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Cat and Mouse Tale A Political Story - कभी मित्र कभी घोर शत्रु एक चूहे बिल्ली की कहानी Chuhe Billi ki Kahani

कभी मित्र कभी घोर शत्रु  एक चूहे बिल्ली की कहानी - Cat and Mouse Tale A Polotical Story - Chuhe Billi ki Kahani आजकल बहुत बड़ा भोचाल आ...

Emotional Love Story By Script Writer Manoj Rathi

रवि आज सुबह से ही कुछ परेशान सा नज़र आ रहा था और उसकी परेशानी तब और भी बढ़ गयी जब उसने
ऑफिस पहुँचते ही अपने कंप्यूटर पर अपनी मेल्स को चेक करना शुरू किया !

‘नीजी कम्पनियों में काम करने का सबसे बड़ा दुःख ये है कि जब करने के लिए कोई भी काम ना हो तब भी यहाँ
कोई ना कोई काम आपके लिए पैदा कर ही दिया जाता है !’, रवि ने अपनी मेल्स चेक करते हुए कहा !

‘ऐसा कौन सा आसमान टूट पड़ा आप पर’, बाजु वाली कुर्सी पर बैठी नेहा ने अपनी कुर्सी रवि की तरफ बढाते
हुए कहा !

‘निदेशक साहब का सन्देश आया है कि मुझे तुम्हारे साथ पूरा दिन बैठकर आज उन मोबाइल नंबर्स पर कॉल
करके फॉलो-उप लेना है जो हमारी कंपनी की मार्केटिंग टीम जगह-जगह घूम कर नोट करके लायी है !’, रवि ने
थोड़े रूखे स्वर में कहा !

‘तो इसमें इतना उदास होने वाली क्या बात है?’, नेहा ने पुछा !
‘मैंने कंपनी में बतौर मैनेजर ज्वाइन किया था और ये लोग मुझसे मार्केटिंग का काम करवा रहे हैं ! मैंने कभी
सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे साथ यहाँ ऐसा होगा !’, रवि ने अपनी मेज़ पर पड़ी एक फाइल हाथ में लेते
हुए कहा !

‘अब क्या कर सकते हैं, कोई ना कोई नौकरी तो करनी ही है ! और फिर ये निजी क्षेत्र की कम्पनी है, जो काम
देंगे वो तो करना ही पड़ेगा’, नेहा ने कहा !

‘तुम लडकीयों का यहीं रवैया तो देश की सबसे बड़ी समस्या है ! औरतें बस अच्छी बंधुवा मजदूर होती हैं ! कम
तनख्वाह पर ज्यादा काम करना कोई इनसे सीखे !’, रवि ने कहा !

रवि की बातें सुनकर हालाँकि नेहा की आँखों में अब तक आंसू आ चुके थे पर उसने रुमाल से अपने आंसू पोंछकर
वापस काम पे ध्यान देना ज्यादा बेहतर समझा और रवि ये सब देख रहा था पर उसने भी कुछ कहा नहीं, बस
अपने लिए एक कप कॉफ़ी लेने दुसरे कमरे में चला गया ! ये एक अलमारियों से भरा कमरा था जिसमें एक बड़ी
सी गोल मेज के चारों तरफ अनगिनत कुर्सियां थी ! इस कमरे को सभी ‘कॉमन रूम’ कहा करते थे और कम्पनी
की सभी मीटिंग्स यहीं हुआ करती थी !

कुछ देर बाद नेहा भी वहां अपनी कुछ ज़रूरी फाईलें लेने जा पहुंची ! एक तरफ नेहा अलमारी के ठीक सामने
घुटनों पर बैठकर अलमारी में से कुछ ढूंढ रही थी और दूसरी तरफ रवि अपने एक सहकर्मी मुकेश के साथ खड़ा

होकर कॉफ़ी की चुस्कियां ले रहा था कि अचानक नेहा के हाथ से बहुत सारी फाईलें निचे गिरी ! रवि और
मुकेश ये सब देखकर मदद करने की वजाए वहीँ खड़े होकर हँसने लगे !

एक बार फिर नेहा की आखों से आंसू बह निकले पर उसने फिर से रुमाल लेकर अपने आंसू पोंछे और फाईलें
वापस अलमारी में रखकर, अपनी कुर्सी पर वापस आकर बैठ गयी ! ये दूसरी बार थी जब नेहा ने बुरा लगने के
बावजूद अपना अपमान बिना कुछ कहे सहन कर लिया था ! कॉफ़ी पीने के बाद रवि भी अपनी कुर्सी पर वापस
आकर बैठ गया और दोनों फाइल से एक्सेल शीट्स के प्रिंट निकाल कर बारी-बारी अपने क्लाइंट्स को कॉल
करने लगे ! रवि यूँ तो एक बेहद कम भावुक होने वाला इन्सान था पर आज जाने क्यूँ उसे बार बार नेहा का
बुरा लगने पर भी यूँ चुप रहना रास नहीं आ रहा था !

