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Shani Dev ke Naam se bhi Darte Hai Log | शनि देव के नाम से भी डरते है लोग | People Afraid by the Name of Lord God Shani Dev

शनिदेव ( Shani Dev )
शनिदेव सूर्य के पुत्र होने के साथ साथ न्याय के देवता भी है. जब वे न्याय करते है तो किसी तरह का पक्षपात नहीं करते फिर चाहे उनके सामने कोई आमिर व्यक्ति हो या गरीब या फिर कोई अन्य देवता ही क्यों ना हो, उनकी यही खासियत उन्हें देवताओं में विशेष और श्रेष्ठ स्थान दिलाती है. साथ ही उनका न्याय भी दोष के सही अनुपात में ही होता है किन्तु जब वे किसी से रुष्ट हो जाते है तो उस व्यक्ति को उनकी साढ़े साती से कोई नही बचा पाता. CLICK HERE TO KNOW शनि देव जी की स्त्री रूप धारण कथा ... 
Shani Dev ke Naam se bhi Darte Hai Log
Shani Dev ke Naam se bhi Darte Hai Log
साढ़े साती शनि देव को वो दशा है जो दोषी का 7 सालों तक और उसकी हालत को बद से बदतर तक कर देती है. मात्र हनुमान भक्त ही ऐसे है जिनपर शनिदेव की साढ़े साती का कोई प्रभाव नहीं पड़ता. इसके पीछे भी एक कहानी है जहाँ शनिदेव ने हनुमान को डराने का प्रयत्न किया था किन्तु उन्हें खुद ही मुहँ की खानी पड़ी थी. अब कहानी की बात हो ही गयी है तो चलो आपको शनिदेव और हनुमान जी की इस कहानी से अवगत कराते है.

शनिदेव हनुमान कथा ( Story of God Hanuman and Shanidev ) :
पवनपुत्र महाबली महा पराक्रमी हनुमान जी को अमरता का वरदान है, वे रोजाना रघुकुल के राजकुमारों को उनके कहने पर अपनी आत्मकथा का भाग सुनाते थे. एक भाग के अनुसार उन्होंने कुमारों की बताया कि एक दिन वे शाम के समय कर रहे थे कि तभी वहां पर शनि देव जी ( जिन्हें पाप ग्रह और मंद गति वाला सूर्य पुत्र भी माना जाता है ) आ गए. हनुमान जी बताते है कि उनका रंग अत्यंत कृष्ण था और वे भीषण प्रतीत हो रहे थे. वे हमेशा अपने सिर को झुकाकर ही चलते और बात करते थे ताकि किसी पर उनकी तीव्र और घातक दृष्टि ना पड जाए क्योकि जिस पर उनकी दृष्टि पड़ती है उसका विनाश निश्चित होता है. CLICK HERE TO KNOW शनि दोष और उसके ज्योतिषी उपाय ... 
शनि देव के नाम से भी डरते है लोग
शनि देव के नाम से भी डरते है लोग
उस वक़्त शनि देव जी महाबली हनुमान के पराक्रम से अनभिज्ञ थे, तब शनिदेव ने उन्हें कर्कश लेकिन विनम्र आवाज में कहा कि सावधान हनुमान, ये त्रेता युग नहीं बल्कि कलियुग है क्योकि जिस क्षण भगवान विष्णु जी के अवतार श्री राम की लीला समाप्त हुई उसी समय से इस धरा पर कलि का प्रभुत्व स्थापित हो गया था. शनिदेव बताते है कि कलियुग होने के कारण उनका शरीर इस युग में पहले से अधिक बलवान हो जाएगा जबकि हनुमान जी दुर्बल हो जायेंगे और शनिदेव की साढ़े साती का प्रभाव हनुमान पर बढ़ जाएगा. उन्होंने हनुमान जी को चेतावनी दी की मैं आपके शरीर पर आने वाला हूँ.

