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Happy Deepawali Tyohar ki Poojan Vidhi or Mahattav | दीपावली त्यौहार की पूजन विधि और महत्तव | Importance and Worship Ritual for Deepawali Festival

दीपावली का त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. दीपावली यानी धन और समृद्धि का त्यौहार. इस त्यौहार में गणेश और माता लक्ष्मी के साथ साथ धनाधिपति भगवान कुबेर, माता सरस्वती और काली माता की भी पूजा होती है. सरस्वती और काली माता को लक्ष्मी जी का सात्विक और तामसिक रूप है, जब सरस्वती, काली और लक्ष्मी माता एक होती है तभी महालक्ष्मी बनती है. 


दीपावली के दिन गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति को समृद्धि और ज्ञान मिलता है, जिससे व्यक्ति में धन को कमाने की प्रेरणा आती है. इसके साथ व्यक्ति में इस बात की भी समझ बढ़ जाती है कि उन्हें धन का सदूपयोग करना चाहियें. माता लक्ष्मी व्यक्ति की पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें धन का वरदान देती है और धनकुबेर व्यक्ति को धन के संग्रह का वरदान देते है. इन्ही सब उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दीपावली के दिन इन सभी देवी देवताओं की पूजा होती है. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...

Importance and Worship Ritual for Deepawali Festival
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दीपावली 5 पर्वो की श्रंखला :

दीपावली सिर्फ एक त्यौहार नही है बल्कि ये त्योहारों की एक श्रंखला है, इससे पांच पर्व जड़े हुए है. सभी पर्वो की अपनी ही एक दन्त कथा है. दीपावली के त्यौहार की शुरुआत इससे दो दिन पहले होती है और ये दीपावली के दो दिन बाद ख़त्म होता है. 


-       दीपावली के पर्व की शुरुआत कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन धनतेरस से होती है, जिसे आरोग्य के देवता धन्वंतरी जी की अराधना के लिए मनाया जाता है. इस दिन घी के दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का आवाहन किया जाता है. 


-       इसके अगले दिन चतुर्दशी को नरक चौदस के रूप में मनाया जाता है. इसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है. इस दिन पुराने दीपक में सरसों का तेल और 5 अन्न के दाने डालकर घर की नाली की तरफ जलाया जाता है. इससे एक कथा ये भी जुडी है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध करके 16000 कन्याओं को मुक्त कराया था. 


-       अगले दिन अमावस्या को दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन से हर समुदाय की अलग अलग कथा जुडी है जैसेकि

§  राम भक्त मानते है कि इस दिन भगवान श्री राम रावणवध करके अयोध्या लौटे थे और उनके लौटने की ख़ुशी में घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया जाता है. 


§  कृष्ण भक्त मानते है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था. इस असुर के वध से जनता में अपार हर्ष फ़ैल गया था और लोगो ने ख़ुशी से घी के दीपक जलाये थे. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
Deepawali ki Shubhkaamnayen
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§  पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण करके हिरण्यकश्यप नाम के असुर का वध किया था. 


§  जैन मतावलंबियों के अनुसार चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी का निर्वाण भी इसी दिन हुआ था. 


§  बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध के अनुयायियों ने इसी दिन गौतम बुद्ध के स्वागत के लिए लाखो दीपक जलाये थे. 


§  इस दिन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का शिलान्यास हुआ था और इसी दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को कारगार से रिहाई मिली थी. 


§  नेपालियों के लिए भी ये दिन बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योकि इसी दिन उन्होंने नेपाल संवत में नया वर्ष आरम्भ किया था.
 
Deepawali Wallpapers Images Photos
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-       दीपावली के अगले दिन अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है. लोग इस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर गोवर्धन की पूजा करते है. इसके पीछे भी श्री कृष्ण से एक कथा जुडी है, जिसके अनुसार उन्होंने अपनी चितली ऊँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अपने गाँव को इंद्र देव के क्रोध से बचाया था. 


-       अगला पर्व है भैयादूज का, जिसे शुक्ल पक्ष कि द्वितीया के दिन मनाया जाता है. एक मान्यता के अनुसार इस दिन भाई और बहन को यमुना नदी में स्नान करना चाहिए, ऐसा करने से इनके पास यमराज जी नही भटकते.
 
