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Samjhe Naak ka Svar Vigyaan | समझे नाक का स्वर विज्ञान | Know Phonology of Your Nose


नासिका ज्ञान ( Phonology )
नाम शरीर की इन्द्रियों में एक है जो सांस लेने और गंध को पहचानने का कार्य करती है. किन्तु बहुत ही कम लोग ऐसा जानते है कि नाक के इन दो कामों के अलावा भी कुछ काम और उपयोगितायें है. आज हम अपनी इस पोस्ट में आपको नाक के कुछ ऐसे तथ्यों से रूबरू करायेंगे जिनसे आप आज तक अनभिज्ञ थे. ये एक विद्या है जिसे स्वरोदय के नाम से जाना जाता है, वैज्ञानिक भाषा में इसे स्वर विज्ञान और इंग्लिश में इसे Phonology कहते है. माना जाता है कि जिसे स्वर विज्ञान की जानकारी होती है वो विपरीत परिस्थिति से भी सहजता से बाहर निकल जाता है.  CLICK HERE TO KNOW मन की शक्ति को कैसे बढायें ...
Samjhe Naak ka Svar Vigyaan
Samjhe Naak ka Svar Vigyaan
स्वरोदय ( Svrodaya ) :
स्वरोदय दो शब्दों से मिलकर बना है स्वर + उदय. जहाँ स्वर से अभिप्राय श्वास से है जिसे नासिका के छिद्रों से वायु के रूप में ग्रहण किया जाता है, ये वायु किसी भी जीव के लिए उसकी प्राण वायु होती है. वहीँ उदय से अभिप्राय इस श्वास के चलने अर्थात स्वर के चलने से है. क्योकि इसमें विधियाँ होती है और इस विषय के रहस्यों को समझना पड़ता है इसीलिए इसे विज्ञान की श्रेणी में रखा गया है जहाँ ये स्वर विज्ञान के नाम से प्रचालित है. अधिकतर लोग इसे आसन भी मानते है जिसे हर व्यक्ति को जरुर करना चाहियें. 

स्वर ज्ञान ( Knowledge of Respiration ) :
इस आसन साधना को करना बहुत ही सरल है, इसे करने के लिए आपको बस लगन और आस्था को बनायें रखने के साथ साथ श्वास की गति व दिशा पर नियंत्रण रखना होता है. साधना के दौरान आप सूर्य स्वर, चन्द्र स्वर और सुषुम्ना स्वर का अनुभव भी अवश्य करें.  CLICK HERE TO KNOW हठ योग व उनके प्रकार ...
समझे नाक का स्वर विज्ञान
समझे नाक का स्वर विज्ञान
§ सूर्य स्वर ( पिंगला नाडी ) ( Right Nostril ) : अर्थात जब श्वास दाई नासिका से बाहर निकलें. इस स्वर में पुरुष प्रधान होता है, साथ ही इसका रंग भी काला होता है. सूर्य स्वर को शिव का स्वरूप भी माना जाता है. 

§ चन्द्र स्वर ( इडा नाडी ) ( Left Nostril ) : अर्थात जब श्वास बायीं नासिका से बाहर निकलें. ये स्त्री प्रधान स्वर है इसीलिए इसका रंग भी गोरा होता है. साथ ही ये शक्ति अर्थात देवी पार्वती का स्वरूप होता है.

§ सुषुम्ना स्वर ( दोनों नासिका के मध्य ) ( Between Both Nostril ) : अगर निःश्वास महसूस किया जाये या दोनों तरफ से श्वास निकलता महसूस किया जाएँ तो उसे सुषुम्ना कहा जाता है.
स्वरोदय साधना इन्ही तीन स्वरों पर आधारित होती है. इसलिए जब भी आप इस आसन का आरम्भ करें तो पहले ये सुनिश्चित कर लें कि आपको नासिका से इनमे से कौन सा स्वर महसूस हो रहा है.  

स्वर की पहचान ( Identify the Breath ) :
-   स्वर को पहचाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप सबसे पहले अपने मन को एकाग्र करके पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएँ और अपने दायें हाथ को नासिका के पास लेकर जाएँ. आप अपनी एक उंगली को नासिका के ठीक नीचे ले जाएँ और श्वास को बाहर फेंकें. अब आपको ये महसूस करना है कि किस छिद्र में से श्वास बाहर निकला है. जिसमें से श्वास निकला होगा बस वही स्वर है.
-   कई बार एक छिद्र में अधिक तो एक में कम गति से श्वास निकलता है उस अवस्था में इसे सुषुम्ना स्वर माना जाता है. 
Know Phonology of Your Nose

Know Phonology of Your Nose
-   आप नासिका के नीचे कांच का एक छोटा सा टुकड़ा ले जाएँ और श्वास को बाहर छोड़ें. कांच पर आपकी साँसों से वाष्प बन जाता है जिस जगह अधिक वाष्प कण हो उसी तरफ का स्वर चालु होता है. 

जीवन में स्वर का महत्व ( Importance of Breath in Human Life ) :
·     स्वर हर व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक क्रियाओं के साथ साथ देवीय संपर्कों में भी सहायक होता है. ये परिवेशीय घटनाओं तक को भी प्रभावित करता है. 

·     स्वर विज्ञान लौकिक और परालौकिक दोनों तरह की यात्राओं को सफल बनाने में सहायक होता है.
·     व्यक्ति अपने पास आने वाली प्रत्येक वास्तु की धाराओं को बदलने में समर्थ हो जाता है.
·     ये योग मार्ग की तरफ ले जाने में सहायक होता है. इसके लिए सबसे उत्तम समय उस वक़्त माना जाता है जब दोनों नासिका से श्वास बाहर निकलता है. 

·     ये कार्यों को बेहतर बनाता है और उन्हें करने की शक्ति भी प्रदान करता है.  

·     सूर्य स्वर को गर्म तो चन्द्र को ठंडा स्वर माना जाता है.

·     संधि अवस्था अर्थात वो समय जब दोनों नासिकाओं से श्वास निकलती हो. ये समय बहुत ही लाभकारी होता है. इस वक़्त परालौकिक भावनाएं भी जाग्रत होती है और इस वक़्त ध्यान करने पर व्यक्ति का मन परमार्थ के मार्ग पर चलने लगता है. साथ ही ये समय मानसिक विकारों को भी दबाने में सहायक होता है. 
सूर्य चन्द्र सुषुम्ना स्वर
सूर्य चन्द्र सुषुम्ना स्वर
स्वर को अपने अनुकूल कैसे करें ( Make Breathing Side according to Your Need ) :
अगर कोई व्यक्ति अपने स्वर को बदलना चाहता है तो उसे उस नथुने या नासिका को अपनी उँगलियों से दबा लेना चाहियें जिसमें से सांस आ रही है. साथ ही उसे इस अवस्था में उस नथुने से सांस को बाहर निकालने का प्रयास करना चाहियें जिसमें से सांस नहीं निकल रही थी. इसके अलावा अगर व्यक्ति घी का सेवन करता है तो उसका वाम स्वर चलने लगता है, वहीँ अगर व्यक्ति शहद का सेवन करें तो उसका दक्षिण स्वर चलने लगता है. 

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स्वरोदय
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