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Swasthya Rakshak Ashwagandha | स्वास्थ्य रक्षक अश्वगंधा | Healthy Winter Cherry

अश्वगंधा ( Winter Cherry )
अश्वगंधा, जैसाकि इसके नाम से ही पता चल रहा है कि ये शब्द दो शब्दों की संधि से बना है – अश्व + गंधा, अर्थात घोड़े की गंध वाला. इसका सेवन आपको अश्व की ही तरह उर्जावान बना देता है. शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने कभी अश्वगंधा के बारे में नहीं होगा, ये सभी अधिक जाना जाने वाला पौधा है, जो दिखने में एक झाडी की तरह होता है, इसकी लम्बाई लगभग 60 से 90 सेंटीमीटर तक होती है. जितना ख़ास अश्वगंधा का पौधा है उससे अधिक महत्वपूर्ण उसकी जड़ है क्योकि अश्वगंधा की जड़ को आयुर्वेद में सबसे उच्च स्थान प्राप्त है. ये अनेक रोगों की रामबाण इलाज है, खुद एक जड़ होते हुए भी ये सभी बीमारियों का जड़ से ही इलाज करती है. अश्वगंधा की जड़ की लम्बाई 10 से 15 सेंटीमीटर की होती है, बाहर से दिखने में ये कड़ी होती है वहीँ अंदर से इसका रंग सफ़ेद होता है. अश्वगंधा के पौधे पर लाल और पीले रंग के पौधे गुच्छे में लगते है. साथ ही इसके बीज भी छोटे और चिकने होते है.
एक जंगली पौधा होने के कारण अश्वगंधा का तेल निकालकर भी प्रयोग में लाया जाता है. साथ ही जब बात असली अश्वगंधा की पहचान की हो तब अश्वगंधा के पौधे को मसलने पर घोड़े के मूत्र की गंध आती है. इस पौधे में अनेक गुण पाए जाते है जैसेकि ये पाचनशक्ति को मजबूत करता है, नाडी शक्ति में वृद्धि करता है, ये शरीर को बल प्रदान करता है, शरीर में शक्ति का संचार करता है, वात कफ से बचात है इत्यादि. जहाँ इसके इतने लाभ है वहीँ अश्वगंधा के कुछ नुकसान भी जैसेकि जिन लोगों को गुस्सा अधिक आता है उन्हें अश्वगंधा को ग्रहण नहीं करना चाहियें. CLICK HERE TO KNOW गिलोय अमृता औषधीय और आयुर्वेद का खजाना ... 
Swasthya Rakshak Ashwagandha
Swasthya Rakshak Ashwagandha
रोगमुक्ति के लिएय अश्वगंधा का प्रयोग ( Winter Cherry to Cure Diseases ) :
·     स्त्रियों के स्तन में दूध बनायें ( Increase Women’s Breast Milk Level ) : कुछ स्त्रियाँ को माँ बनने के बाद भी उसनके वक्ष में दूध नहीं आता इस स्थिति में नवजात शिशु को सही पोषण नही मिल पाता क्योकि माता का दूध ही उसके विकास का माध्यम बनता है. इस स्थिति में इन महिलाओं को अश्वगंधा का सेवन करना चाहियें. अगर को स्त्री गर्भवती भी है तो उसे गर्भावस्था से ही अश्वगंधा का सेवन शुरू कर देना चाहियें इससे उनको होने वाली संतान की हड्डियाँ मजबूत, शरीर बलशाली और स्वास्थ्य उत्तम रहता है.

·     क्षयरोग ( Tuberculosis ) : टीबी आज के समय में सबसे अधिक भयंकर बीमारियों में से एक है. हालांकि इससे बचने के लिए कुछ दवाइयों को बनाया जा चुका है किन्तु ये बहुत महंगी होती है और चुनिंदा हस्पतालों में ही मिलती है. किन्तु आप अश्वगंधा का उपयोग करते हुए भी टीबी को खत्म कर सकते हो. CLICK HERE TO KNOW शिलाजीत के अनगिनत स्वास्थ्यवर्धक गुण ... 
स्वास्थ्य रक्षक अश्वगंधा
स्वास्थ्य रक्षक अश्वगंधा
उपयोग ( Use ) : अश्वगंधा का टीबी में उपयोग करने के लिए आप सबसे पहले काढा तैयार कर लें और उसमें 2 ग्राम की मात्रा में अश्वगंधा चूर्ण मिला लें. आप इस काढ़े का सेवन लगातार करें आपको जल्द ही आराम मिलेगा.

इसी तरह आप 1 ग्राम पीपल का चूर्ण लें और उसमें 2 ग्राम अश्वगंधा का चूर्ण मिला लें. अब आप इस मिश्रण में 5 ग्राम शुद्ध देशी घी और 10 ग्राम असली शहद मिलायें. आप इसका सेवन करें. धीरे धीरे टीबी जड़ से खत्म हो जायेगी.

