इस वेबसाइट पर किसी भी तरह के विज्ञापन देने के लिए जरूर CONTACT करें. EMAIL - info@jagrantoday.com

SUBSCRIBE FOR ALL SCIENCE EXPERIMENTS. KIDS AND YOUNG STUDENTS CAN LEARN BETTER FROM THESE PRACTICAL EXPERIMENTS OF SCIENCE:


https://www.youtube.com/channel/UCcXJEycifFbZEOS2PHNAZ9Q

विज्ञानं की सभी ज्ञानवर्धक प्रक्टिकाल्स के लिए अभी सब्सक्राइब करें दिए गये इस चैनल को

Daanton mein Filling Kyo Hai Jruri | दांतों में फीलिंग क्यों है जरूरी | What is the Need of Filling in Teeth

क्या है फिलिंग ( What is Filling )
वे व्यक्ति जिनके दांतों में दर्द रहता है, मसूड़ों में से पस आती है, दांतों में खट्टा मीठा गर्म ठंडा लगा रहता है, खाते वक़्त कुछ महसूस नहीं होता जैसी समस्या है तो उनके दांतों में एक समय ऐसा आ जाता है कि उन्हें रूट कनाल ट्रीटमेंट कराना पड़ता है. किन्तु अगर समय पर ही फिलिंग करा ली जाएँ तो रूट कनाल उपचार की आवश्यकता ही नहीं आती. इस तरह फिलिंग ख़ास हो जाती है. किन्तु फिलिंग के भी कुछ प्रकार होते है जो निम्नलिखित है. CLICK HERE TO KNOW अब खुद रिपेयर होंगे डैमेज दांत ... 
Daanton mein Filling Kyo Hai Jruri
Daanton mein Filling Kyo Hai Jruri
1.                        अस्थायी फिलिंग ( Temporary Filling ) : जब दांतों में थोड़ी कैविटी बन जाएँ, दांतों में बार बार दर्द होता रहे और दांतों की सेंसिटिविटी बंद हो जाएँ तो आप अस्थायी फिलिंग कराएँ. जबकि इस स्थित के बढ़ जाने पर अर्थात अधिक कैविटी होने पर और हर समय दर्द रहने पर आप स्थायी फिलिंग ( Permanent Filling ) कराएं.

2.                        सिल्वर फिलिंग ( Silver Filling ) : अक्सर ये फिलिंग तब की जाती है जब दांतों में कीड़ा लग जाए या दांतों में कोई गड्डा बन जाएँ. इस अवस्था में सबसे पहले उस कीड़े को बाहर निकाला जाता है फिर टिन, कॉपर और सिल्वर को मरकरी में मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है और उसे दांतों में भरा जाता है. सीवर फिलिंग के इस मिश्रण को एमैल्गम ( Malgm ) भी कहा जाता है. इस बात में ये सुनिश्चित किया जाता है कि मिश्रण जड़ तक पहुंचे ताकि बाद में उस तरफ की जाड और दांत से खाना खाते वक़्त दर्द ना हो. आप सिल्वर फिलिंग के 1 दिन बाद उस दांत का खाने के लिए इस्तेमाल कर पाते हो, साथ ही ये फिलिंग बाकी की सभी फिलिंग से सस्ता और टिकाऊ होता है.

नुकसान ( Harms ) : जहाँ इसके फायदे है वहीँ इस फिलिंग के नुकसान भी है. कहने का अर्थ है कि इसके लीक होने व इसमें जंग लगने का ख़तरा बना रहता है. कुछ दिनों के बाद इसका रंग बदलकर काला या ग्रे हो जाता है जो दिखने में बहुत बुरा लगता है. CLICK HERE TO KNOW दांतों की बेहतरी का रखें ख्याल ... 
दांतों में फीलिंग क्यों है जरूरी
दांतों में फीलिंग क्यों है जरूरी
3.                        कम्पोजिट फिलिंग ( Composite Filling ) : इस फीलिंग की ख़ास बात ये होती है कि इसका मिश्रण इस तरह तैयार किया जाता है कि वो दांतों की तरह दिखें और इसीलिए इस फिलिंग को Tooth Colored Filling या Cosmetic फिलिंग भी कहा जाता है. साथ ही इसे तैयार करने के लिए भी लाइट या बॉन्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.

