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Maasanusar Garbhini Paricharya | मासानुसार गर्भिणी परिचर्या | Care for Pregnant Women according to Month


गर्भावस्था के हर महीने में स्त्री की देखभाल ( Care of Pregnant Women in Every 9 Months )
गर्भवती स्त्री के लिए गर्भावस्था में उसका शरीर ही सबकुछ होता है. क्योकि उसके शरीर में ही एक नन्ही जान के जीवन की शुरुआत होती है और इसी दौरान उसके शरीर में अनेक परिवर्तन होते रहते है तो उनकों अपनी देखभाल में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है. जैसाकि आप भी जानते है कि हर महीने के साथ उनका पेट धीरे धीरे बड़ा होने लगता है क्योकि शिशु अपना आकार लेने लगता है. इसलिए हर महीने उन्हें अपने खानपान में कुछ ना कुछ बदलाव करने पड़ते है. वे स्वयं अपना इतना ध्यान नहीं रख सकते इसीलिए उनके आसपास के व परिवार के सदस्यों को उनकी देखभाल का दायित्व दिया जाता है. अपनी इस पोस्ट में आज हम आपको ये बता रहे है कि आप हर महीने किस तरह गर्भवती स्त्री की देखभाल कर सकते हो ताकि उन्हें सुरक्षित प्रसव हो सके.  CLICK HERE TO KNOW गर्भावस्था में क्या खाएं क्या नहीं ...
Maasanusar Garbhini Paricharya
Maasanusar Garbhini Paricharya
·     पहला माह ( First Month ) :
दूध ( Milk ) : प्रथम माह से पहले ही आपकी भूख कम हो जाती है तो आप आभास लगा सकते हो कि आप गर्भवती होने वाली है, उसी वक़्त सचेत हो जाएँ और दिन में 3 से 4 बार रोजाना मिश्री वाला दूध पीना आरंभ कर दें. 

मक्खन ( Butter ) : गर्भवती स्त्री को प्रथम माह में रोजाना प्रातः 1 चम्मच ताजा मक्खन, मिश्री, 1 2 काली मिर्च और हरे नारियल की 4 गिरियों में 2 चम्मच मिलाकर उन्हें चबा चबाकर खाना चाहिए. ऐसा करने वाले से आपके पेट में शिशु हष्ट पुष्ट, गोरा और ताकतवर होता है. 

संस्कार ( Sacraments ) : जैसी हर घर की नींव अहम होती है ठीक उसी तरह ये पहला महीना भी बच्चे की मानसिकता के लिए नींव की तरह कार्य करता है तो इस महीने में आप पूजा पाठ, श्रद्धा भाव, सुसंस्कारों, ग्रंथों का पाठ, नितिपाठ, धर्मंपाठ इत्यादि करें. आप ऐसी किताबों का अध्ययन करें जिससे बच्चे की सोच विचारने की शक्ति बढ़ें, उसे प्रेरणा मिले, ना हारने का जज्बा मिले और वो मानसिक रूप से सदृढ़ इत्यादि.  CLICK HERE TO KNOW गर्भधारण कैसे करें ...
मासानुसार गर्भिणी परिचर्या
मासानुसार गर्भिणी परिचर्या
·     दुसरा माह ( Second Month ) :
औषधि ( Medicine ) : इस महीने में भी आप पहले माह की तरह ही दूध और अच्छे आहार का सेवन करें, साथ ही इस माह में आप शतावरी, अश्वगंधा, मुलहठी, बला, जीवंती और विदारीकन्द को सुखाकर उसे पिसें और उसका चूर्ण तैयार करें. अब आप 200 मिलीलीटर पानी में 200 मिलीलीटर दूध मिलाएं, फिर उसमें 2 ग्राम बनाया गया चूर्ण डालें. आप इसे उबालें और जब ये आधा रह जाएँ अर्थात पानी उड़ जाए तो आप इसका सेवन करें. ऐसा करने से आपका शरीर हर बदलाव के लिए तैयार रहता है, आपका शिशु स्वस्थ रहता है, उसे ताकत मिलती है और उसका उचित विकास होता है. 

·     तीसरा माह ( Third Month ) :
दूध ( Milk ) : इस महीने में आपको सुबह शाम के समय में ठंडा दूध पीना है. किन्तु दूध को पिने से पहले आप उसमें 1 चम्मच शुद्ध घी व ½ चम्मच शहद भी अवश्य मिला लें. 

उल्टियाँ ( Vomiting ) : इस माह में उल्टियाँ सामान्य होती है किन्तु अगर अधिक उल्टियाँ हो रही है तो आप रोजाना अनार का रस लें. इससे आपके शरीर में रक्त की कमी व कमजोरी दूर होगी. साथ ही आप ॐ नमो नारायणाय का नियमित जाप भी अवश्य करें. 
Care for Pregnant Women according to Month
Care for Pregnant Women according to Month
·     चौथा माह ( Fourth Month ) :
दूध ( Milk ) : इस माह में आपको गुनगुने दूध में 20 से 25 ग्राम मक्खन मिलाकर ग्रहण करना है, आप मीठे के लिए मिश्री का उपयोग करें. साथ ही दिन में 3 बार दूध लें. 

मन को शुद्ध ( Purify your Mind ) : इस माह में बच्चे की इन्द्रियां काम करने लग जाती है और वो माता व उनके आसपास के लोगों की आवाज सुनने लगता है. इसलिए आप अपने मन को शुद्ध रखे और गलत विचारों और गलत धरना वालें लोग से बचें. घर का जितना अच्छा वातावरण होगा उतनी ही अच्छी आपके शिशु की मानसिकता होगी. 