जहाँ नेहा बहुत ही इमानदारी के साथ हर नंबर पर कॉल करके फॉलो-अप लेने के बाद सामने से मिली
प्रतिक्रिया अपनी एक्सेल शीट में दर्ज कर रही थी वहीँ रवि जान बुझ कर कुछ नंबर्स के आगे ‘बिजी’ तो कुछ के
आगे ‘आउट ऑफ़ रीच’ लिख देता ! शाम होने तक नेहा ने 108 और रवि ने महज 19 कॉल्स का डाटा तैयार
किया ! शाम को प्रबंधक महोदय फाइल देखकर बहुत खुश हुए पर उस ख़ुशी का श्रेय उन्होंने नेहा को नहीं
बल्कि रवि को दिया क्यूंकि रवि कम्पनी में नेहा का सीनियर था ! ये सब देखकर नेहा आज तीसरी बार दुःख का
अनुभव कर रही थी लेकिन ना जाने क्या सोचकर वो इस बार भी चुप रही और ये चुप्पी अब रवि को सताने
लगी थी !

नेहा अभी एक कॉलेज स्टूडेंट थी ! अपनी पढाई का खर्च उठाने के लिए उसने इन दिनों रवि की कंपनी को
जॉइन कर लिया था और इसीलिए उसे कम्पनी में तनख्वाह और पद दोनों ही कम दर्जे के प्राप्त हुए थे जबकि
रवि एक ग्रेजुएट था और उसे कम्पनी में काम करने का 2 वर्ष का अनुभव भी प्राप्त था ! इसलिए उसकी
तनख्वाह और पद दोनों नेहा से ऊंचे थे !

अपना काम पूरा कर लेने के बाद शाम को नेहा प्रबंधक महोदय के दफ्तर में एक दिन की छुट्टी की अर्जी देने
पहुंची !

‘सर, कल मेरी बहन की सगाई है और आप तो जानते ही हैं कि मेरे पिताजी के स्वर्गवास के बाद मेरी माँ का हम
दोनों बहनों के सिवा इस दुनिया में कोई नहीं है ! क्या मुझे उनकी मदद करने के लिए बस एक दिन की छुट्टी
मिल सकती है?’, नेहा ने बड़े विनम्र स्वभाव में कहा !

‘अभी एक हफ्ता पहले ही तो परीक्षा के नाम पर तुमने पूरे तीन दिन की छुट्टी ली थी अंजली’, प्रबंधक महोदय
ने झल्लाते हुए कहा !

सर मैं आपसे वादा करती हूँ कि इसके बाद मैं अगले दो महीने तक कोई भी छुट्टी नहीं लुंगी’, नेहा ने
विनम्रतापूर्वक कहा !

‘नहीं, मैं कुछ नहीं जानता, तुम्हें कल ऑफिस आना है बस ! कोई छुट्टी नहीं मिलेगी’, प्रबंधक महोदय ने बहुत
गुस्से में कहा !

पर सर मैं.. मैं... नेहा कुछ और कहती इस से पहले ही दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी ! ये रवि था !
‘मेई आई कम इन सर’, रवि ने दरवाज़े पर दस्तक देते हुए कहा !

‘यस यस माय डिअर, कम इन ! आज तो दिल खुश कर दिया तुमनें ! अच्छा वो तुम्हारी 2 दिन की कैजुअल लीव
मैंने मंज़ूर कर दी है ! तुम अपने घर वालों के साथ घूमने जा सकते हो ! एंड मिस अंजली, नाउ यु मे गो !’,
प्रबंधक महोदय ने कुर्सी रवि की तरफ घुमाते हुए कहा !

‘थैंक यू सर’, रवि ने मुस्कुरा कर कहा और अपना बैग लेकर सीढियां उतरने लगा ! रवि सीढियां उतरने लगा ही
था कि उसे कोई जानी पहचानी सी आवाज़ सुनाई दी !

‘नहीं माँ, मुझे छुट्टी नहीं मिल सकी’, ‘मैं पहले ही इस महीने तीन छुट्टियां ले चुकी हूँ और इसीलिए प्रबंधक
महोदय ने मुझे एक और छुट्टी देने से साफ़ मना कर दिया है’, नेहा सीढियां उतरते हुए फोन पर अपनी माँ से
कह रही थी !

रवि चुपचाप वहीँ खड़ा होकर नेहा की बातें सुनने लगा !

‘अच्छा तुझे तेरी पिछले दो महीने की तनख्वाह मिली’, नेहा की माँ ने नेहा से पूछा !
‘नहीं माँ, मैं आज भी प्रबंधक महोदय से अपनी तनख्वाह देने की बात नहीं कर पायी’, नेहा ने थोड़े से उदास
स्वर में कहा और सीढियां उतरने लगी !

