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Grahon ki Mahadasha or Unke Shubh Ashubh Fal | ग्रहों की महादशा और उनके शुभ अशुभ फल | The State of Planets in Horoscope and Their Effects

ग्रहों की महादशा का फल ( Benefits of Planets Situation )
भारतीय ज्योतिषों के अनुसार 9 ग्रह माने जाते हैं इन 9 ग्रहों को 12 राशियों में विभक्त किया गया है. सुर्य और चाँद के पास एक एक राशि है लेकिन बाकि के ग्रहों के पास दो दो राशि है. ज्योतिषों के अनुसार मनुष्य की कुल उम्र 120 मानी जाती है और इन वर्षो में सभी ग्रहों की महादशा पूर्ण हो जाती है. कुंडली में ग्रहों की महादशा के अनुसार ही शुभ - अशुभ का फल प्राप्त होता है. कुंडली में ग्रहों की स्थिति से महादशा का पता चल जाता है कि कौन से ग्रह की महादशा ठीक नही है. जिसके चलते इसका निवारण किया जा सकता है. CLICK HERE TO KNOW कुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के उपाय ... 
Grahon ki Mahadasha or Unke Shubh Ashubh Fal
Grahon ki Mahadasha or Unke Shubh Ashubh Fal
ग्रहों की महादशा का समय ( Time Period of Every Planet in a Person’s Life ) :
  • सूर्य - 6 वर्ष
  • चन्द्र - 10 वर्ष
  • मंगल - 7 वर्ष
  • राहु - 18 वर्ष
  • गुरु - 16 वर्ष
  • शनि - 19 वर्ष
  • बुध 17 वर्ष
  • केतु - 7 वर्ष और
  • शुक्र - 20 वर्ष की होती है

ग्रहों का कुंडली पर प्रभाव ( The Effect of Planets on Horoscope ) :
-    अगर गुरु में गुरु उच्च और स्वक्षेत्री हो तो सुन्दर भवन, वस्त्र, आभूषण और विलाषिता की वस्तुओँ की प्राप्ति होती है.

-    यदि नीच राशि का बृहस्पति हो या 6, 8, 12वें भाव में हो तो दुःख, कलेश, हानि और पति - पत्नी वियोग होने की संभावना अधिक होती है.

-    इसके अलावा गुरु में शनि उच्च स्वक्षेत्री, मूल त्रिकोणी हो तो इस स्तिथि में भूमि, धन, सवारी तथा पुत्र का योग होता है.

-    वहीँ शत्रु क्षेत्रीय शनि हो तो मानसिक दुःख, स्त्री को कष्ट तथा संपत्ति का नुकसान होगा.

-    किसी राशि के अंतिम अंशों में स्थित ग्रह कि दशा - अन्तर्दशा अनिष्टकारक सिद्ध होती है.

-    साथ ही उच्च राशि में स्थित ग्रह नवांश में नीच का हो जाये तो अशुभ फल देता है.

-    किन्तु नीच राशि में स्थित ग्रह उच्च नवांश में हो तो ऐसे जातकों को अपनी दशा में शुभ फल की प्राप्ति होती है. CLICK HERE TO KNOW गुरु की अन्य ग्रहों के साथ युति ... 
ग्रहों की महादशा और उनके शुभ अशुभ फल
ग्रहों की महादशा और उनके शुभ अशुभ फल
-    किसी ग्रह की महादशा में उसके शत्रु ग्रह की अन्तर्दशा आने पर अनेक प्रकार के कष्ट झेलने पड सकते है.

-    शुभ ग्रह की महादशा में यदि पापी ग्रह आ जाये तो पहले दुःख उसके बाद में सुख की प्राप्ति होती है.

-    वक्री ग्रह के योग से मनुष्य को पलायन, रोग, पीड़ा, मानहानि और धनहानि जैसे फल प्राप्त होते है.

-    यदि उच्च राशि में स्थित ग्रह नौंवें भाव में हो तो अशुभ फल प्राप्त होता है.

लेकिन किसी भी ग्रह की महादशा होने पर उन्हें उनका उपचार संभव है.

महादशा का भाव के अनुसार फल का होना ( Benefits of State of Planets according to Their Home and Place in Horoscope ) :
  • लग्नेश की महादशा : स्वास्थ्य अच्छा रहता है, धन - प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि होता रहता है.

  • धनेश की महादशा : कुछ समय तक लाभ रहता है, मगर शरीर में कष्ट भी रहता है, साथ ही स्त्री (पत्नी) को कष्ट होता रहता है.

  • तृतीयेश की महादशा : घर में भाइयों के लिए परेशानी बनी रहती है, आपस में सभी भाइयों के बीच लड़ाई - झगड़ा लगातार होना इसका प्रतिक है.

  • चतुर्थेश की महादशा : सुन्दर घर, वाहन प्राप्ति, प्रेम - प्रसंग में वृद्धि होना.

  • पंचमेश की महादशा : धन की प्राप्ति होती है, मान - सम्मान, प्रतिष्ठा, संतान का सुख प्राप्त होना, माता के हर कष्ट का समाधान मिलना.

  • षष्ठेश की महादशा : रोगों से ग्रस्त होना, शत्रुओं की संख्या बढ़ना, भय लगना, अपमान का होना, जीवन में संताप इसके लक्षण है.

  • सप्तमेश की महादशा : जीवन साथी को स्वास्थ्य का कष्ट तथा चिंता का होना.
The State of Planets in Horoscope and Their Effects
The State of Planets in Horoscope and Their Effects
  • अष्टमेश की महादशा : लगातार कष्ठ का होना, हानि होना, मृत्यु का भय सताना.

  • नवमेश की महादशा : भाग्य का उदय होना, तीर्थयात्रा का सुख प्राप्ति होना, पलायन का होना, माता को कष्ट.

  • दशमेश की महादशा : राज्य से लाभ होता है, पद - प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है, धनागम का लाभ, प्रभाव मे वृद्धि, पिता को लाभ.

  • लाभेश की महादशा : धन से लाभ होना, पुत्र की प्राप्ति होना, यश में मिलना, पिता को कष्ट होना.

  • व्ययेश की महादशा : धन मे हानि, अपमान का होना, पराजय, देह कष्ट, शत्रु पीड़ा होना.

जो ग्रह अपनी खुद की ही राशि पर नजर डालता है वो हमेशा शुभफलदायी सिद्ध होता है. इसके अलावा त्रिकोण के स्वामी भी सदा शुभ फल देते है.

-    क्रूर भाव : माना जाता है कि 3, 6 और 11 भाव के स्वामी हमेशा क्रूर होते है और अशुभ परिणाम देते है.

-    दुष्ट स्थान : इसी तरह 6, 8 और 12 को दुष्ट स्थान माना जाता है और वे भी अशुभ फलदायी ही होते है.

-    शुभ ग्रह केंद्र : वहीँ 1, 4, 7, 10 भावों को शुभ फल देने वाला माना जाता है. इसके अलावा कुछ पाप ग्रह केंद्र भी है जो अशुभ परिणाम देते हैं.

-    वहीँ बुद्ध, केतु और राहू जिस भी ग्रह के साथ आते हैं वे वैसा ही फल देने लग जाते हैं.

ग्रहों की महादशा और उनके अन्य ग्रहों के साथ आने पर परिणाम के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
जीवन पर महादशा की अवधि
जीवन पर महादशा की अवधि

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