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Naamdiyaa Gathiya Ke Prakar | नामदिया गठिया के प्रकार | Type of Gout Arthritis

गठिया के प्रकार ( Type of Arthritis ) :
§  रुमेटाइड आर्थराइटिस ( Rheumatoid Arthritis ) : ये गठिया रोग का गंभीर रूप है, साथ ही ये सबसे अधिक पाया जाता है. इसका इलाज तुरंत करा लेना चाहियें अन्यथा ये आपकी समस्या को कई गुना तक बढ़ा सकता है. CLICK HERE TO KNOW गठिया रोग के कारण और लक्षण ... 
Naamdiyaa Gathiya Ke Prakar
Naamdiyaa Gathiya Ke Prakar
§  सोराइटिक आर्थराइटिस ( Psoriatic Arthritis ) : अगर इसका इलाज समय पर नही कराया जाता तो ये लाइलाज हो जाता है जिससे व्यक्ति की रोगी की मृत्यु तक निश्चित है.

§  ओस्टियोसोराइटिस ( Ostiaosoraitis ) : इसका प्रभाव मुख्यतः पीठ, कमर घुटनों और पाँव पर होता है. इसके साथ ही ये वृद्धावस्था में अधिक होता है किन्तु इसका मुख्य कारण अनुवांशिका ही होता है. CLICK HERE TO KNOW जोड़ों का दर्द दूर करने के घरेलू प्राकृतिक उपचार ... 
नामदिया गठिया के प्रकार
नामदिया गठिया के प्रकार
§  पोलिमायलगिया रुमेटिका ( Polimayalagiya Rheumatic ) : इसका असर ज्यादातर गर्दन और कंधे पर होता है जिससे रोगी को अत्यधिक दर्द को सहना पड़ता है. गठिया के इस प्रकार में रोगी को अपने अंगों तक को हिलाने में भी तकलीफ होने लगती है किन्तु इसका इलाज संभव है. तो इन्हें समय रहते ही अपना उपचार शुरू कर लेना चाहियें.

§  एनकायलजिंग स्पोंडीलाइटिस ( Ankayljing Spondeelaitis ) : इसमें दर्द तो कम होता है किन्तु दर्द लगातार बना जरुर रहता है. जिससे इन्हें कष्ट से मुक्ति नही मिल पाती. साथ ही इसके लक्षण आपको कमर और शरीर के निचले हिस्सों और जोड़ों में दिखाई देता है.

§  रिएक्टिव आर्थराइटिस ( Reactive Arthritis ) : अगर किसी व्यक्ति को आँतों से संबंधी या जेनिटोरिनैरी का संक्रमण है या कोई अन्य इन्फेक्शन है तो उसे ये रिएक्टिव आर्थराइटिस गठिया होने की संभावना बनी रहती है.
Type of Gout Arthritis
Type of Gout Arthritis
§  गाउट ( Gout ) : इसमें रोगी के शरीर में गांठे बनने लगती है. इसका मुख्य कारण अधिक दवाओं का सेवन या फिर खाने में अनियमितिता का होना होता है. साथ ही आलस की वजह से भी ये रोग हो सकता है. किन्तु अगर समय रहते इसका इलाज करा लिया जाए तो इसका इलाज भी संभव है.

§  सिडडोगाउट ( Sidadogout  ) : सिडडोगाउट गठिया के लक्षण रुमेटायड और गाउट के लक्षणों से काफी मिलते जुलते है. किन्तु इसमें जोड़ों में अधिक मात्रा में दर्द होता है. साथ ही इसमें जोड़ों में कैल्सियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल बनकर जमा हो जाते है जो इनमे सुजन का कारण बनते है. इसमें भी रोगी को अपने आहार को काफी ध्यान से चुनना चाहियें.
बाय रोग के प्रकार
बाय रोग के प्रकार
§  सिस्टेमिक ल्युपस अर्थिमेटोसस ( Systemic Lupus Arthrimeos ) : इस रोग का असर ना सिर्फ आपके जोड़ों बल्कि आपके शरीर की त्वचा और बाकि के अंगों पर भी पड़ता है. ये मुख्य रूप से गर्भवती स्त्रियों को होता है. ये एक ऑटो इम्यून रोग है. अगर इसका पहचान समय पर कर ली जाएँ तो इसे व्यक्ति जल्द ही नियंत्रित कर सकता है. अन्यथा ये जीवन के लिए खतरा भी बन सकती है.


गठिया बाय, अकडन, जोड़ों में दर्द के अन्य तरीको और इससे मुक्ति के उपायों को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
Different Kind of Arthritis
Different Kind of Arthritis
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