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Vaayavya Mukhi Bhavan Nirmaan Vaastu Siddhant | वायव्य मुखी भवन निर्माण वास्तु सिद्धांत | Vaastushastra Tips for North West Home

वायव्य मुखी घर का निर्माण ( Architectural Tips for North West House )
वास्तुशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो सृष्टि के पांच तत्वों पर आधारित होता है. वास्तुशास्त्र हर निर्माण के सिद्धांत और उनसे उत्पन्न वास्तुदोष निवारण के बारे में बताता है. वास्तुशास्त्र में वायव्य मुखी भवन उस घर को कहा जाता है जिसका मुख वायव्य कोण में हो अर्थात उत्तर पश्चिम दिशा की तरफ हो. साथ ही इन घर के मुख की दिशा में कोई सड़क या रोड भी हो. इस कोण के स्वामी चंद्र देव होते है साथ ही वायु तत्व वायव्य कोण का प्रतिनिधित्व करता है. क्योकि वायु तत्व इस दिशा के प्रतिनिधि है तो इस घर में खिडकियों और रोशनदानों को अधिक से अधिक बनवाना चाहियें. CLICK HERE TO KNOW कैसा हो वास्तु सम्मत दक्षिण मुखी भवन ... 
Vaayavya Mukhi Bhavan Nirmaan Vaastu Siddhant
Vaayavya Mukhi Bhavan Nirmaan Vaastu Siddhant
·     प्रभाव (       Effects ) : वायव्य मुखी घर में किसी भी तरह का वास्तु दोष होने के कारण उसका सीधा असर घर में रहने वाले लोगों के मानसिक संतुलन पर पड़ता है. साथ ही घर के सदस्यों को सर्दी खांसी और छाती से सम्बंधित कुछ रोग हो जाते है.

·     मुख्य द्वार ( Main Gate ) : मुख्य द्वार बनाने के लिए आप उत्तर या फिर पश्चिम कोण का चुनाव ही करें. साथ ही आप इस बात का भी ध्यान रखें कि घर के सामने का हिस्सा बाकि सभी दिशाओं से थोडा नीचा होना चाहियें. इस तरह निर्माण करने से आप कानूनी, पुलिस जैसे झमेलों से दूर रहते हो.

·     खाली स्थान ( Empty Places ) : जैसाकि ऊपर बताया गया है कि ये दिशा वायु तत्व की प्रधानता की है तो इस घर में खाली स्थान का होना भी घर के लिए शुभ माना जाता है किन्तु खाली स्थान के लिए आप वायव्य कोण को चुनें. साथ ही आप घर में बरामदा और बगीचा भी अवश्य बनवायें.

·     घर में सुख समृद्धि ( Happiness and Prosperity in House ) : घर में सुख समृद्धि लाने के लिए आप हनुमान जी को घर के प्रवेश द्वार के ठीक सामने वाली दीवार पर ऐसे लगायें कि घर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को हनुमान जी के दर्शन हो.  CLICK HERE TO KNOW उत्तरमुखी भवन का वास्तु विज्ञान ...
वायव्य मुखी भवन निर्माण वास्तु सिद्धांत
वायव्य मुखी भवन निर्माण वास्तु सिद्धांत
·     मुखिया का कमरा ( Room of Head ) : घर के मुखिया का बेडरूम बनाने के लिए आप आप पूर्व दिशा का चुनाव करें. इससे उनके मन की चिंता खत्म होती है और वो अपने घर और काम को अच्छी तरह व्यवस्थित रखता है.

·     ड्राइंग रूम ( Drawing Room ) : मेहमानों को भगवान का दर्जा दिया जाता है इसलिए हर घर में एक ड्राइंग रूम अर्थात मेहमान कक्ष अवश्य होता है. मेहमान के कमरे को बनाने के लिए वायव्य मुखी भवन में वायव्य दिशा को ही श्रेष्ठ माना जाता है. साथ ही इस दिशा को उन कन्याओं के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है जिनकी उम्र विवाह योग्य हो चुकी होती है.

·     रसोई ( Kitchen ) : घर में रसोई की दिशा के लिए आप आग्नेय या फिर पूर्व दिशा को चुन सकते हो. इससे घर की रसोई का चुल्हा हमेशा प्रजवलित रहता है अर्थात घर में खान पान और अन्न भंडार में कभी कमी नहीं होती.
Vaastushastra Tips for North West Home
Vaastushastra Tips for North West Home
·     वास्तु दोष का प्रभाव ( Effect of Vaastu Dosh on Family ) : वायव्य मुखी भवन में वास्तु दोष होने पर घर में धन की हानि होती है, यश की हानि होती है, घर का हर सदस्य पैसे पैसे के लिए मोहताज हो जाता है. सब इनका साथ छोड़ देते है. घर के मुखिया पर कोई विश्वास नहीं करता जिसकी वजह से उसे कई बार अपमानित भी होना पड़ता है. मुसीबत यहीं खत्म नही होती बल्कि परिवार पर पुलिस कार्यवाही भी होती है, इस घर के निवासी नकारात्मकता और निराशा का शिकार बन जाते है.

·     वास्तु दोष निवारण मंत्र ( Mantra to Remove Vaastu Dosh ) : अगर इन घरों में किसी भी तरह का वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है तो उस घर के मुखिया को नियमित रूप से ओम चन्द्रमसे नमः “ मंत्र का जाप कारण चाहियें.
वायव्य मुखी घर का निर्माण
वायव्य मुखी घर का निर्माण
·     वास्तु दोष निवारण उपाय ( Way to Remove Architectural Problems ) : घर को वास्तु दोषों से मुक्त रखने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को भी अपना सकते हो.

-   घर में बाथरूम, स्टोर रूम और शौचालय के लिए उत्तर पश्चिमी दिशा का चुनाव करें.

-   घर को हमेशा साफ़, सुखा और स्वच्छ रखें.

-   दीवारों पर हल्का पेंट कराएं. अगर आप क्रीम रंग का इस्तेमाल करें तो वो आपके लिए अधिक लाभकारी होगा.

-   घर की दीवारों पर मोर पंख या फिर 2 बांसुरियों क्रॉस की अवस्था में लगवायें.

-   क्योकि चंद्र देव जी घर के स्वामी है तो उसकी कृपा पाने के लिए आप घर में “ चंद्र यन्त्र “ की स्थापना भी करवा सकते हो. 

-   इसके साथ ही आप घर के प्रवेश द्वार को जितना खुबसूरत हो सके उतना खुबसूरत बनवाएं और उसे सजा कर रखें.

-   मुख्य द्वार पर ही गणेश जी की ऐसी 2 तस्वीरें लगवाएं जिसमे उनके 1 चित्र का मुंह बाहर तो दुसरे का मुंह अंदर की तरफ हो.


वायव्य मुखी भवन निर्माण या किसी अन्य निर्माण संबंधी वास्तु विज्ञान और सिद्धांतों को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
वायव्यमुखी घर
वायव्यमुखी घर
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