·     नपुंसकता : नपुंसकता भी दिन प्रतिदिन बढती जा रही है जिसका मुख्य कारण है बच्चों का छोटी उम्र में गलत कार्य करना. नपुंसकता को दूर करने के लिए आप निम्न तरीके से अश्वगंधा का इस्तेमाल करें.

उपयोग ( Use ) : सबसे पहले आप अश्वगंधा को बारीक पीस लें और उसमें सामान मात्रा में चीनी मिला लें. अब आप इसे गाय के ताजे दूध के साथ ग्रहण करें. ध्यान रहे कि आपको ये उपाय दिन में तीन बार अपनाना है.
Healthy Winter Cherry
Healthy Winter Cherry
अपनी इन्द्रियों को सख्त बनाने के लिए आप रात को सोते समय चमेली के तेल में थोडा सा अश्वगंधा चूर्ण मिलाएं और इसे अपनी इन्द्रियों पर लगायें. इससे आपके गुप्तांगों की शिथिलता दूर होती है.

नपुंसकता को दूर करने के लिए आप कडवा कुठ, दालचीनी और अश्वगंधा को सामान मात्रा में महीन पिस लें. अब आप इसमें गाय के दूध से बना मखान मिलाएं और सुबह शाम अपने गुप्तांग पर मलें. ध्यान रहे कि आप इसका प्रयोग करने से पहले और बाद में अपने गुप्तांग को गर्म पानी से अवश्य साफ़ कर लें.

·     बांझपन ( Infertility ) : हर स्त्री का माँ बनने का सपना अवश्य होता है किन्तु बांझपन उनके इस सपने की सबसे बड़ी बाधा है. ऐसे महिलायें और इनका परिवार एक संतान के लिए तड़पता रहता है और अनेक उपाय अपनाता है किन्तु आयुर्वेद की इस जड़ में बांझपन का भी इलाज छुपा है.

उपयोग ( Use ) : जिन महिलाओं का गर्भ नहीं ठहरता उन्हें सामान मात्रा में नागकेसर, गोरोचन और अश्गंध लानी चाहियें और उन्हें सुखाकर बारीक पीस लेना चाहियें. प्राप्त चूर्ण को स्त्री रोजाना सुबह शाम ठन्डे पानी के साथ ग्रहण करें. जल्द ही उनकी गोद भी भर जायेगी.
एक रामबाण दवा अश्वगंधा
एक रामबाण दवा अश्वगंधा
जब स्त्री को मासिक धर्म आने वाला हो तो वे 50 – 50 ग्राम नागौरी और अश्वगंधा को मिलाएं और उन्हें पीसकर उनका चूर्ण बनाएं. अब मासिक धर्म के समय में रोजाना इसकी 10 ग्राम मात्रा का सेवन करें.

·     गर्भपात ( Miscarriage ) : जहाँ कुछ महिलायें बांझपन से परेशान रहती है तो कुछ गर्भपात से. गर्भपात में स्त्रियों को बच्चे की आशा तो होती है किन्तु किसी कारणवश उनका गर्भ बार बार खत्म हो जाता है. ऐसी स्त्रियाँ निम्न उपाय अपनाएँ.

उपयोग ( Use ) : आप 10 – 10 ग्राम की मात्रा में सफ़ेद काटेरी की जड़ और अश्वगंधा की जड़ को मिलाकर उसका चूर्ण तैयार करें और इसका गर्भधारण के पहले 5 महीनों तक सेवन करें. इस उपाय से आपको गर्भपात नहीं होता है बल्कि आपका शिशु उत्तम स्वास्थ्य के साथ इस दुनिया में जन्म लेता है.
Ashwgandha Paudha Ek Fayde Anek
Ashwgandha Paudha Ek Fayde Anek
·     खांसी ( Cough ) : खांसी सबसे आम बिमारी है जो किसी भी मौसम में किसी को भी अपना शिकार बना लेती है, किन्तु अधिक खांसी अनेक बिमारियों को भी बुला सकती है. इसलिए इसका जड़ से खत्म होना आवश्यक है. जिसमे अश्वगंधा सबसे अधिक असरकारक सिद्ध होता है.

उपयोग ( Use ) : आप 400 ग्राम पानी को गैस पर रखें और उसमें 10 ग्राम मिश्री और इतना ही अश्वगंधा की जड़ का चूर्ण मिलाएं. जब पानी लगभग 50 ग्राम रह जाएँ तो आप इसे गैस से उतार लें और ठंडा होने के लिए रख दें. इस पानी का सेवन करने से आपको छाती संबंधी कोई भी बिमारी नहीं रहती.