अच्छा आहार ( Good Healthy Food ) : इस माह में जच्चा और बच्चा दोनों की भूख बढ़ जाती है तो आप अपने खाने में अधिक से अधिक पौषक तत्वों को शामिल करें और दिन में कई बार थोडा थोड़ा खाना खाएं. सात्विक आहार इस वक्त सबसे उत्तम होता है. 

·     पांचवा महीना ( Fifth Month ) :
मस्तिष्क का विकास ( Mental Development ) : ये माह मस्तिष्क के विकास का माह होता है. इसलिए गर्भिणी को दिन में 3 बार दूध का सेवन करना चाहियें. किन्तु आप दूध में 15 से 20 ग्राम घी जरुर मिला लें. 
स्त्री की गर्भावस्था में 9 माह देखभाल
स्त्री की गर्भावस्था में 9 माह देखभाल
दाल ( Pulses ) : ये समय आ गया है जब आप दिन में कम से कम 1 कटोरी दाल अवश्य लें ताकि आपके शरीर को प्रोटीन विटामिन की कमी महसूस ना हो.

गिरी ( Kernel ) : आप रात को सोने से पहले एक कटोरी पानी में 4 बादाम डालकर भीगने के लिए रख दें और सुबह के समय उनका छिलका उतारकर सेवन करें. 

रूचि ( Interest ) : ये माह बच्चें में रूचि जगाता है. इसलिए आप रुचिपूर्ण चीजों को पढ़ें ताकि आपका बच्चा भी हर विषय में अपनी रूचि दिखा सके. यहाँ आपको थोडा सावधान भी रहना होता है अर्थात अगर आप आलस करती है या जबरदस्ती किसी विषय को पढ़ रही है तो इसका सीधा असर बच्चे पर पड़ेगा और वो भी आपकी ही तरह आलसी हो जाएगा. 

·     छठा व सांतवा महीना ( Sixth and Seventh Month ) :
औषधि ( Medicine ) : इस माह में भी आपको वही चूर्ण ग्रहण करना है जो दुसरे माह में बताया गया है बस फर्क इतना है कि इस बार चूर्ण में आपको गोखरू भी मिलाना है. आप तुलसी से बनी माला को अपनी कमर पर भी अवश्य धारण करें. 
Mahinon ke Anusar Garbhvati Stri ki Dekhbhaal
Mahinon ke Anusar Garbhvati Stri ki Dekhbhaal
सूर्य स्नान ( Sun Bath ) : आप प्रातःकाल जल्दी उठकर सूरज को जल अर्पित करें और अपने पेट पर सुरज की किरणों को पड़ने दें. ताकि आपके शिशु को विटामिन डी मिल सके और वो स्वस्थ रह सके. आप अपने पेट की हल्के हाथों से मालिश भी अवश्य करायें. आप सूर्य जी का ध्यान करें और उंनसे अपने शिशु के उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद लें. आप अपने पेट पर हाथ रखते हुए गायत्री मंत्र का जाप करें. 

मालिश ( Massage ) : जैसे ही सांतवा महीना शुरू होता है वैसे ही आपके स्तनों में, पेट में और छाती की त्वचा में खुजली होने लगती है आपको इन सब अंगों की त्वचा खिंची खिंची हुई महसूस होती है. इस अवस्था में आपको देशी गाय के शुद्ध घी से अपने शरीर की मालिश करानी चाहियें. 

·     आठवाँ व नौवाँ महीना ( Eighth and Nine Month ) :
चावल ( Rice ) : आप कुछ चावल लें और उसमें चावल की 6 गुना मात्रा में दूध और दूध के समान मात्रा में पानी मिलाएं. अब आप इसमें घी डालें और इसे सुबह शाम खाएं. अगर आप दलिये का सेवन कर रही है तो आप दलिये में भी घी डालना बिलकुल ना भूलें. 
Garbhdhaaran ke Baad Rakhen Ye Savdhaaniyan
Garbhdhaaran ke Baad Rakhen Ye Savdhaaniyan
पेट विकार ( Stomach Disorder ) : जैसे जैसे पेट का आकार बढ़ता जाता है वैसे वैसे अनेक तरह के पेट विकार जैसे कब्ज, गैस, अफारा इत्यादि उत्पन्न होने लगते है. जिससे बचने के लिए आप आंठ्वे माह में प्रातःकाल दूध में 2 चम्मच एरंड का तेल मिलाकर लें. नौवे माह में आपको इसबगोल या फिर त्रिफला का चूर्ण दूध के साथ रोजाना 1 बार अवश्य लेना है. 

मालिश ( Massage ) : मालिश के लिए आप टिल का तेल इस्तेमाल करें और अपनी जंघाओं की मालिश अवश्य करें. साथ ही आप इस तेल में एक रुई का फोहा भिगोयें और उसे सोने से पहले अपने गुप्तांगों में रखें. इससे आपके गुप्तांग नर्म होते है और आपको प्रसव के दौरान कम पीड़ा का अनुभव होता है. 

तो इस तरह आप गर्भावस्था के सभी माहों में खुद का ध्यान रख सकती है. गर्भावस्था से जुडी किसी भी अन्य लाभदायी जानकारी को पाने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो.
Garbhavastha mein Mahilaa ka Dhyan Kaise Rakhen
Garbhavastha mein Mahilaa ka Dhyan Kaise Rakhen

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