रवि को ये जान कर बहुत ताज्जुब हुआ कि जहाँ बाकी कर्मचारियों को उनकी तनख्वाह हर माह 7-10 तारीख
के बीच दे दी जाती है, नेहा की तनख्वाह पिछले दो महीने से बकाया थी और जहाँ पक्के कर्मचारियों को साल में
12 सवैतनिक छुट्टियाँ दी जाती हैं, नेहा को दी गयी हर छुट्टी अवैतनिक थी और इस बार तो उसे छुट्टी देने से ही
मना कर दिया गया था !

नेहा की बातें सुनकर रवि वापस प्रबंधक महोदय के पास गया और बोला,’ सर क्या आप जानते हैं कि आज
आपका दिया ज्यादातर काम नेहा ने किया था ?’

‘हाँ, तो उसे इसी बात की तो तनख्वाह मिलती है’, प्रबंधक महोदय ने कहा !
‘सर नेहा की तनख्वाह महज नौ हज़ार रूपये प्रति माह है जो इस कम्पनी के सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह से
भी तीन हज़ार रूपये कम है और वो तनख्वाह भी उसे पिछले दो माह से दी नहीं गयी है’, रवि ने कहा !

‘देखो, ये तुम्हारा नीजी मामला नहीं है ! नेहा को जब जरूरत होगी वो मुझसे अपने आप मांग लेगी, तुम बेवजह
इस बात की परेशानी ना ही लो तो बेहतर होगा’, प्रबंधक महोदय ने इस बार थोड़े गुस्से में कहा !

‘सर मैं चाहता हूँ कि मुझे दी गयी चार छुट्टियों की जगह आप नेहा को एक दिन की छुट्टी कल दे दें ! उसे इस
छुट्टी की मुझसे ज्यादा ज़रूरत है’, रवि ने कहा !

‘इट्स ओके माय बॉय ! जाओ कह दो नेहा को कि वो कल अपनी बहन की शादी एन्जॉय कर सकती है लेकिन
उसे परसों से वक्त पर ऑफिस आना होगा एंड रेमेम्बेर, नो मोर हॉलीडेज फॉर नेक्स्ट टू मंथ्स’, प्रबंधक महोदय
ने कहा !

‘थैंक यु सर ! यू आर ग्रेट’, रवि ने कहा
‘सेंड हर टू मी’, प्रबंधक महोदय ने कहा और अब रवि वापस सीढ़ियों की तरफ बढ़ा ताकि नेहा को इस बारे में
बता सके !

‘नेहा, यू गोट अ हॉलिडे ! तुम्हें कल की छुट्टी मिल गयी है’, रवि ने नेहा से मुस्कुराते हुए कहा !
‘पर ये कैसे हुआ?’, नेहा ने चौंकते हुए पुछा !

‘मेरा यकीन नहीं तो जाओ खुद प्रबंधक महोदय से पूछ लो ! वो तुम्हें बुला रहे हैं !’, रवि ने कहा !
नेहा ऑफिस की तरफ बढ़ी और प्रबंधक महोदय के पास जाकर बोली,’ वर यू कोलिंग मी सर?’
‘यस नेहा, ये लो तुम्हारी दो महीने की तनख्वाह ! सॉरी मैं भूल गया था ! और हाँ, कल तुम अपनी बहन की
शादी एन्जॉय करो’, प्रबंधक महोदय ने कहा !

‘पर सर आपने ऐसे एक दम अपना फैसला कैसे बदल लिया ?’, नेहा ने पुछा !
‘रवि ने मुझे बताया कि आज ज्यादातर काम आपने ही पूरा किया था, ही वास प्रेजिंग यू’, प्रबंधक महोदय ने
कहा !

‘ओके सर थैंक यू’ ! नेहा ने कहा और वो बहार चली गयी ! रवि अभी भी उसका निचे इंतज़ार कर रहा था !
‘आओ नेहा, मैं तुम्हें घर ड्राप कर दूंगा’, रवि ने कहा !

‘थैंक यू पर मैं खुद चली जाउंगी’, नेहा ने कहा !

अरे चलो भी, मैं उसी तरफ जा रहा हूँ’, रवि ने कहा !

वैसे एक बात बताओ, तुम तो कह रहे थे कि औरतें बंधुवा मजदूर होती हैं, फिर आज तुमने मेरी मदद क्यूँ की?’,
नेहा ने पुछा !

‘देखो मेरा वो मतलब नहीं था’, रवि थोडा हडबडाया !

‘रहने दो, तुम और मुकेश जी मुझपर हँस भी रहे थे जब मुझसे कॉमन रूम में फाइलें गिर गयी थी’, नेहा ने थोड़े
नाराज़ से स्वर में कहा !

‘नहीं नेहा, मैं ऐसा नहीं हूँ ! वो तो बस मैं थोडा..........’, रवि कहते कहते चुप हो गया !

कुछ देर बाद रवि ने कहा,’ क्या हम सब भूल कर दोस्त बन सकते हैं?’