यहीं शनिदेव जी ने गलती कर दी, उनको इस बात का बिलकुल भान नहीं था कि भगवान रघुनाथ विष्णु जी के चरणों पर किसी काल का बंधन नहीं होता है, वे जब किसी के हृदय में पल भर के लिए भी आ जाते है तो वहाँ काल की कला का कोई प्रभाव नहीं रहता. वे ही सभी का संचालन पोषण और नियंत्रण करते है और जो उनकी सेवा करता है उनकी तरफ ना तो कोई सुर और ना ही असुर आँख उठाने का साहस कर पाता है. शनिदेव के बड़े भाई यमदेव तक प्रभु विष्णु के भक्तों की तरफ बुरी दृष्टि डालने की हिम्मत नहीं कर पाते.
People Afraid by the Name of Lord God Shani Dev
People Afraid by the Name of Lord God Shani Dev
तब हनुमान जी ने प्रयत्न किया कि शनिदेव जी को किसी तरह समझाया जाए और उन्हें किसी अन्य के पास भेजा जाये. वे जानते थे कि हर ग्रह का प्रभाव धरती पर रहने वाले पर व्यक्ति पर पड़ता है. हनुमान जी ने उन्हें कहा कि जो प्रभु का स्मरण नहीं करते आप उनके पास जाए क्योकि उन्ही पर आपकी दृष्टि का प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि आप जाएँ और मुझे मेरे प्रभु की अराधना करने दें.

ऐसे में शनिदेव जी भी बोल पड़े कि मैं भी सृष्टि के विधान से बंधा हुआ हूँ और क्योकि आप भी अब धरती पर निवास करते है तो आप पर भी मुझे अपनी साढ़े साती डालनी ही होगी. ऐसा इसलिए है क्योकि हर साढ़े 22 साल की समाप्ति पर साढ़े 7 साल के अंतर से 2 ½ सालों के लिए मेरी दृष्टि का प्रभाव हर व्यक्ति पर अवश्य पड़ता है. शनिदेव जी ने कहा कि मेरी साढ़े साती का प्रभाव आप पर आज और इसी वक्त से प्रभावी हो रहा है और आप इसे टाल भी नहीं पाओगे.
हुनमान भक्त क्यों रहते है साढ़े साती से मुक्त
हुनमान भक्त क्यों रहते है साढ़े साती से मुक्त
अब हनुमान जी ने कहा कि मैं तो वृद्ध हो चुका हूँ तो अच्छा होता कि आप मुझे छोड़ देते लेकिन अगर आप मुझपर आना ही चाहते है तो आप आ सकते है. इसपर शनिदेव जी ने उत्तर दिया कि इस युग में धरती पर ना ही किसी को देवता रहना चाहियें और ना ही उपदेवता सभी को अपना आवास सूक्ष्म लोकों में स्थापित करना चाहियें जो  भी धरती के सम्पर्क में रहेगा उसपर मेरा प्रभाव अवश्य पड़ेगा और पीड़ा भोगनी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि मैं ( शनिदेव ) मुख्य मारक ग्रह भी हूँ और मुझे मेरे बड़े भाई में मृत्यु का कार्य दिया है, वैसे भी वृद्ध लोग मृत्यु के काफी करीब होते है तो मैं वृद्ध लोगों को तो बिलकुल नहीं छोड़ सकता.

