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Gorilla Glass Kya Hai Aur Ye Kaise Kaam Karta Hai | गोरिल्ला गिलास क्या है और ये कैसे काम करता है

गोरिल्ला गिलास (Gorilla Glass )
आज के गैजेट युग में जब भी हम कोई नया फ़ोन, टेबलेट या लैपटॉप खरीदते है तो हम उस डिवाइस के Specification में पायेंगे कि उस डिवाइस की स्क्रीन पर कौन सा गिलास लगा हुआ है और आज के समय में लगभग हर डिवाइस में गोरिल्ला गिलास लगाया जाता है क्योकि ये नार्मल गिलास से ज्यादा शक्तिशाली, स्क्रैच  प्रूफ ऑफ़ मजबूत होता है. पहले चाहे फ़ोन हो या कंप्यूटर कुछ भी पोर्टेबल नहीं था लेकिन जब से ये Portable हुए है तब से इनकी प्रोटेक्शन पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है और इसीलिए गोरिल्ला गिलास की मांग भी दिन प्रतिदिन बढती जा रही है लेकिन ये नार्मल गिलास से मजबूत कैसे है और इसपर Scratch क्यों नहीं पड़ते? आपके इन्ही सवालों का जवाब आज हम आपको देने वाले है. CLICK HERE TO KNOW क्लाउड स्टोरेज क्या है और इसका उपयोग कैसे करते है ...
गोरिल्ला गिलास क्या है और ये कैसे काम करता है
गोरिल्ला गिलास क्या है और ये कैसे काम करता है
क्या है गोरिल्ला गिलास :
गोरिल्ला ग्लास की सबसे ख़ास बात ये है कि ये Environment Friendly गिलास है और इन्हें Alkali Aluminosilicate से बनी एक पतली सी Sheet से निर्मित किया जाता है. इनका इस्तेमाल खासतौर से एल्क्ट्रोनिक डिवाइसेस जैसेकि मोबाइल फोन, टेलीविज़न, टेबलेट और लैपटॉप की स्क्रीन को प्रोटेक्शन देने के लिए किया जाता है और इनका डिजाईन इन डिवाइसेस की शेप पर ही निर्भर करता है. क्योकि ये मजबूत होने के साथ साथ Scratch Resistance होते है इसीलिए भी लोग इन्हें बहुत पसंद है, साथ ही इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती.

इतना मजबूत क्यों होता है गोरिल्ला गिलास :
गोरिल्ला गिलास एक लम्बे Chemical Process से होकर गुजरता है इसीलिए ये इतना शक्तिशाली होता है और इसीलिए से Ion Exchange के नाम से भी जाना जाता है.

-    स्टेप 1 : गोरिल्ला गिलास बनाने के लम्बे प्रोसेस में सबसे पहले गिलास को कुछ देर के लिए Molten Potassium Salt के अंदर रखा जाता है, उस वक़्त इसका तापमान 400 Degree Celsius होता है.

-    स्टेप 2 : उसके बाद इसमें पहले छोटे Ion Glass को छोड़ा जाता है और फिर बड़े Potassium Ion ग्लासेज को जो उन छोटे वालों की जगह को भी घेर लेते है और गिलास को मजबूती प्रदान करते है.

-    स्टेप 3 : ये बड़े गिलास आपस में इस तरह चिपक जाते है की मानों कोई सॉलिड मेटल बन गया हो. उसके बाद गिलास को ठंडा होने दिया जाता है.

-    स्टेप 4 : उसके बाद इसकी ऊपर वाली सतह को Compress किया जाता है. इससे सभी Potassium Ion और भी मजबूती से एक दुसरे के साथ मिल जाते है और एक हाई Compressive गिलास तैयार करते है.

गोरिल्ला गिलास के प्रकार :
समय के साथ साथ हर चीज में इम्प्रूवमेंट होता है और ऐसा ही गोरिल्ला गिलास के साथ भी हुआ है और इसकी डेवलपमेंट और इम्प्रूवमेंट के हिसाब से इसे 4 केटेगरी में बात गया है.
Gorilla Glass Kya Hai Aur Ye Kaise Kaam Karta Hai
Gorilla Glass Kya Hai Aur Ye Kaise Kaam Karta Hai
1.       कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 2 ( Corning Gorilla Glass 2 ) : गोरिल्ला गिलास का ये वर्शन सन 2012 में लांच हुआ था और ये पहले वाले गोरिल्ला गिलास से करीब 20% पतला बनाया गया था. माना जाता है कि जितना पतला गिलास होता वो उतना ही ज्यादा Sensitive और Responsive भी होगा मतलब टच करते ही काम करेगा इसीलिए जैसे ही ये मार्किट में आया इसकी डिमांड बढ़ गयी.

2.       कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 3 ( Corning Gorilla Glass 3 ) : जब कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 3 आया तो वो एक नयी तकनीक Native Damage Resistant के साथ आया. ये गोरिल्ला ग्लास डैमेज रेसिस्टेंट होने के साथ साथ, लम्बे समय तक चले वाला, ज्यादा मजबूत और गोरिल्ला गिलास 2 से भी ज्यादा पतला है.