‘बिलकुल, लेकिन एक शर्त पर, तुम्हें भी कल मेरी बहन की शादी में आना होगा !’, नेहा ने कहा !
‘जी बिलकुल, हम ज़रूर आयेंगे !’ रवि ने कहा और फिर रवि ने नेहा को उसके घर ड्राप किया !
अगले दिन ऑफिस से आधे दिन की छुट्टी लेकर रवि नेहा के घर गया !

‘नमस्ते आंटी जी’,रवि ने नेहा की माँ के पैर छूते हुए कहा !

नेहा की माँ एक अनपढ़ मगर सीधे स्वभाव की औरत थी ! गरीब होने के बावजूद उन्होंने अपनी हैसियत से बढ़-
चढ़कर शादी की तैयारियां की थी !

‘आंटी नेहा कहाँ है, कहीं दिखाई नहीं दे रही’, रवि ने उत्सुकतापूर्वक पुछा !

बेटा नेहा एक बार सजावट करने वालों के यहाँ गयी है ! शादी का सारा काम अकेले नेहा ही देख रही है ! इनके
पिताजी के देहांत के बाद, नेहा ने बेटी नहीं बल्कि बेटा बनकर हर काम में मेरा हाथ बंटाया है ! शायद नेहा की
जगह भगवान् ने मुझे एक बेटा दिया होता तो वो भी इतना नहीं कर पाता !

रवि को आज ये जानकर ख़ुशी महसूस हुयी कि नेहा ना सिर्फ अपने दम पर अपनी पढाई कर रही थी, बल्कि
अपनी बहन, अपने घर का खर्च और बाकी सब कुछ अपने दम पर कर रही थी ! आज ना चाहते हुए भी रवि
नेहा के बारे में सोचने को मजबूर था ! उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसे नेहा से प्यार हो चुका है और शायद आज
रवि की लडकीयों के बारे में राय भी बदल चुकी थी ! रवि एक जगह बैठकर नेहा के बारे में सोच ही रहा था कि
इतने में नेहा वहां आ गयी !

रोजाना बहुत ही साधारण सी दिखने वाली नेहा आज लाल रंग के सूट में बिलकुल जंच रही थी ! ये पहली बार
थी जब रवि ने नेहा को इतना ध्यान से देखा था ! रेशम से मुलायम बालों के बिच आज नेहा का चेहरा किसी
परी से कम नहीं लग रहा था और रवि आज नेहा को ऐसे देख रहा था मानो उसने पहली बार किसी लड़की को
देखा हो !

‘अरे सर आप कब आये, आपने खाना लिया ?’, नेहा ने पुछा !
अ..म..म..मैं
‘नितिन, जाओ सर के लिए खाना लेकर आओ और आइये सर आप ड्राइंग रूम में आराम से बैठिये ! मैं तब तक
कपडे चेंज कर लेती हूँ, बस थोड़ी ही देर में बारात आने वाली है !’, नेहा ने एक छोटे से कद के लड़के की तरफ
इशारा करते हुए कहा !

थोड़ी देर में वो लड़का रवि के लिए एक प्लेट में कुछ पूरियां, थोड़ी सी सब्जी और कुछ चावल के साथ एक
कटोरी में कुछ गुलाब जामुन ले आया ! रवि गुलाब जामुनों का शौक़ीन था !
पहले रवि ने खाना ख़तम किया और फिर आराम से ड्राइंग रूम में बैठकर गुलाब जामुन खाने लगा ! थोड़ी देर
में नेहा एक नीले रंग की साड़ी में वहां आई !

‘कैसी लग रही हूँ सर मैं’, नेहा ने पुछा और रवि ने जैसे ही मुड़कर नेहा की तरफ देखा, वो तो बस देखता रह
गया !

नीले रंग की साड़ी के साथ नीले नीले कंगन पहने और मैचिंग ज्वेलरी के साथ अब नेहा पहले से भी ज्यादा जंच
रही थी ! उसके हाथों में वो हथफूल और माथे पे मांग टीका ऐसा लग रहा था मानो उसी के लिए बना हो !
नेहा को देखते देखते रवि इतना खो चुका था कि वो ये भी भूल चुका था कि उसने गुलाब जामुन की सारी
चाशनी कब अपनी शर्ट पर टपका ली थी !

‘अरे सर आपकी शर्ट तो ख़राब हो गयी, आप एक काम कीजिये वोशरूम जाकर इसे साफ़ कर लीजिये’, नेहा ने
कहा !

रवि ना जाने सपनों की किस दुनिया में था कि वो अभी भी बस नेहा को देखे जा रहा था ! उसे पता तक नहीं
था कि उसके साथ क्या हुआ है !

‘सर’, नेहा ने फिर से कहा !

‘ओह ! नेहा सॉरी मैं किसी सोच में डूब गया था ! कहो क्या कह रही थी तुम’, रवि ने कहा !
‘सर आपकी शर्ट’, नेहा ने इशारा करते हुए कहा !

