रकार के स्पीकर मिल जायेंगे किन्तु उनके इस्तेमाल करने के तरीके के आधार पर आप उन्हें 4 भागो में बांट सकते हो जो निम्नलिखित है – 


·         PC Speaker : ये कंप्यूटर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्पीकर है. साउंड कार्ड के आधार पर इस्तेमाल होने वाले ये स्पीकर बहुत ही साधारण और इस्तेमाल करने में आसान होते है. 


·         Multi – channel Speaker : ये चेंनेल के आधार पर साउंड को निकलते है. जैसेकी 5.1 चैनल जिसका अभिप्राय है की ये 5 स्पीकर पर काम करते है और इनमे 1 सब्वूफेर होता है, जो आवाज की गुणवत्ता को बढ़ाने का कार्य करता है. इनकी कीमत थोड़ी ज्यादा होती है किन्तु इनकी आवाज की गुणवत्ता आपको ऑडियो का एक अलग ही अनुभव कराती है.


·         Standard Speaker : ये साधारण फ्रीक्वेंसी और चेंनेल के आधार पर काम करते है. जैसेकी 2.1 चेंनेल अर्थात इसमें 2 स्पीकर का इस्तेमाल होता है. इनकी गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए इनमे कोई सब्वूफेर नही होता. ये स्पीकर बहुत ही विख्यात होते है. ये ऑफिस में इस्तेमाल के लिए सबसे ज्यादा अच्छे माने जाते है क्योकि ये उतनी ही आवाज प्रवाहित करते है जितनी की एक ऑफिस में होनी चाहिए. साथ ही इनकी कीमत भी बहुत कम होती है. 


·         USB Speaker : इनको वायरलेस स्पीकर भी कहा जाता है. इनके इस्तेमाल के लिए आपको आपके कंप्यूटर में एक USB को जोड़ना पड़ता है. ये सिर्फ एक निर्धारित रेंज के अंदर ही कार्य करते है और उस रेंज के अंदर इन्हें आप कहीं भी रख सकते हो. साथ ही इनकी आवाज की गुणवत्ता बहुत ही ज्यादा अच्छी होती है.


स्पीकर के लाभ :

-    ये इलेक्ट्रिक सिग्नल के आधार पर साउंड निकलने में सहायक होती है.

-    इनको इस्तेमाल करना बहुत ही आसान होता है. साथ ही इनका वजन भी बहुत हल्का होता है.

-    अगर इनका अच्छी तरह से ध्यान रखा जाए तो ये काफी लम्बे समय तक काम करते है.

-    इसके इस्तेमाल से आप अपने कंप्यूटर में आसानी से किसी मल्टीमीडिया को सुन सकते हो.


स्पीकर की हानि :

-    इनको अपने कंप्यूटर में इस्तेमाल करने के लिए आपको अपने कंप्यूटर में सबसे पहले एक साउंड कार्ड को इनस्टॉल करना पड़ता है.

-    इनको इस्तेमाल करने के लिए आपको अलग से विधुत सप्लाई की आवश्कता होती है.

-    इनको खंरिदने के लिए आपको अच्छी कीमत अदा करनी पड सकती है.

-    ये आपकी टेबल पर हैडफ़ोन से कहीं ज्यादा जगह घेर लेते है.

-    साथ ही ये व्यक्ति को उनके काम से भटका देते है.
 
स्पीकर्स क्या होते है
स्पीकर्स क्या होते है

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