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Jamun ka Ayurved mein Mahatv | जामुन का आयुर्वेद में महत्त्व | Importance of Jambolan in Ayurveda

आयुर्वेदानुसार जामुन का फल हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथा उपयोगी है. जामुन का फल हमारे अनेक दोषों को दूर करता है – 


1.       शक्तिवर्धक  

2.       रूचिकर  

3.       अग्निवर्धक

4.       स्वरशोधक

5.       अतिसार स्तंभक

6.       विषदोषनाशक

7.       वायुकारक

8.       पित्त नाशक

9.       यकृत

10.   दांतों – मसूढ़ों के दोष

11.   रक्तवर्धक

12.    त्वचा रोग

13.    जलन तथा

14.   खांसी   
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 जामुन का आयुर्वेद में महत्त्व
 जामुन का आयुर्वेद में महत्त्व

हमें हमेशा जामुन का पका फल ही खाना चाहिए, कच्चे फल खाने से हमें पाचक संस्थान में घाव भी हो सकता हैं. खाना खाने के बाद जामुन खाना हमारे लिए बहुत ही लाभदायक है परंतु जामुन हमें अधिक नहीं खाना चाहिए इसे हमेशा मत्रानुसार ही खाना चाहिए क्योंकि अधिक खाने से हमें बुखार भी हो सकता है. अगर हम गलती से ज्यादा जामुन खा लें तो हमें देशी आम खाना चाहिए इससे जामुन का कुप्रभाव नहीं होता है.


आयुर्वेदानुसार जामुन के अनेक निम्न औषधीय उपयोग हैं –

1.       खुनी बवासीर – जिन्हें खूनी बवासीर हैं उन्हें जामुन के 10 ग्राम ताजे नरम पत्ते गाय के दूध में घोंटकर, छानकर रोज कुछ दिनों तक पीना चाहिए .


2.       मुंह के छाले – (1)जिनके मुंह में छाले हैं उन्हें जामुन के नरम पत्तों को पीसकर, इसका रस पानी के साथ छानकर कुल्ला करना चाहिए इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं. तथा (2)इसकी छाल या फल से बने हुए काढ़े से कुल्ला करने से भी मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं.


3.       अतिसार – अतिसार रोग होने पर जामुन की छाल का ताजा रस, बकरी के दूध के साथ पीना चाहिए .


4.       आमातिसार – इसमें जामुन तथा आम की गुठली को पीसकर 3 – 3 ग्राम सुबह शाम पानी के साथ पिया जाता हैं इसे पीने से आंव युक्त दस्त होना बंद हो जाता हैं. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
Importance of Jambolan in Ayurveda
Importance of Jambolan in Ayurveda

5.       प्रदर रोग – प्रदर रोग में लोगों को जामुन की हरी तजा छाल छाया में सुखाकर इसे पीसकर सुबह – शाम 4 – 4 ग्राम गाय या बकरी के दूध के साथ खाना चाहिए इसे खाने से प्रदर रोग ख़त्म हो जाता हैं.


6.       मसूढ़े – (1)मसूढ़ों को मजबूत रखने के लिए व मुंह की बदबू के लिए हमें इसके पत्तों का रस गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करना चाहिए तथा (2)इसके पत्तों को जलाकर राख करके और पीसकर मसूढ़ों पर मलना चाहिए. इससे मसूढ़े मजबूत बनते हैं.


7.       पायरिया – पायरिया से बचने के लिए हमे जामुन की हरी छाल का पेस्ट बनाकर उसे दांतों पर मलना चाहिए .


8.       बहुमूत्र – (1)बार – बार पेशाब आने पर जामुन की गुठली को पीसकर 4 – 4 ग्राम सुबह शाम 100 ग्राम ताजे पानी के साथ 20 दिन तक लगातार पीना चाहिए इसे पीने से बार – बार पेशाब आना बंद हो जाता हैं. (2)बार – बार पेशाब आने पर जामुन की छाल को पीसकर 2 - 2 ग्राम सुबह – शाम पानी के साथ लेने से बार – बार पेशाब आना बंद हो जाता है. 


9.       पैर का छाला – पैर पर छाले होने पर जामुन की गुठली को पानी में घिसकर लगाना चाहिए .


10.   कैसे भी दस्त – अगर हमें किसी भी प्रकार का दस्त हो तो जामुन व आम की गुठली तथा सौंफ और गुलाब के फूल को पीसकर 2 – 2 चम्मच छाछ के साथ लेना हमारे लिए बहुत लाभदायक होता है.


11.   मुंहासे – जामुन की गुठली को सुखाकर उसे पीसकर एवं दूध में मिलाकर मुंहासों पर लगाने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं.
 
Jamun ka Ayurved mein Mahatv
Jamun ka Ayurved mein Mahatv

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