‘ओह म... म... म... मैं ... मैं अभी आता हूँ !’, रवि यह कहकर वोशरूम में चला गया !
वोश रूम में जाकर भी रवि अब तक मानो सदमे में था ! आज उसे इस बात से फर्क नहीं पड रहा था कि उसकी
शर्ट ख़राब हो चुकी थी बल्कि वो बस जी भरकर आज नेहा को देखना चाहता था !

रवि ने अब जल्दी से अपना रुमाल निकला और उसे थोडा सा गीला करके अपनी शर्ट साफ़ की ! कुछ देर बाद
वो फिर से बाहर ड्राइंग रूम की तरफ गया ! नेहा वहां मुस्कुराते हुए अपनी माँ से बातें कर रही थी !

आज रवि को नेहा की मुस्कराहट इतनी अच्छी लग रही थी कि रवि उस मुस्कराहट के बने रहने के लिए कुछ
भी कर सकता था ! रवि ने पहली बार किसी लड़की को इतने ध्यान से देखा था ! रवि अब दरवाज़े पर खड़ा
होकर बस नेहा को देख रहा था और वो अन्दर बस ये सोचकर अभी तक नहीं गया था क्यूंकि वो नहीं चाहता
था कि उसके ड्राइंग रूम में जाने से नेहा का ध्यान उसकी तरफ जाए और वो मुस्कुराना बंद कर दे इसलिए बस
कुछ दूर खड़ा होकर रवि नेहा को देख रहा था !

कुछ देर बाद नेहा का ध्यान रवि की तरफ गया ! ‘आइये सर मैं आपको सबसे मिलवाती हूँ’, नेहा ने कहा और
नेहा रवि को अपनी उस बहन के पास ले गयी जिसकी आज शादी थी !

‘मिलिए दिव्या से, ये मेरी छोटी बहन है !’, नेहा ने रवि को अपनी बहन दिव्या से मिलवाते हुए कहा !
‘शादी की बहुत बहुत शुभकामनायें !’, रवि ने अपने साथ लाया तोहफा नेहा की बहन को देते हुए कहा !
इतनी देर में बारात भी आ चुकी थी और अब नेहा को वापस बहार जाना था ! रवि भी अब वापस ड्राइंग रूम
में आकर बैठ गया था और आते जाते मेहमानों के बीच नेहा को अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाते हुए देख
रहा था ! मन ही मन अज रवि नेहा को दिल दे बैठा था !

दिव्या की विदाई के बाद रवि ने भी नेहा और नेहा की माँ से विदा ली ! अपनी गाडी की चाबी ड्राईवर को देकर
गाडी रवि ने ड्राईवर के साथ भेज दी और खुद पैदल ही रवि आज घर के लिए निकल गया !
‘आज बरसों बाद रवि पैदल घर जा रहा था वो भी गुनगुनाते और मुस्कुराते हुए !’, रास्ते में खेलते हुए बच्चे आज
उसे अच्छे लग रहे थे ! आज उसे ये दुनिया बहुत खुबसूरत नज़र आ रही थी और वो जानता था कि उसे प्यार हो
चुका था !

घर पहुँचते ही रवि ने आज अपनी माँ को सब कुछ बताया !

बेटा ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है कि आखिरकार तुम भी गृहस्थी के बारे में कुछ सोच रहे हो पर क्या तुमने
लड़की से भी अभी इस बारे में बात की है या नहीं ?, रवि की माँ ने पुछा !

‘नहीं माँ, जब नेहा मेरे सामने होती है तो मैं सिर्फ उसे देख रहा होता हूँ, मैं उसके सामने कुछ सोचने लायक
रहता ही नहीं ! वो बहुत अच्छी है माँ’, रवि अपनी माँ के सामने नेहा की तारीफों के पुल बांधे जा रहा था !
‘अच्छा अच्छा मैं समझ गयी, बहुत अच्छी है तेरी नेहा लेकिन उस से अब मुझे मिलवायेगा कब ?’, रवि की माँ
ने कहा !

‘बहुत जल्द माँ’, रवि ने जवाब दिया !
अगले दिन ऑफिस के बाद रवि नेहा से मिलने गया !
‘अंजली’, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है ! क्या मैं थोड़ी देर तुमसे बात कर सकता हूँ’, रवि ने कहा कि तभी नेहा
के फोन की घंटी बजी !

एक मिनट, नेहा ने कहा ! फोन पर नेहा की माँ थी !
बेटा, तेरी बहन दिव्या की ससुराल वालों ने तेरे लिए एक रिश्ता भेजा है ! शादी में दुल्हे के चचेरे भाई को तुम
बहुत पसंद आई ! वो तुमसे शादी करना चाहता है’, नेहा की माँ ने कहा !

‘ठीक है माँ, मैं बाकी बातें घर आकर करती हूँ’, नेहा ने कहा और फोन कट गया !

