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Suryatapt Jal se Rogon ka Ilaaj | सुर्यतप्त जल से रोगों का इलाज | Treatment by Sunbeam Water

सुर्यतप्त जल औषधि सेवन विधि ( How to Take Sun Rays Medicine ) :
जिस तरह हर औषधि को खाया नहीं जाता ठीक उसी तरह से सूर्य से निर्मित इन पानी को मात्र पीना नहीं होता. इनके गुण के आधार पर इनको इस्तेमाल करने की विधि भी अलग अलग है.

·     लाल रंग ( Red Color ) : लाल रंग की परवर्ती अधिक गर्म होती है जिस कारण से रोगी लाल रंग की बोतल में निर्मित औषधि को पी नहीं सकता. अगर वो इसको पीता है तो उसे उल्टी व खुनी दस्त होनी की संभावना होती है. इसलिए इस बोत्तल के पानी को मात्र मालिश के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है. इससे शरीर में गर्मी बढती है और ये खून व नशों को उत्त्तेजित करता है. साथ ही इससे वात, पित्त और कफ के रोग भी नहीं होते. CLICK HERE TO KNOW सूर्य किरण जल चिकित्सा क्या है ...
Suryatapt Jal se Rogon ka Ilaaj
Suryatapt Jal se Rogon ka Ilaaj
·     नारंगी रंग ( Orange Color ) : नारंगी रंग की बोतल में निर्मित सुर्यतप्त जल को पिया जा सकता है. किन्तु इसे खाना खाने के बाद 15 के अंदर 2 चम्मच के रूप में ले लेना चाहियें. ये रक्त प्रवाह को बढाता है और मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है. इसको सेवन करने वाले की धीरे धीरे इच्छशक्ति बढ़ने लगती है और उसकी मानसिक स्थिति का विकास होता है. ये बुद्धि और साहस को भी बढाता है. साथ ही इसके उपयोग से खांसी, निमोनिया, पेट में गैस, गठिया और सांस संबंधी रोग दूर हो जाते है. वे महिलायें जिनका अभी प्रसव हुआ है अगर वे इस जल का सेवन करती है तो उनके स्तनों में दूध की मात्रा में भी बढ़ोतरी होती है. 

·     पीला रंग ( Yellow Color ) : वैसे तो इस बोतल में निर्मित जल काफी लाभदायी होता है फिर भी इसको कम मात्रा में ही लेना उचित माना गया है. इससे पाचनतंत्र स्वस्थ रहता है और पेट विकार जैसे कब्ज, एसिडिटी, दस्त इत्यादि दूर होते है. ये हृदय, फेफड़ों और लीवर के लिए भी अच्छा माना जाता है किन्तु वे लोग जिन्हें पेचिश की समस्या है वे इस जल का सेवन बिलकुल भी ना करें. CLICK HERE TO KNOW सूर्य किरण तप्त जल से उपचार ...
सुर्यतप्त जल से रोगों का इलाज
सुर्यतप्त जल से रोगों का इलाज
·     हरा रंग ( Green Color ) : हरा रंग प्रसन्नता का प्रतिक होता है और व्यक्ति जब प्रसन्न होता है तो उसका शरीर उर्जावान होता है, उसके शरीर की बनावट अच्छी होती है, खून की विद्धि होती है, दिमाग शांत और तंदुरुस्त रहता है और नर्वस सिस्टम सही तरह से कार्य करता है. इस जल का सेवन करने वाले व्यक्ति मलेरिया, किडनी में समस्या फोड़े फुंसी, आँखों के रोग, बवासीर और कैंसर जैसे रोगों से भी दूर रहता है. हरे रंग की बोतल के पानी का सेवन आप ख्हाली पेट ही करें या फिर खाना खाने के करीब 1 घंटे पहले 200 मीली की मात्रा में लें.

·     आसमानी रंग ( Blue Color ) : जैसाकि आप भी जानते है कि आसमानी रंग शीतलता का प्रतिक होता है. ये गले के रोगों के लिए फायदेमंद होता है. इसका मुख्य प्रयोग बुखारों में किया जाता है क्योकि ये हर तरह के बुखार के लिए सर्वोत्तम उपचार माना जाता है. इससे मन को शांति मिलती है और दिमाग ठंडा रहता है. साथ ही ये अनेक रोगों जैसे पथरी, त्वचा रोग, दमा, दस्त, पेचिश, नासूर, मूत्र रोग, खांसी, फोड़े फुंसी के लिए भी उपयोगी होता है. 

·     नीला रंग ( Indigo Color ) : क्योकि ये भी नीले रंग का ही होता है इसलिए इसकी प्रकृति भी ठंडी ही होती है और ये भी उसी की तरह लाभदायी होता है. इसको लेने की विधि हरे रंग की विधि के सामान होती है. ये मानसिक स्तिथि में सुधार लाता है और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है. इस रंग की बोतल का जल शरीर पर तुरंत प्रभाव करता है अर्थात ये तुरंत लाभ पहुंचाना आरम्भ कर देता है. ख़ासतौर से इसका उपयोग आँतों, योनिरोगों और पेट संबंधी विकारों को दूर करने के लिए किया जाता है. इससे शरीर की गर्मी तुरंत दूर होती है जिससे अनेक तरह के रोगों के होने का खतरा खत्म होता है. 
Treatment by Sunbeam Water

Treatment by Sunbeam Water
·     बैंगनी रंग ( Violet Color ) : ये शरीर में खून बनाने में लाभदायी होता है अर्थात ये लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है जिससे खून की कमी का रोग कभी भी नहीं होता साथ ही इसके नियमित सेवन से व्यक्ति टीबी जैसी समस्या से भी बचा रहता है. अगर सोने से पहले इस जल को पीया जाएँ तो इससे अच्छी नींद की प्राप्ति होती है और उठने के बाद व्यक्ति खुद को अधिक उर्जावान महसूस करता है और मन लगाकर अपने कार्यों को कर पाता है. 

सूरज की किरणों से तैयार जल औषधि को निर्माण करने और उसके रोगों में प्रयोग के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
सूरज की किरणों से निर्मित जल औषधि सेवन विधि
सूरज की किरणों से निर्मित जल औषधि सेवन विधि

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1 comment:

  1. Bhagander Rog ke liye suryatapat jal ki hari botal kahan se practice hogi

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