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Kundli mein Raahu or Shani ek Saath Hon | कुंडली में राहू और शनि एक साथ | When Raahu and Shani both are Together in Horoscope

ज्योतिष का कार्य बहुत ही पवित्र माना जाता है. ये एक ऐसा विज्ञान है जिसके माध्यम से आप किसी भी अशुभ ग्रह से होने वाले नुकसान के प्रभाव को कम किया जा सकता है या फिर किसी भी लाभ देने वाले ग्रह के प्रभाव को बढ़ा दिया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को छठे, आठवे, दशवे और बाहरवे भाव का पक्का कारक माना जाता है. शनि इन भावो का कर्ता धर्ता होता है. जबकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहू एक छाया ग्रह है. 


अगर एक मान्यता को देखे तो पता चलता है कि राहू के और केतु के फल को देखने के लिए पहले शनि को देखना पड़ता है, क्योकि अगर शनि कुंडली में शुभ फल दे रहा है तो इन्हें भी आपको शुभ फल देना पड़ता है. उस स्थिति में ये अशुभ फल नही दे सकते. किन्तु एक मान्यता ये भी है कि शनि के शुभ फल को देखने के लिए पहले चन्द्रमा को देखा जाता है. यहाँ देखने वाली बात ये है कि हर एक ग्रह कहीं न कहीं दुसरे ग्रह से जुडा हुआ है. साथ ही सभी ग्रहों में शनि ग्रह का विशेष स्थान है. 
 
कुंडली में राहू और शनि एक साथ
कुंडली में राहू और शनि एक साथ

अगर आपको अपने मकान या वाहन के सुख के बारे में जाना होता है तो उसके लिए शनि को ही देखा जाता है. शनि को कर्म स्थान का कारक भी माना जाता है. जबकि राहू को ऐसे लाभ का कारक माना जाता है जो आकस्मिक हो. राहू विधुत से किये जाने वाले कार्य के बारे में बताता है. इसके अलावा ये भी माना जाता है कि राहू का संबंध ससुराल से होता है. अगर आप अपने ससुराल से परेशानी को झेल रहे हो तो समझ जाओ कि आपकी कुंडली में राहू की दशा ख़राब चल रही है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर जातक की कुंडली के किसी भी भाव में राहू और केतु दोनों आ जाये तो वो ग्रह दूषित हो जाता है. इससे वो ग्रह अपना शुभ फल भी छोड़ देता है. इसके अलावा ये माना जाता है की राहू के साथ शनि किसी कुंडली के भाव में प्रवेश कर लेते है तो उस स्थिति में जातक पर प्रेत बाधाएं और टोन टोटके आदि बहुत ही शीघ्रता से असर करते है. ऐसा इसलिए होता है क्योकि शनि को प्रेत माना जाता है और राहू तो छाया ग्रह है ही. जब ये किसी भाव में होते है तो ये दोनों प्रेत छाया बन जाते है और ऐसे योग और भावो को प्रेत छाया योग भी माना जाता है. किन्तु सामान्य व्यक्ति इसे पितृदोष का नाम दे देते है. 
 
Kundli mein Raahu or Shani ek Saath Hon
Kundli mein Raahu or Shani ek Saath Hon

इस पर एक कथा ये भी है कि एक बार हनुमान जी ने राहू और केतु को अपनी बाहों में पकड़ लिया था और उसी समय पर उन्होंने शनि महाराज को भी अपनी पूंछ में पकड़ रखा था, इस स्थिति में शनि महाराज ने कहा था कि आज हमे जो हनुमान जी से छुडवा देगा उसे हम कभी भी परेशान नही करेंगे. इसलिए जब भी किसी जातक की कुंडली में ये तीनो ग्रह प्रवेश कर लेते है तो एक साबर विधि को अपनाया जाता है जिसकी मदद से आप इन तीनो के प्रभाव से मुक्त हो जाते हो और फिर ये दुबारा आपको कभी परेशान नही करते है. 


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहू जब भी किसी संकट में होता है तो वो मदद के लिए सीधे शनि महाराज के पास भागता है. ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को पाताल माना जाता है और राहू को सांप. इसीलिए सांप जब भी किसी मुस्किल में होता है तो अपने बिल में चला जाता है. अर्थात राहू शनि के पास भाग जाता है. अगर इसका आधुनिक उदहारण दे तो जब कोई मुजरिम ( मतलब राहू ) संकट में आता है तो पुलिस ( मतलब मंगल या सूर्य ) उनके पीछे पड़ जाती है और वो सीधे वकील ( मतलब शनि ) के पास भागते है. इस तरह से राहू हमेशा शनि पर निर्भर रहता है. शनि को न्याय का देवता भी माना जाता है किन्तु जब राहू इनके साथ बैठ जाता है तो राहू शनि के प्रभाव को ख़त्म कर देता है. किन्तु शनि भी कभी उन लोगो को परेशान नही करते जो मजदुर होते है और जो निचले वर्ग के लोगो का सम्मान करते है, इन लोगो पर शनि हमेशा अपनी कृपा दृष्टी ही बनाये रखते है. इसीलिए शनि को मजदुर का कारक भी कहा जाता है. साथ ही निचले दर्जे के लोगो का अपमान करने वाले लोगो को शनि हमेशा दंड देते है और उनके जीवन को दुखो से भर देते है. इसीलिए अगर शनि के बुरे प्रभाव से बचना है तो आप हमेशा अपने से छोटे लोगो का सम्मान करे और जितनी हो सके उनकी सहायता करे. 

 
When Raahu and Shani both are Together in Horoscope
When Raahu and Shani both are Together in Horoscope

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