अब हनुमान जी उनसे पूछते है कि वे उनके शरीर पर कहाँ वास करेंगे तब शनिदेव जी ने कहा कि पहले ढाई साल तो मैं आपके मस्तिष्क पर रहूँगा क्योकि वहीँ से मैं सभी की बुद्धि को विचलित कर सकता हूँ, अगले ढाई साल मैं आपके पेट में वास करूँगा ताकि आपको अस्वस्थ कर सकूं और बाकी के ढाई साल मैं आपके पैरों में रहकर आपको आपके मार्ग से विमुख करता रहूँगा. इतना कहते ही शनिदेव हनुमान जी के मस्तिष्क पर विराजमान हो गये. उनके बैठते ही हनुमान जी को सिर में खुजा होने लगी. जिसे खत्म करने के लिए उन्होंने एक बड़ा पर्वत लिया और उसे अपने सिर पर रख लिया.
Shani Dev par Tel Kyo Chadhaya Jata Hai
Shani Dev par Tel Kyo Chadhaya Jata Hai
ये पर्वत शनिदेव को अपने नीचे दबा लेता है और वे चिल्लाते है कि हनुमान आप ये क्या कर रहे हो? हनुमान जी ने कहा कि जिस प्रकार आप अपने कर्तव्य से बंधे है वैसे ही मैं अपने स्वभाव से बंधा हुआ हूँ और मेरे स्वभाव के अनुसार मैं ( वानर ) इसी तरह अपनी खुजा को मिटाता हूँ. इसलिए आप अपने कार्य को करते रहें और मुझे मेरा कार्य करने दें. हनुमान जी ने इतना कहा नहीं कि उन्होंने दुसरा पर्वत भी उठाया और उसे भी आपने सिर पर रख लिया.

अब शनिदेव जी से सहा नहीं गया और उन्होंने हनुमान जी से कहा कि आप इन पर्वतों को नीचे उतार लें मैं आपके साथ संधि करना चाहता है. लेकिन अब हनुमान जी कहाँ मानने वाले थे उन्होंने तीसरा पर्वत भी उठाया और उसे भी सिर पर धर दिया. अब शनिदेव चिलायें कि मुझे छोड़ दो मैं कभी भी आपके पास नहीं आऊंगा. लेकिन हनुमान जी को अपनी खुजा मिटानी थी तो उन्होंने एक और पर्वत अपने सिर पर रख लिया. बस अब शनिदेव जी पीड़ा से बोले हे पवन पुत्र हनुमान !

त्राहि माम त्राहि माम ! रामदूत ! आंजनेयाय नमः

मैं आज के बाद उसको भी नहीं सताऊंगा जो आपकी पूजा या आपका स्मरण करेंगे, कृप्या आप मुझे जाने दें. अब हनुमान जी ने थोडा सा मजाक करते हुआ कहा कि शनि महाराज जी आप तो बड़ी शीघ्र ही थक गये और भागने का विचार कर रहें है, अभी तो मैं पांचवा पर्वत भी रखने वाला हूँ. तभी शनिदेव अपने प्राण बचाकर उनके पैरों में गिर पड़े और उन्हें क्षमा मांगी और कहा कि वे सैदव उन्हें दिए हुए वचनों का पालन करेंगे.
Shrir ke Kis Hisse ko Prabhavit Karti hai Shani ki Saadhe Saati
Shrir ke Kis Hisse ko Prabhavit Karti hai Shani ki Saadhe Saati
इसके बाद शनिदेव जी अपने घावों पर तेल लगाने के लिए हुनमान जी से तेल मांगने लगे, लेकिन अब हनुमान जी उन्हें तेल कहाँ से देते और इसीलिए आज तक सभी शनिदेव जी पर तेलदान करते है. इसीलिए कहा जाता है कि जो भी शनिदेव जी के प्रभाव से खुद को बचना चाहते है उन्हें हनुमान जी की पूजा अर्चना पुरे मन से करनी चाहियें. घर से सभी कष्टों को दूर रखने के लिए घर में बजरंग बाण का रोजाना पाठ आवश्यक है क्योकि ये हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा को घर से बाहर करता है और घर में सुख समृद्धि शान्ति वास करने लगती है.

हनुमान जी और शनिदेव जी की ऐसी ही अन्य रोचक कथाओं व कहानियों को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
Shanidev Hanumaan Rochak Kathayen
Shanidev Hanumaan Rochak Kathayen

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