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Yamraaj ne Batayen Mrityu ke Raaj | यमराज ने बतायें मृत्यु के राज | Lord Yamraj Disclose Mysteries of Death

यमराज और मृत्यु के भेद का खुलासा ( Yamraaj or Discloser of Death Secrets )
आपने सावित्री की यमराज से मुलाकात के बारे में तो सुना ही होगा. सावित्री ऐसी औरत थी जो अपने पति के प्राण हरने वाले यमराज तक से लड़ गई थी और वापस अपने पति के प्राण बचाकर भी लायी थी. सावित्री की हठ के आगे यमराज को मजबूर होना पड़ा था और उसके पति के प्राण भी लौटाने पड़े थे. यमराज और इन्सान से जुडा ठीक ऐसा ही एक और प्रसंग है जो एक बालक नचिकेता की यमराज से भेंट के बारे में है, जिसमे बालक नचिकेता की हठ के आगे मजबूर होकर यमराज को उसे मृत्यु से जुड़े रहस्य बताने पड़े थे. आइये जानते हैं इस पूरी कहानी को विस्तार से. CLICK HERE TO KNOW शनिदेव जी की स्त्री रूप धारण कथा ...
Yamraaj ne Batayen Mrityu ke Raaj
Yamraaj ne Batayen Mrityu ke Raaj
नचिकेता का यमराज की खोज में निकलना (Nachiketa Went In Search Of Yamraaj) :
हिंदी धर्म ग्रन्थ कठोपनिषद के अनुसार, वाजश्रवस ऋषि के एक पुत्र हुआ जिसका नाम था नचिकेता. उन दिनों विश्वजीत यज्ञ करने का रिवाज था. नचिकेता के पिता ने भी ये यज्ञ किया और यज्ञ के समय जब दान देने का वक्त आया तो वो बूढी व अस्वस्थ गायों को दान में देने लगे.


अपने पिताजी से ऐसी अपेक्षा ना रखने वाले नचिकेता ने पिताजी से पुछा, ”आप स्वस्थ गायें दान में देने की जगह ये अस्वस्थ गायें दान में क्यूँ दे रहे हैं पिताजी”.



नचिकेता के पिताजी चुप रहे पर फिर नचिकेता ने दोबारा अपना सवाल दोहराया और तब उसके पिताजी ने जवाब दिया, ”चुप हो जा बालक वर्ना तुझे भी किसी को दान में दे दूंगा”.



अब नचिकेता के दिमाग में नया सवाल आ चुका था, ”आप मुझे किसे दान में दे रहे हैं पिताजी”, नचिकेता ने पुछा. CLICK HERE TO KNOW देवी सावित्री का ब्रह्मा जी को अभिशाप ...

यमराज ने बतायें मृत्यु के राज
यमराज ने बतायें मृत्यु के राज
नचिकेता के पिता ने कोई जवाब नहीं दिया पर जब बहुत देर तक यहीं सवाल नचिकेता के मुंह से सुन कर वो थक गए तो उन्होंने गुस्से में नचिकेता से कहा, ”मैं तुझे मौत (यमराज) को दान में दूंगा”. 



हालाँकि नचिकेता के पिता को बाद में अपने कथन पर दुःख भी हुआ पर तब तक नचिकेता अपने पिताजी की बात का मान रखने के लिए और सत्य की रक्षा करने के लिए यमराज को ढूँढने निकल पड़ा था.


कैसे हुआ यमराज व नचिकेता का मिलन (How Nachiketa And Yamraaj Actually Met) :
यमराज को खोजते खोजते नचिकेता यमपुरी में जा पहुंचा पर तब तक यमराज कहीं बाहर जा चुके थे. यमराज के द्वारपाल ने बालक नचिकेता से अपने घर वापस जाने को कहा पर नचिकेता भूखा प्यासा यमराज के द्वार पर ही पड़ा रहा. 3 दिन भूखा प्यासा यमराज के द्वार पर पड़ा रहने के बाद बालक नचिकेता का यमराज से मिलन हुआ जब वो अपने घर वापस आये. यमराज बालक नचिकेता से उसके कठोर संकल्प के बारे में सुनकर बहुत खुश हुए और नचिकेता का उसके पिता के प्रति प्यार देख कर यमराज ने कहा, ”मांगो बालक क्या मांगते हो”.


यमराज के घर के बाहर 3 दिन प्रतीक्षा करने के बदले यमराज ने नचिकेता से कोई तीन वरदान मांगने के लिए कहा.

Lord Yamraj Disclose Mysteries of Death
Lord Yamraj Disclose Mysteries of Death
नचिकेता के तीन वरदान (Nachiketa’s Three Boons) :
यमराज के तीन वरदान देने पर नचिकेता ने प्रथम वरदान अपने पिताजी का स्नेह माँगा. दूसरे वरदान में नचिकेता ने यमराज से अग्नि विद्या का ज्ञान लिया. तीसरे वरदान में नचिकेता ने मृत्यु रहस्य व आत्मज्ञान के बारे में यमराज से बताने का निवेदन किया. यमराज ने पहले दो वरदान तो बालक नचिकेता को बेझिझक दे दिए पर तीसरा वरदान देने में वो थोड़ा हिचकिचा से रहे थे. बालक नचिकेता के सामने उन्होंने इस वरदान के बदले अनगिनत प्रलोभन रखे पर नचिकेता यहीं वरदान चाहता था और इसीलिए अंत में यमराज को उस बालक के आगे झुकना पड़ा और उस बालक को आत्मज्ञान व मृत्यु रहस्य की जानकारी भी देनी पड़ी.


दृढ़संकल्प, आस्था, वचनबद्ध और देवी देवताओं से जुडी ऐसी ही अन्य रोचक और मनोरंजक कथों को जानने और पढने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट कर जानकारी हासिल कर सकते हो. 
Janm Maran ke Rahasya ka Khulaasa
Janm Maran ke Rahasya ka Khulaasa
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