इसकी शुरुआत कैविटी को काटकर की जाती है, उसके बाद दांतों की सतह को खुरदरा किया जाता है जिसके लिए फ़ास्फ़रोस एसिड का इस्तेमाल होता है. दांतों को खुरदरा करने के दो कारण है पहला ये मिश्रण और दांतों के बीच घर्षण बनाता है जिससे मिश्रण अलग नहीं होता दूसरा इससे दांतों का एरिया बढ़ता है. दांतों के खुरदरा होने के बाद इसमें फिलिंग को थोड़ी थोड़ी मात्रा में कई बार डाला जाता है. हर बार फिलिंग डालने के बाद 30 सेकंड तक उसपर LED लाइट गन की नीली रौशनी डाली जाती है ताकि फिलिंग पकी हो सके. अंत में फिलिंग की पोलिश की जाती है और उसे दांतों का आकार दिया जाता है. इसका एक लाभ ये भी है कि आप फीलिंग के तुरंत बाद कुछ भी खा या पी सकते हो. इस फिलिंग को देखने पर ऐसा लगता है कि आपके दांतों में कोई फिलिंग नहीं है इसका कारण इसका रंग है.

नुकसान ( Harms ) : इस फिलिंग में भी कुछ हानियाँ है जैसेकि इसको बच्चों में नहीं किया जा सकता, ये उन्ही दांतों में होती है जिनसे आप खाने को चबाते हो और अगर फिलिंग कराते वक़्त आपके दांतों में गीलापन है तो ये फिलिंग और इसमें भरा मटेरियल निकल जाता है.
What is the Need of Filling in Teeth
What is the Need of Filling in Teeth
4.                        GIC फिलिंग ( GIC Filling ) : GIC से तात्पर्य Glass Ionomer Cement Filling से है. इसको तब किया जाता है जब दांतों में सेंसेटिव बढ़ जाती है. साथ ही इसे बच्चों या बड़ों किसी में भी किया जा सकता है. इसका वजन बहुत कम होता है जिसका कारण इसमें पाया जाने वाला पदार्थ सिलिका है. इस फिलिंग के हल्का होने के कारण इसे चबाने वाले दांतों में नहीं किया जा सकता. साथ ही ध्यान रखें कि एक बार फिलिंग कराने के 1 घंटे बाद तक आप कुछ नहीं खा सकते. इसको कराने के 2 तरीके है पहला तो सेल्फ क्योर और दुसरा लाइट क्योर. इसका सबसे बड़ा लाभ ये है कि एक बार ये फिलिंग कराने के बाद दांतों में कीड़ा नहीं लगता और यही इसे एक Preventive Filling नाम भी दिलाती है.

नुकसान ( Harms ) : ये दिखने में तो सफ़ेद ही होती है किन्तु इसका रंग दांतों से नहीं मिलता जिस कारण ये दांतों में अजीब और भद्दी लगने लगती है. इसके अलावा इस फिलिंग को सभी दांतों में भी नहीं भरा जा सकता, इसका कारण इसका अधिक मजबूत ना होना है. किन्तु अब इस फिलिंग में दांतों के अलग अलग रंग आने लगे है. 

फिलिंग के निकलने के कारण ( Causes that makes Filling Comes Out ) :
-       अगर फिलिंग को जड़ तक ना भरा गया हो तो उसे पूरा सहारा नहीं मिलता और वो निकल जाती है.
दांत भरने के तरीके
दांत भरने के तरीके
-       वहीँ फिलिंग में सही मटेरियल और उसे भरने के लिए सही तकनीक का इस्तेमाल भी जरूरी है अन्यथा फिलिंग तुरंत निकल जायेगी.

-       दांतों का सुखा रहना फिलिंग कराने के लिए अति आवश्यक है क्योकि ये फिलिंग और दांत के बीच घर्षण बनायें रखता है.

-       माइक्रो लीकेज के कारण, ऐसा मुख्यतः तभी होता है जब फिलिंग और दांतों के बीच कोई जगह रह गयी हो.

-       कैविटी का आकार और आकृति का सही ना होना भी फिलिंग के निकलने का कारण बन सकती है. साथ ही कैविटी अधिक बड़ी हो तो उसे भरना बहुत मुश्किल होता है.

दांतों में फिलिंग के प्रकारों और फिलिंग कराने की विधि लाभ हानि इत्यादि के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
Temporary Composite Filling
Temporary Composite Filling

Dear Visitors, आप जिस विषय को भी Search या तलाश रहे है अगर वो आपको नहीं मिला या अधुरा मिला है या मिला है लेकिन कोई कमी है तो तुरंत निचे कमेंट डाल कर सूचित करें, आपको तुरंत सही और सटीक सुचना आपके इच्छित विषय से सम्बंधित दी जाएगी.


इस तरह के व्यवहार के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !


प्रार्थनीय
जागरण टुडे टीम

No comments:

Post a Comment

ALL TIME HOT