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Kya Sach mein Formatting System ki Life Kam Karti Hai | क्या सच में फ़ॉर्मेटिंग सिस्टम की लाइफ कम करती है

फ़ॉर्मेटिंग ( Formatting )
दोस्तों कभी कभी हमारे स्मार्टफोन, मेमोरी कार्ड, पेन ड्राइव, टेबलेट या कंप्यूटर हार्ड ड्राइव में कुछ वायरस या मैलवेयर आ जाते है या इतना ज्यादा डाटा स्टोर हो जाता है कि आपका डिवाइस धीमा पड़ जाता है और अच्छी तरह काम नहीं करता ऐसे में आपने भी कभी ना कभी इन सभी को फोर्मेट जरुर किया होगा. लेकिन लोगों में फ़ॉर्मेटिंग से जुडी बहुत सी गलत धारणाएं होती है जिनके बारे में आज हम बात करेंगे और उन्हें दूर करेंगे. लेकिन उससे पहले जान लेते है कि फ़ॉर्मेटिंग है क्या?

फोर्मेगिंग क्या है? :
फ़ॉर्मेटिंग का सीधा सीधा मतलब है किसी चीज को खाली या साफ़ करना. जैसेकि अगर आप किसी पेज पर कुछ लिखना चाहते हो तो आप चाहोगे कि पेज पूरी तरह खाली और साफ हो नाकि उसपर कुछ लिखा हुआ. ठीक ऐसा ही फ़ॉर्मेटिंग के साथ है, जो आपके हार्ड ड्राइव, स्मार्टफोन मेमोरी, पेन ड्राइव्स या टेबलेट्स को खाली कर देता है और उसे साफ़ कर देता है ताकि आप उसपर दोबारा से कुछ और अच्छी तरह और अपनी मर्जी से स्टोर कर सको. फ़ॉर्मेटिंग आपके सिस्टम को पूरी तरह क्लीन और ब्रैंड न्यू बना देती है जिसे आप एक बार फिर शुरुआत से यूज कर पाते हो. CLICK HERE TO KNOW क्रिप्टोजैकिंग कैसे आपके मोबाइल और कंप्यूटर की बैटरी का इस्तेमाल करती है ...
क्या सच में फ़ॉर्मेटिंग सिस्टम की लाइफ कम करती है
क्या सच में फ़ॉर्मेटिंग सिस्टम की लाइफ कम करती है
फ़ॉर्मेटिंग से जुड़े मिथक :
1.       सारा डाटा डिलीट हो गया : फ़ॉर्मेटिंग से जुडा सबसे पहला और सबसे बड़ा मिथक ये है कि जब भी हम फ़ॉर्मेटिंग करते है तो उससे हमारा सारा डाटा डिलीट हो जाता है. लेकिन ये गलत है. जी हाँ, चाहे आपने अपने फ़ोन को फॉर्मेट किया हो, कंप्यूटर को फॉर्मेट किया हो या पेन ड्राइव्स को, उसमें स्टोर डाटा फ़ॉर्मेटिंग के बाद भी वहीँ का वहीँ रहता है. ऐसा इसलिए क्योकि फ़ॉर्मेटिंग उस देता की सिर्फ इंडेक्सिंग को डिलीट करती है नाकि डाटा को.

इंडेक्सिंग से मतलब उसस रस्ते से है जो ये बताता है कि कोई डाटा कौन से ड्राइव में या कौन से फोल्डर में सेव है. फ़ॉर्मेटिंग सिर्फ इस इंडेक्सिंग को डिलीट करती है. जबकि सारा डाटा वैसे का वैसा अपनी जगह पर स्टोर ही रहता है. और ऐसा तब तक रहता है जब तक की आप उस जगह पर किसी दुसरे डाटा को स्टोर ना कर दें.