‘हाँ तो तुम क्या कह रहे थे रवि?’, सॉरी वो मेरी माँ का फोन था ! मेरी शादी के लिए उन्होंने एक लड़का पसंद
किया है’. तुम बताओ तुम क्या कह रहे थे ?’, नेहा ने रवि से पुछा !

‘म...मैं.. कुछ नहीं नेहा मुबारक हो !’रवि ने कहा ! आज रवि का दिल टूट चुका था !
जल्दी ही नेहा की शादी उसके जीजाजी के चचेरे भाई से कर दी गयी ! और अब रवि फिर से पहले की तरह ही
अपने काम में व्यस्त हो गया !

अब रवि पहले से ज्यादा गंभीर रहने लगा था , काम को ज्यादा व् लोगों को कम अहमियत देने लगा था !
उधर नेहा भी अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में कुछ ज्यादा खुश नहीं थी ! उसका पति नशे का आदी हो चुका था !

अक्सर वो नेहा को मारता और उसे गालियाँ देता ! अब तो नेहा के पति ने उसे गर्भ निरोधक गोलियां देना भी
शुरू कर दिया था ! कई बार नेहा को ऐसा लगता जैसे इसके पीछे ज़रूर कोई गहरा राज़ है पर अपने पति की
मार और अपनी माँ की लाचारी के चलते वो कुछ कह ना पाती और फिर एक दिन नेहा का पति रात को पीकर
घर आया ! घर की दहलीज़ पर कदम रखते ही उसने नेहा को गालियाँ देना शुरू कर दिया !

‘गरीबों की बेटी को लाकर यहाँ अमीरों वाली ज़िन्दगी दी मैंने, और तुम अपने पति से कैसे बर्ताव करना है ये
भी नहीं जानती ! जो सोने के कंगन तुम्हारी माँ ने तुम्हें शादी में दिए थे, जाओ उन्हें लेकर आओ’, नेहा के पति ने
दहाड़ते हुए कहा !

‘पर..वो तो मेरी माँ ने दिए थे..त..त..तुम उनका क्या करोगे’, नेहा ने उदासी भरे स्वर में कहा !
‘पति परमेश्वर होता है, तुम परमेश्वर से सवाल करती हो, तुम्हारी ये मजाल’, नेहा के पति ने इतना कहते हुए
उसके गाल पर एक तमाचा जड़ दिया !

गली में शोर के चलते अब वहां पडोसी भी इकट्ठे हो चुके थे और पड़ोसियों को देख कर नशे में नेहा का पति
और बौखला गया !

रुक तुझे तेरी औकात दिखाता हूँ ! नेहा के पति ने घर के कोने में पड़ा एक डंडा उठाया और उसे बेरहमी से
मारने लगा !
नेहा अपने बचाव में कुछ नहीं कर पा रही थी ! अपनी माँ की लाचारी को याद करते हुए वो बस कोने में खड़ी
सुबक रही थी !
इतनी देर में वहां पुलिस भी आ पहुंची थी ! शायद पड़ोसियों में से किसी ने पुलिस को फोन कर दिया था !
‘क्या हुआ, आप रो क्यूँ रही हैं’, पुलिस ऑफिसर ने पुछा !

‘ऑफिसर ये हमारा पारिवारिक मामला है’, नेहा के पति ने कहा !
‘मैडम, क्या आप ठीक हैं ? अगर ये व्यक्ति आपको तंग कर रहा है तो आप हमें बता सकती हैं !’, नेहा आज अपने पति की शिकायत करना चाहती थी लेकिन फिर उसे अपनी विवाहित बहन और अकेली माँ का ख़याल आया
जो महज पेनशन के सहारे अपना गुज़र बसर कर रही थी !
‘नहीं सर, कुछ नहीं ये हमारा पारिवारिक मामला है’, नेहा ने कहा और अन्दर चली गयी !
पुलिस अफसर के जाने के बाद नेहा का पति फिर से अन्दर आया ! ‘तो अब तुमने पड़ोसियों को भी मेरे खिलाफ
अपने साथ मिलाना शुरू कर दिया है ! ठीक है, आज मैं दिखाता हूँ तुम्हें कि किसी को पुलिस में कैसे पकडवाया
जाता है ! इतना कहते ही नेहा के पति ने खिड़की का शीशा बोतल मार कर तोडा और नशे में अपना हाथ टूटे
कांच पर दे मारा ! उसके हाथ से खून बहने लगा ! नेहा अभी तक जो हुआ वो समझ भी नहीं पायी थी कि उसके
पति ने पुलिस हेल्पलाइन 100 पर नंबर डायल कर दिया !