Happy Deepawali Tyohar ki Poojan Vidhi or Mahattav
Happy Deepawali Tyohar ki Poojan Vidhi or Mahattav

तो इस तरह से दीपावली के पर्व का महत्त्व बढ़ जाता है, इसीलिए इसे सिर्फ भारत में ही नही बल्कि पुरे विश्व में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. 


दीपावली पूजन सामग्री :

दीपावली की पूजा में अनेक देवी देवताओं की पूजा होती है इसीलिए इसके लिए कई पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. जैसेकि कलावा, रोली, सिंदूर, नारियल, अक्षत, लालवस्त्र, फुल, 5 सुपारी, लौंग, पान के पते, घी, कलश, कलश के लिए आम के पल्लव, चौकी, समिधा, हवनकुण्ड, हवन सामग्री, कमलगट्टे, पंचामृत ( दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल ), फल, बताशे, मिठाइयाँ, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रुई, आरती की थाली, रक्त चंदन और श्रीखंड चंदन.
 
 दीपावली की शुभकामनाएं
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दीपावली पूजन विधि :

इस दिन पूजा करने से पहले चौकी को धोकर उस पर रंगोली बनायें, अब आप चौकी के चारो कोंनो पर चार दीपक जला लो और चौकी पर थोड़े अक्षत रख लें. अब आप गणेश जी, माता लक्ष्मी, सरस्वती, काली और कुबेर की मूर्ति को स्थापित करें. आप माता लक्ष्मी जी की मूर्ति के साथ भगवान विष्णु जी की भी मूर्ति रखे और पूजा को शुरू करें.


·         गणपति पूजन : गणेश जी को प्रथम पूजक कहा जाता है अर्थात पूजा की शुरुआत में सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है. इसके लिए आप हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें. फिर आप उन्हें भगवान गणेश के चरणों में अर्पित करें. इसके बाद आप कुछ अक्षत को अपने हाथ में लेंकर गणेश जी को चढ़ाएं. अब आप इसी तरह से श्रीखंड चंदन और सिंदूर को अर्पण करें. गणेश पूजन के बाद आप प्रसाद बांटे. इसके बाद आप इसी तरह से सभी देवताओं की भी पूजा करें और अंत में मिठाई को बांटे.


·         कलश पूजन : कलश की पूजा के लिए आप कलश के ऊपर आम के पल्लव रखे और उसके ऊपर घड़े या फिर लोटे पर मोली बांधकर रखे. आप कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत, मुद्रा रखे. कलश के गले में आप मोली लपेटे. अब आप नारियल पर वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें. इसके बाद आप हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण देव का कलश में आवाहन करें. 


·         लक्ष्मी पूजन : लक्ष्मी पूजन के लिए आप सबसे पहले लक्ष्मी जी का ध्यान करें. इसके बाद आप लक्ष्मी जी की प्रतिष्ठा के लिए हाथ में अक्षत लेकर चढ़ाएं. इसी तरह आप रक्त चंदन और सिंदूर को अर्पित करें. अब आप लक्ष्मी जी को फूलो की माला पहनाएं और इंद रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र अर्पित करें. आप देवी सरस्वती और काली माता की भी इसी तरह से पूजा करें. 


·         दीपक पूजन : इस दिन दीपक की पूजा का विशेष महत्त्व है, इसके लिए आप दो थालो में दीपक रखे. आप 6 चौमुखी दीपक दोनों थालो में रखे और छब्बीस छोटे दीपक भी थाल में सजाएँ. आप इन सब दीपकों को जलाकर जल, रोली, खील, बताशे, चावल, गुड, अबीर, गुलाल, धुप आदि का पूजन करें और टीका लगायें. इस दिन पहले पुरुषो को फिर स्त्रियों को पूजन करना चाहियें. पूजा के बाद दीपकों को घर में जगह जगह रखे. आप एक चौमुखा और 6 छोटे दीपक गणेश लक्ष्मी जी के पास रख दें. आप चौमुखा दीपक का काजल अपने घर के सभी बच्चे, बड़े और वृद्ध लोगो की आँखों में लगायें. 

 
दीपावली त्यौहार की पूजन विधि और महत्तव
दीपावली त्यौहार की पूजन विधि और महत्तव

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