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Haija Dast ko Dur Kar Rahen Mast | हैजा दस्त को दूर कर रहें मस्त | Remove Cholera and Diarrhea are Live Happy

हैजा ( Cholera )
बरसात के शुरूआती दिनों में अगर किसी रोग का सबसे अधिक ख़तरा बना रहता है तो वो है हैजा. वैसे तो इसे आम रोगों की सूचि में रखा गया है किन्तु किसके भयंकर प्रभावों को अनदेखा नहीं किया जा सकता. इसके भयंकार प्रभाव रोगी की मृत्यु का कारण भी बन सकते है. एक अन्य बात जो इसे खतरनाक बनाती है वो ये है कि हैजा बहुत तेजी गति से फैलता है. CLICK HERE TO KNOW मृत्युदायी हैजा रोग का प्राकृतिक उपचार ... 
Haija Dast ko Dur Kar Rahen Mast
Haija Dast ko Dur Kar Rahen Mast
शरीर में हैजा के जीवाणु कैसे प्रवेश करते है ( How Cholera Bacteria Enters in Body ) :
शरीर में इसके जीवाणु कई प्रकार से पहुँच सकते है और जैसे ही ये शरीर में प्रवेश करते है वैसे ही अपना प्रभाव आरम्भ कर देते है. नीचे वे माध्यम बताएं गए है जो हैजे के जीवाणुओं के लिए शरीर में घुसने का एक माध्यम है.

-    पीने का पानी

-    भोजन

-    थूक

-    मल

-    कृमि

-    उल्टी

-    गन्दगी

-    ऐसे भोजन का सेवन जो कठिनाई से हजम होते है

-    पसीने में पानी पीना

हैजा दस्त को दूर कर रहें मस्त
हैजा दस्त को दूर कर रहें मस्त
हैजा होने के कारण ( Causes of Cholera ) :
§  मधुमक्खियों का घर में अधिक होना

§  दूषित आहार

§  अधिक भोजन

§  अत्याधिक कम भोजन

§  बदहजमी अर्थात खराब पाचन क्रिया

§  लू लगना

§  गंदगी

§  ना नहाना
Remove Cholera and Diarrhea are Live Happy
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हैजा होने के लक्षण ( Symptoms of Cholera ) :
§  लगातार उल्टी व पीले दस्त

§  चावल की मांड के समान दस्त

§  अधिक प्यास लगना

§  पेशाब का रुक जाना

§  लगातार कमजोर होते जाना

§  आँखें भीतर धंस जाना

§  हाथों व पैरों में अकडन व ऐठन 

§  शरीर का बार बार ठंडा व पीला पड़ना

§  शरीर में पानी की लगातार कमी

§  पेट दर्द, बचैनी और जलन

§  होंठ नाक कान नाखूनों का काला पड जाना

हैजा की अवस्था ( Cholera Stages ) :
·         आक्रमण अर्थात शुरूआती ( Starting Stage ) : इस अवस्था में रोगी को हल्के लेकिन पतले दस्त लग जाते है साथ ही उसे उल्टी भी आती रहती है जिससे उसे शरीर में कमजोरी का आभास होने लगता है.

·         पूर्ण विकसित ( Fully Developed Stage ) : अगर हैजा के जीवाणुओं ने आपको पुर्णतः घेर लिया है तो दस्त तेज हो जाते है, हाथों पैरों में अकडन बनी रहती है, लगातार प्यास लगती रहती है, मन बैचैन रहने लगता है और आँखे निरंतर अन्दर धसने लगती है. 

·         शितांग स्थिति ( Cold Stage ) : शितांग का मतलब ठण्ड से है अर्थात इसमें व्यक्ति का शरीर ठंडा पड जाता है. ये हैजा की सबसे भयंकर स्थिति है, इसमें रोगी की नाडी बीच बीच में टूटने लग जाती है, माथे पर लगातार पसीना आता रहता है, लगातार उल्टी आती रहती है. माना जाता है कि ये वो अवस्था है जिसमें अधिकतर पीड़ित मृत्यु को प्राप्त हो जाते है.
हैजा के कारण और लक्षण
हैजा के कारण और लक्षण
·         प्रतिक्रिया स्थिति या अवस्था ( Reaction ) : ये अवस्था शायद रोगियों को सबसे अच्छी लगे क्योकि इसे सुधार अवस्था भी कहा जाता है. इसमें रोगी धीरे धीरे ठीक होने लगता है, उसकी स्थिति सामान्य होने लगती है. रुका मूत्र भी मूत्र त्याग के द्वारा निकलने लगता है और उल्टी दस्त में आराम मिलता है.  

·         परिणाम अवस्था ( Resulting Stage ) : यहाँ दो बातें होती है पहली तो ये कि रोगी पुर्णतः ठीक हो जाता है और दूसरी ये कि हैजा का संक्रमण रोगी पर दुबारा आक्रमण कर देता है. अगर इस अवस्था में हैजा दोबारा आक्रमण करता है तो रोगी की मृत्यु की संभावना अधिक होती है.

हैजा से बचाव के उपाय और परहेज ( Tips for Protection from Cholera ) :
-    पानी का परहेज ( Don’t Use Water ) : जब बात हैजा से बचाव की आती है तो कुछ परहेज है जिन्हें पीड़ित को अवश्य ध्यान में रखना चाहियें और उनमे से पहला है पानी का परहेज. जी हाँ हैजा से परेशान लोगों के लिए पानी का परहेज अति आवश्यक है, सिर्फ नहाने में ही नहीं पीने में भी. अगर प्यास लगे तो रोगी को पीने के लिए पुदीने के रस में सौंफ मिलाकर देनी लाभदायी रहती है. अगर ये भी ना हो तो पानी को तब तक उबालें जब तक की उसका 16 हिस्सा न रह जाएँ अर्थात अगर आप 2 लीटर पानी उबालें तो उसे तब तक उबलने दें जब तक वो 125 ग्राम ना रह जाए. तब जाकर रोगी को पिलायें.

-    ठण्ड ना लगने दें ( Don’t Let the Patient Feel Cold ) : इस रोग में रोगी को ठण्ड शीघ्र लगती है जो उसकी हालत को और भी अधिक भयंकर बना सकती है. ऐसे में उसके कमरे में गर्मी की व्यवस्था बनाएं रखें. साथ ही उसके पैरों के बीच में गर्म पानी की बोतलें भी रखें. ध्यान रहें कि पानी इतना गर्म भी ना हो कि उसके पैर जल ही जाएँ.

-    कपूर का दीपक ( Use Camphor ) : कपूर रोगी के लिए बहुत फायदेमंद होता है इसलिए रोगी के उपचार में आप कपूर का कई तरह उपयोग कर सकते है. जैसे रोगी के कमरे में कपूर का दीपक जलाएं, उसे सूंघने के लिए कपूर दें, कपूर के तेल से उसके पैरों और हाथों की मालिश करें. अगर शरीर ठंडा पड जाता है तो कपूर, कस्तुरी, मकरध्वज और सौंठ के चूर्ण में शहद मिलाकर चटायें.

हैजा के जीवाणुओं के फैलने के अन्य तरीके, इसके कारण, लक्षण, अवस्था और परहेजों के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
Mrityudaayi Rog Haija Cholera

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