‘हेल्लो सर, आप जल्दी यहाँ आ जाइये ! मेरी पत्नी ने मुझपर जानलेवा हमला कर दिया है’, नेहा के पति ने कहा
! ठीक 20 मिनट बाद पुलिस उनके घर आई और नेहा को अपने साथ बैठकर पुलिस चौकी ले गयी ! नेहा इस
वक्त इतनी घबराई हुयी थी कि उसके दिमाग में ये तक नहीं आया कि वो पुलिस को अपने पति के नशे में होने के
बारे में बता सके ! अगली सुबह नेहा के पति ने उसे पुलिस चौकी से इस शर्त पर छुडवाया कि बदले में वो उसे
अपने सोने के कंगन देगी !

नेहा आज घर पर सफाई कर ही रही थी कि उसे अपने पति के कुर्ते की जेब में एक पेन ड्राइव मिला ! इस पेन
ड्राइव में उसके पति के साथ किसी महिला के कई अश्लील चित्र थे जिनमें दोनों एक साथ बाँहों में बाहें डालकर
बैठे शराब पी रहे थे ! नेहा अब ये समझ चुकी थी कि उसके पति उसे गर्भ निरोधक गोलियां क्यूँ देते हैं ! वो
बैठकर रोने लगी ! कुछ देर सोचने के बाद उसने वो फोटो अपने लैपटॉप में सेव कर लिए !
नेहा वो पेन ड्राइव वापस अपने पति के कुर्ते की जेब में रखने जा ही रही थी कि उसके पति ने उसे ऐसा करते
देख लिया !

‘ओह ! तो तुम अपनी सौतन के तस्वीरें देख चुकी हो !’, नेहा के पति ने कहा !
‘फिर तो तुम ये भी जानती होगी कि तुम्हारे कंगन बेचकर मैं उसी से मिलने गया था और फिर तो तुम ये भी
जानती होगी कि मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारी कोई एहमियत नहीं है ! अच्छा है, अब मुझे तुमसे छुपकर ये सब नहीं
करना पड़ेगा ! अब मैं घर पर ही अपनी माशूका के साथ रंगरलियाँ मना सकता हूँ वो भी तुम्हारे सामने !’, नेहा
के पति ने कहा और बहार चला गया !

अब नेहा के पति की हिम्मत और भी बढ़ गयी थी ! जब चाहे तब वो नेहा की बेरहमी से पिटाई करता, उस से
घर की नौकरानी की तरह काम लेता और उसे बेईज्ज़त करता ! एक दिन इस से तंग आकर नेहा ने खुद ख़ुशी
करने की कोशिश की ! नेहा की माँ जो जब ये पता चला तो वो नेहा को अपने घर ले गयी और कोर्ट में नेहा के
पति के खिलाफ तलाक़ का मुकद्दमा दायर कर दिया !

नेहा के पति ने पैसे और वकीलों के दम पर नेहा पर लाखों इलज़ाम लगाने की कोशिश की पर कोई भी इलज़ाम
साबित नहीं कर पाया पर क्यूंकि नेहा के पास लैपटॉप में वो फोटो थे, नेहा केस जीत गयी और नेहा को अपने
पति से तलाक़ भी मिल गया !

अब नेहा अपनी माँ के साथ अपने मायके में रहने लगी थी और अपनी माँ की मदद करने के लिए उसने काम की
तलाश भी शुरू कर दी थी !
नेहा को एक नामी कम्पनी से काम के लिए ऑफर आया ! रवि इस कम्पनी में एम्. डी था ! इंटरव्यू क्लियर होने
के बाद नेहा ने जब नौकरी पर जॉइन किया तब उसे इस बात का एहसास हुआ लेकिन ना जाने क्या सोचकर ना
वो रवि से मिलने गयी, ना ही उस से बात करने की कोशिश की !
फिर एक दिन अचानक कॉमन रूम में दोनों की मुलाकात हुयी ! रवि ने एक बार में ही नेहा को पहचान लिया !
‘कैसी हो नेहा’, रवि ने कहा !

‘मैं अच्छी हूँ रवि तुम कैसे हो मुझे बिलकुल उम्मीद नहीं थी कि तुम इतने दिन बाद भी मुझे पहचान लोगे ! और
बताओ, शादी हुयी तुम्हारी ?, नेहा ने चुटकी लेते हुए पुछा !

‘नहीं, अभी तो नहीं ! पर तुम बताओ, कैसी चल रही है तुम्हारी शादीशुदा ज़िन्दगी ?, रवि ने पुछा !
‘अच्छी चल रही है ! मेरे पति मुझे काफी खुश रखते हैं’, नेहा ने अपने घाव रवि से छुपाते हुए कहा और अपनी
कुर्सी पर चली गयी !

ना जाने कैसे अब तक नेहा के पति तक भी ये बात पहुँच चुकी थी कि नेहा एक कम्पनी में नौकरी करने लगी है !
नेहा के तलाकशुदा पति ने अब नेहा से बदला लेने की ठानी और वो नेहा को बेईज्ज़त करने नेहा के ऑफिस के
बहार जा पहुंचा !