इस उपाय के अलावा आप अश्वगंधा के पत्तों का 20 ग्राम काढा बनाएं और उसमें 10 ग्राम बहेड़े का चूर्ण, 25 ग्राम काली मिर्च, 2 ग्राम सेंधा नमक और 5 ग्राम कत्था मिलाएं. इस मिश्रण से आप ½ ग्राम की कुछ गोलियों का निर्माण करें और गोलियों का रोजाना सेवन करें. इससे शीघ्र ही आपको खांसी और टीबी से राहत मिलती है.
अश्वगंधा
अश्वगंधा
·     गठिया रोग ( Joint Pain ) : गठिया रोग का शिकार अधिकार वृद्ध लोग होते है किन्तु ये रोग आजकल युवा पीढ़ी को भी अपना शिकार बनाता जा रहा है. जिसका मुख्य कारण है इनका सारा दिन कुर्सी पर बैठकर काम करना या व्यायाम ना करना. इस बढती समस्या से निजात पाने के लिए आप निम्न तरीके से अश्वगंधा का उपयोग कर सकते हो.

उपयोग ( Use ) : आप 25 ग्राम सौंठ को लें और उसमे 100 ग्राम अश्वगंधा को मिला लें. इसके सूखने के बाद आप इसे अच्छी तरह से पीसकर इसका चूर्ण बना लें. अब आप इसमें 150 ग्राम चीनी मिलाएं और रोजाना सुबह शाम इस चूर्ण को 4 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लें.

एक अन्य उपाय के अनुसार आप बराबर मात्रा में अश्वगंधा का चूर्ण और शुद्ध देशी घी लें और इसे सुबह शाम ग्रहण करें. आपको गठिया रोग से जल्द ही राहत मिलेगी.

·     शक्तिशाली व उर्जावान शरीर ( For Powerful and Energetic Body ) : शक्तिशाली और उर्जावान शरीर पाने के लिए लोग आजकल जिम का सहारा लेते है और वहां जाकर अनेक तरह के पाउडर और गोलियों का सेवन करते है किन्तु अंदरूनी और मानसिक बल आपको आयुर्वेद की इस जड़ से ही मिलता है. जिसका उपयोग निम्न तरीके से किया जाता है.
उपयोग ( Use ) : आप 50 – 50 ग्राम की मात्रा में अश्वगंधा, विधारा और मिश्री लें और उन्हें पीसकर बारीक चूर्ण बनाएं. अब आप इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह शाम गर्म दूध के साथ एक चम्मच लें. कुछ सप्ताहों के बाद ही आपको अपने शरीर, अपनी सोच और अपने बल में अंतर नज़र आने लगेगा.
Powerful Winter Cherry
Powerful Winter Cherry
·     ब्लड प्रेशर ( Blood Pressure ) : दिन भर की भागदौड़ के कारण और निरंतर तनाव के कारण शरीर अस्वस्थ होने लगता है जिसका सीधा असर रक्त प्रवाह पर पड़ता है और व्यक्ति उच्च या निम्न रक्तचाप का शिकार हो जाता है. किन्तु अश्वगंधा ना आपके रक्तदाब को नियंत्रित करता है बल्कि आपके रक्त को साफ़ करते हुए आपको चमकदार त्वचा भी देता है.

उपयोग ( Use ) : अश्वगंधा का उपयोग करने के लिए आपको बराबर मात्रा में बहेड़ा और अश्वगंधा को मिलाना है और उन्हें बारीक पिसना है. इस चूर्ण को आप किसी डिब्बे में डाल लें और गुड व गर्म दूध के साथ रोजाना सुबह शाम 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करें.

·     माहवारी विकार ( Menstruation Problem ) : कुछ महिलाओं को मासिक धर्म में समस्यायें होती है जैसेकि माहवारी के समय गांठे आने लगती है या माहवारी का समय अपने आप ही बदल जाता है. इससे स्त्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
Jaanen Ashvagand ke Behratin Laabh
Jaanen Ashvagand ke Behratin Laabh
उपयोग ( Use ) : आप सामान मात्रा में अश्वगंधा का चूर्ण और चीनी लें और इसकी 10 ग्राम की मात्रा को रोजाना सुबह खाली पेट लें. ध्यान रहे कि आपको ये उपाय मासिक धर्म के शुरू होने के 1 सप्ताह पहले से लेकर मासिक धर्म के बंद होने तक अपनाना है. इससे आपको माहवारी से जुड़े सारे विकार नष्ट हो जायेंगे.

इसके अलावा भी अश्वगंधा का अनेक रोगों में उपयोग किया जाता है जैसेकि उँगलियों व हाथ पैरों का कांपना, सदमा, हृदय की दुर्बलता, अल्सर, रक्त प्रदर, हड्डियों का कमजोर होना, वजन बढाना, स्तन के आकार में वृद्धि, दस्त, काफ रोग इत्यादि.


अश्वगंधा के रोगों को खत्म करने में अन्य देशी घरेलू आयुर्वेदिक उपयोगों को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
वाजिगंधा
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