3.       कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 4 ( Corning Gorilla Glass 4 ) : कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 3 में एक नयी चीज ऐड हुयी और वो थी स्क्रैच रेसिस्टेंट. साथ ही इसका ड्राप टेस्ट भी क्या जाता था मतलब कि इसको देखा जाता है कि ये कितनी हाईट से गिरने के बाद टूटेगा. अगर ग्रोथ की बात की जाए तो ये गोरिल्ला गिलास 3 से ज्यादा मजबूत, पतला और durable है.

4.       कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 5 ( Corning Gorilla Glass 5 ) : आज के दौर में अब तक का सबसे लेटेस्ट गोरिल्ला गिलास है कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 5, इसे कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 4 का सक्सेसर भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योकि ये उससे 4 गुना ज्यादा डैमेज रेसिस्टेंट, स्क्रैच रेसिस्टेंट, मजबूत और पतला है. इसके अलावा ये देखने में बहुत आकर्षक भी है जो आपके डिवाइस को एक अच्छी लुक भी देता है.

गोरिल्ला गिलास के फायदे :
-    ये नार्मल गिलास से काफी मजबूत और शक्तिशाली होता है.

-    अगर लेटेस्ट गोरिल्ला गिलास की बात करें तो वो दिखने में आकर्षक भी है.

-    इसको लगाने के बाद डिवाइस पर स्क्रैच नहीं पड़ते और ये डैमेज प्रूफ भी होते है.

-    सामान्य गिलास से पतले होने के कारण ये तेजी से रियेक्ट करते है.

-    इनके अलावा ये ज्यादा हीट को संभाल भी लेते है और उसमें काम भी कर लेते है.
Gorilla Glass Kaise Kaam Karta Hai
Gorilla Glass Kaise Kaam Karta Hai
गोरिल्ला गिलास के नुकसान :
-    जैसाकि हमने बताया कि ये एक लम्बे केमिकल प्रोसेस के बाद तैयार होता है इसलिए इसको बनाने में काफी समय और पैसा खर्च होता है और ये नार्मल गिलास से थोडा मेहंगा आता है.

-    क्योकि ये केमिकल प्रोसेस से तैयार होता है इसलिए इसमें केमिकलस भी होते है.

-    खुद महंगे होने के कारण और इतने ज्यादा फायदे होने के कारण ये सामान्य मोबाइल की कीमत को भी बढ़ा देते है जिसका कुछ कंपनी अपने लाभ के लिए फायदा भी उठाती है.

-    एक ख़ास बात ये स्क्रैच रेसिस्टेंट है स्क्रैच प्रूफ नहीं, मतलब इनपर भी स्क्रैच आ सकते है.

कौन से मटेरियल गोरिल्ला गिलास को नुकसान नहीं पहुंचा सकते :
जब गोरिल्ला गिलास को बनाया जाता है तो उनको एक हार्डनेस स्केल पर नापा जाता है और इन गोरिल्ला गिलास का हार्डनेस स्केल है 6.5. इसलिए इससे कम हार्डनेस स्केल वाले मैटेरियल्स इनको नुकसान नहीं पहुंचा सकते.

हालाँकि जब इन्हें किसी रेतीले इलाके या समुद्री जगह पर ले जाया जाता है तो वहाँ कि मिटटी इसपर स्क्रैच डाल देती है, ऐसा इसलिए क्योकि वहाँ की रेट का हार्डनेस स्केल ज्यादा होता है.

एक्सपेरिमेंट में गड़बड़ी से बना गोरिल्ला गिलास :
जैसे जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स बढे वैसे वैसे गैजेट्स बढे, उनकी स्पीड बढ़ी, साइज़ छोटे होते चले गये लेकिन एक बात जो नोटिस करने वाली है वो ये है कि सभी गैजेट्स की संख्या बढाने पर लगे है और उनको और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे है लेकिन उनकी स्क्रीन प्रोटेक्शन पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा.

लेकिन गोरिल्ला गिलास के बनने की कहानी भी बहुत रोचक है ऐसा इसलिए क्योकि ये किसी साइंस एक्सपेरिमेंट की वजह से नहीं बल्कि एक्सपेरिमेंट की गलती से बना था. सन 1952 में जब एक वैज्ञानिक अपनी लेब में Photosensitive Glass को Furnace में रखकर टेस्ट कर रहा था तो गलती से किसी ने Furnace का तापमान 900 डिग्री कर दिया. ऐसे में सभी को लगा कि एक्सपेरिमेंट खराब हो गया है और जब उन्होंने फर्नेस में देखा तो सब चौक गये क्योकि इतने तापमान की वजह से फर्नेस में गिलास की एक Liquid Sheet बन गयी थी और जैसे ही वो जमीन पर गिरी तो वो टूटने की जगह बाउंस करके लगी.

उस वक़्त किसी ने ये सोचा भी नहीं था कि उनका ये गलत एक्सपेरिमेंट भविष्य में इतनी उन्नत तकनीक मानी जायेगी. इस तकनीक का पहला इस्तेमाल 1 फ़रवरी 2008 में हुआ जब पहला कोर्निंग गोरिल्ला गिलास लांच किया गया. उसके बाद धीरे धीरे इसमें डेवलपमेंट होती गयी और आज हमारे पास कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 5 तक है.
Gorilla Glass ke Fayde Aur Nuksaan
Gorilla Glass ke Fayde Aur Nuksaan
कोर्निंग गोरिल्ला गिलास और इसके काम करने के तरीके के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो.



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