‘गरीबों की बेटी को लाकर यहाँ अमीरों वाली ज़िन्दगी दी मैंने, और तुमने मेरे ही खिलाफ मुकद्दमा ठोंक दिया !
मैं देखता हूँ तुम ये नौकरी कैसे कर पाती हो ! अब मैं भी तुम्हें चैन से जीने नहीं दूंगा’, नेहा के तलाकशुदा पति ने
नेहा से कहा और नेहा उसका जवाब देने की बजाये तेज़ क़दमों से घर की तरफ बढ़ने लगी ! उधर नेहा का
तलाकशुदा पति भी अपने एक साथी के साथ नेहा के पीछे पीछे चलने लगा !

‘तुम्हें पता है, एक तलाकशुदा पत्नी को क्या कहते हैं? कुलक्षिनी... कुलटा....’, नेहा के तलाकशुदा पति ने अपने
साथी से बेहद तेज़ आवाज़ में कहा !

तभी पीछे से किसी के हाथ ने नेहा के तलाकशुदा पति का हाथ पकड़ा ‘दोबारा नेहा के बारे में ऐसे शब्द कहे, तो
तुम्हें जान से मार दूंगा’, ये हाथ और किसी का नहीं बल्कि रवि का था जो अब सारा माजरा जान चुका था !
‘तुम कौन हो, नेहा के आशिक’, नेहा के तलाकशुदा पति ने झल्लाते हुए कहा !

हाँ, कुछ दिन से जब नेहा को उसकी माँ के घर से कम्पनी आते-जाते देखा, समझ तो मैं तभी गया था कि नेहा के
साथ कोई अनहोनी ज़रूर हुयी है पर वो अनहोनी क्या थी ये आज पता चला’, रवि ने कहा !
‘तो क्या कर लेगा’, मेरी बीवी रह चुकी है वो, उसके साथ सोया हूँ मैं ! बिस्तर गर्म किया है उसने मेरा’, इस से
पहले कि नेहा का तलाकशुदा पति कुछ और कह पाता रवि के एक तमाचे से उसके कान का पर्दा मानो फट सा
गया !

‘नेहा, रुको नेहा ! मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ !’, रवि ने कहा !
रवि...तुम... रवि मैं,...... नेहा कुछ बोल ही नहीं पा रही थी... बस रो रही थी !

‘नेहा मैं तुमसे जो पूछ रहा हूँ, उसका जवाब दो ! मुझसे शादी करोगी, आज अभी ?’, रवि ने नेहा का हाथ अपने
हाथ में लेते हुए कहा !

‘पर तुम मेरे बारे में अभी कुछ नहीं जानते रवि ! मैं कभी माँ नहीं बन सकती ! गर्भ निरोधक गोलियां खिला
खिलाकर इस इन्सान ने मेरा शरीर ही ख़राब कर दिया है’, नेहा रोने लगी !

‘मैं कुछ जानना भी नहीं चाहता ! शादी सिर्फ बच्चों के लिए नहीं की जाती नेहा ! मैं जानता हूँ की तुम दुनिया
की सबसे अच्छी बीवी बनोगी ! बस इतना बताओ, मुझसे शादी करोगी ?’, रवि ने कहा !

‘नहीं रवि, मैं तुम्हारी ज़िन्दगी बर्बाद नहीं कर सकती’, नेहा ने कहा !

ठीक है तो फिर, मैं खुद अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर लेता हूँ ! रवि इतना कहकर पास बने पुल पर चढ़ा और
उसने आखरी बार नेहा से पुछा,’ नेहा मैं आखरी बार पूछ रहा हूँ, मुझसे शादी करोगी’.

‘नहीं रवि, प्लीज अपनी ज़िन्दगी बर्बाद मत करो ! मैं तुमसे शादी करुँगी’, नेहा ने कहा !

आज रवि फिर से बहुत खुश था ! उसे इस बात से फर्क नहीं पड रहा था कि नेहा से शादी करके वो कभी पिता नहीं बन पायेगा ! उसे याद था तो बस नेहा का वो मुस्कुराता चेहरा जो उसने नेहा की बहन की शादी में देखा
था और वो जानता था कि अगर वो इस चेहरे पर वहीँ मुस्कराहट वापस ला पाया, तो वो इस दुनिया का सबसे खुशनसीब पति अपने आप बन जाएगा ! उसे कुछ याद था तो वो नेहा जो अपनी माँ की मदद करने के लिए ना
सिर्फ नौकरी कर रही थी, बल्कि अपनी पढाई का खर्च भी खुद उठा रही थी ! वो नेहा जिसे पहली बार लाल सूट में देख कर उसे प्यार हो गया था ! हाँ, वहीँ नेहा जिसे नीली साड़ी में देखते देखते रवि इतना खो चुका था
कि वो ये भी भूल चुका था कि उसने गुलाब जामुन की सारी चाशनी कब अपनी शर्ट पर टपका ली थी !
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