2.       फ़ॉर्मेटिंग से डिवाइस या सिस्टम की लाइफ खत्म हो जाती है : फ़ॉर्मेटिंग को लेकर दूसरी गलत धारणा ये है कि फ़ॉर्मेटिंग आपके डिवाइस की लाइफ खत्म कर देता है. मतलब अगर आप अपनी हार्ड डिस्क को फॉर्मेट करते हो तो वो जल्दी खराब हो जायेगी इसलिए कभी भी अपने हार्ड ड्राइव को बार बार फॉर्मेट न करें. लेकिन ये भी गलत है क्योकि आप अपने सिस्टम, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड या हार्ड डिस्क को कितनी भी बार फॉर्मेट क्यों ना करें इसका आपके सिस्टम पर कोई भी गलत असर नहीं पड़ता है.
Kya Sach mein Formatting System ki Life Kam Karti Hai
Kya Sach mein Formatting System ki Life Kam Karti Hai
ये आपकी रिक्वायरमेंट है कि आप अपने सिस्टम को फॉर्मेट करना चाहते हो या नहीं. इससे आपके डिवाइस की लाइफ को कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला है. लेकिन हाँ आप फ़ॉर्मेटिंग को लास्ट आप्शन पर ही इस्तेमाल करें तो बेहतर है क्योकि फ़ॉर्मेटिंग के बाद आपको दोबारा से डाटा डाउनलोड करना पड़ेगा, अगर फ़ोन फॉर्मेट किया है तो सभी एप्लीकेशन को फिर से इनस्टॉल करना पड़ेगा, सॉफ्टवेर इनस्टॉल करने पड़ेंगे और सारी सेटिंग दोबारा से करनी पड़ेगी. अगर आपके पास इतना टाइम है तो आप दिन में 10 बार भी फ़ॉर्मेटिंग करें तो भी कोई प्रॉब्लम नहीं है.

फ़ॉर्मेटिंग के बाद डाटा रिकवर किया जा सकता है? :
जी हाँ, फ़ॉर्मेटिंग के बाद जब तक आप अपने सिस्टम में कुछ और स्टोर नहीं करते हो तो उस सिस्टम में स्टोर डाटा को रिकवर करना बहुत सिंपल होता है, जिसके लिए आपको कोई राकेट साइंस लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए अगर आप भी कभी गलती से अपने किसी सिस्टम को फोर्मेट कर देते हो और उसके डाटा को वापस पाना चाहते हो तो आप कुछ रिकवरी टूल्स को इस्तेमाल करके अपने डाटा को रिकवर कर सकते हो.

वहीं अगर आप हमेशा के लिए अपने डाटा को मिटाना चाहते हो तो उसके लिए भी आप कुछ टूल्स या एप्पस यूज कर सकते हो और ऐसा आप तब करते हो जब आप अपना सिस्टम या फ़ोन किसी और को बेच रहे हो. ऐसे में डाटा को परमानेंटली डिलीट करने से उसको आपका डाटा नहीं मिलता है.

कब करनी चाहियें फ़ॉर्मेटिंग :
जब आपको ये महसूस होने लगे कि आपने अपने कंप्यूटर या मोबाइल में बहुत सारा डाटा डाउनलोड कर लिया है या बहुत सारी एप्लीकेशन इनस्टॉल कर ली है और आपको खुद ही समझ नहीं आ रहा कि कहाँ क्या चल रहा है तो आप अपने सिस्टम को फॉर्मेट कर लें.

या फिर अगर आपका डिवाइस अच्छे से काम करना बंद कर दें, आप स्टोर की हुई डाटा को ना तो रीड कर पायें और ना ही उसी राईट कर पा रहे हो तो भी आपको अपने सिस्टम या डिवाइस को फॉर्मेट कर लेना चाहियें.

इसके अलावा आपने हार्ड ड्राइव्स में बैड सेक्टर के बन जाने, वायरस या मैलवेयर आ जाने पर भी आप अपने सिस्टम को फॉर्मेट कर सकते हो.

ऐसे में फ़ॉर्मेटिंग करने से ये सभी बैड फैक्टर्स आपके सिस्टम से दूर हो जाते है और आपको एक फ्रेश सिस्टम मिलता है जहाँ आप दोबारा से अपना काम शुरु कर पाते हो. हाँ आपका डाटा जरुर चला जाता है. तो अब आपको समझ आ गया होगी कि फ़ॉर्मेटिंग क्या है और ये कैसे काम करती है, वैसे फ़ॉर्मेटिंग का कांसेप्ट बहुत ही सिंपल है.
Formatting se Jude Mithak
Formatting se Jude Mithak
फ़ॉर्मेटिंग से जुड़े अन्य मिथक और सवालों के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो.



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