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दुसरे के मन और दिमाग को सेकंड्स में पढ़ सकते है आप - Dusre ke man ki baat jaan sakte hai

दुसरे के मन और दिमाग को सेकंड्स में पढ़ सकते है आप

सब चाहते है की सामने वाला क्या सोच रहा वो उसके बोले बिना ही समझ जाए, और ये शत प्रतिशत हो भी सकता है अगर आप एक छोटे से नियम को धारण कर लें. 

वास्ताव में होता ये की हमारे मन और दिमाग में विचारों की हमेशा बाढ़ आई रहती है. जो हमारी मानसिक शक्ति को बहाती ले जाती है और ऐसे ऐसे विचार होते है दिमाग में की उनका हमारी लाइफ में कोई स्थान नहीं. सभी नहीं लेकिन 90% ऐसे ही विचार हमारे दिमागों में कीचड़ या कूड़ा बढाने के अलवा कुछ नहीं करते. बस हमारे दिमाग को दूषित रखते है और जिससे 99% हमारी मानसिक शक्ति का नाश होता है. और बस इतना ही आपको समझना है अगर इतना भी आप समझ गये तो आप अपनी मानसिक शक्ति का स्वयं दर्शन कर सकते है जो आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा.
 
दुसरे के मन और दिमाग को सेकंड्स में पढ़ सकते है आप
दुसरे के मन और दिमाग को सेकंड्स में पढ़ सकते है आप
इसे कौन कर सकता है और कहाँ कर सकता है?? इसे कोई भी नर या नारी किसी भी अवस्था में कर सकता है इस नियम पर कोई रोक किसी भी सुतक में नहीं लगती. यानी जन्म सुतक और मरन सुतक या माहवारी के दिन में भी इस नियम को किया जा सकता है. क्योंकि इसमें सारी विधि मानसिक ही चलती है. जिसमें बाहरी शरीर का कोई नियम अनिवार्य नहीं है आप कहीं पर भी शोर में, शांति में या पार्क में या ऑफिस में कहीं भी ये प्रैक्टिस कर सकते है...

अब वास्ताव में आपको करना क्या और कैसे है ध्यान से सुनिए – आप को जब भी समय मिले अपने दिमाग ओर मन पर ध्यान दें, और अपने विचारों को और कल्पनाओं को देखें. इसको आप को इस तरह से देखना है जैसे आप सामने रखी वस्तुओं को देखते है. यानी उन विचारों को अपने से अलग देखना है ओर इसी प्रैक्टिस में आप देखेंगे की ये विचार आप से अलग है आपके नहीं है और आपका इनसे कोई लेना देना नहीं. अब क्या होगा आप इन फालतू के विचारों को फेंककर दिमाग को खाली करना शरू कर दें. प्रति दिन यही प्रक्रिया करें. अब कुछ दिन अभ्यास के बाद ही आपको पता लगे गा की सामने वाली या सामने वाले ने जो कहा वो जस्ट अभी आपके भी दिमाग में विचार आ चूका है.

ये काम कैसे करती है? वास्ताव में होता ये है की हम कहीं भी हो वहीं पर वातावरण में लाखों करोड़ों विचार घूमते रहते है की जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. इस क्रिया में हम अपने विचारों को तालबद्ध करते है. जैसे मोबाइल नो से कॉल करनी ऐसे ही बिलकूल. 

अब सुनो इस प्रैक्टिस के बाद आपका दिमाग न्यूटल हो जाता है जिसमे कोई विचार नहीं होता लेकिन वो सब विचारों के देख रहा है, और अब आपके सामने आकर कोई भी अगर आपसे बात करता है तो उसके विचार उसके बोलने से पहले वातावरण में प्रवाहित हो जायंगे जाते है. और हो सकता है वो कुछ विचार न भी बोले लेकिन अगर उसने कुछ सोचा भी है तो वो भी आपका मन उसे पढ़ लेगा वातावरण में तैरते विचारों में से. और केवल उसके सोचने मात्र से आपको उसके दिमाग के विचारों का पता चल जाएगा की फलाना क्या सोच रहा है और क्या करने वाला है.
 
Dusre ke man ki baat jaan sakte hai
Dusre ke man ki baat jaan sakte hai
आप इस प्रक्रिया को जरूर करें, विशवास रखिये कुछ ही दिनों में आपको इसका असर आपके सामने दिखाई देगा. ये प्रक्रिया गारंटीड काम करती अहि और अगर इस विडियो से सम्बंधित कोई भी प्रशन हो तो आप अभी पूछ सकते है.




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