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Chumbak Chikitsa ke Prakar | चुम्बक चिकित्सा के प्रकार | Type of Magnetic Therapy

चुम्बक चिकित्सा ( Magnetic Therapy )
हर रोग के लिए भिन्न भिन्न प्रकार की चिकित्सा प्रणालियों को अपनाया जाता है. उन्ही में से एक चाय चुम्बक चिकित्सा प्राणाली. चुम्बक के बारे में तो सभी जानते है ये आकर्षण का कार्य करती है और लोहे या अपने से विषम चुम्बकीय ध्रुव की तरफ आकर्षित होती है. इसके इसी गुण से चिकित्सक रोगों का उपचार करते है. वैसे देखा जाएँ तो इस पुरे ब्रहमांड का आधार भी चुम्बकीय तत्व ही है. क्योकि यही शक्ति सभी ग्रहों, उपग्रहों, सूर्य इत्यादि को उनकी धुरी पर बांधे रखती है और उनको सुचारू रूप से गति प्रदान करती है. अगर ये ना हो तो ब्रहमांड में कुछ भी अपने स्थान पर होता ही नहीं और क्योकि हम भी ब्रहमांड का ही हिस्सा है तो ये हमारे जीवन पर भी एक गहरा असर डालता है. 

मानव शरीर में चुम्बकीय तत्व ( Magnetic Power In Humans )  :
अगर देखा जाएँ तो हमारा शरीर भी चुम्बकीय तत्व की तरफ ही इशारा करता है और जिस प्रकार चुम्बक में 2 ध्रुव होते है ठीक उसी प्रकार जब एक व्यक्ति खड़ा होता है तो उसके सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिण ध्रुव के रूप में देखा जाता है.  CLICK HERE TO KNOW चुम्बकीय चिकित्सा से रोगों का इलाज ...
Chumbak Chikitsa ke Prakar
Chumbak Chikitsa ke Prakar
वहीँ अगर व्यक्ति लेट जाएँ तो दाये हाथ की तरफ का अंग होता है उत्तरी ध्रुव और उसके विपरीत बाये तरफ का हिस्सा दक्षिणी ध्रुव कहलाता है. 

बैठने वाली अवस्था में शरीर का आगे का हिस्सा जिसमें माथा, छाती व पेट इत्यादि आते है वो उत्तरी ध्रुव और पीछे का हिस्सा जिसमें रीढ़ की हड्डी इत्यादि आते है उसे दक्षिणी ध्रुव कहते है. 

इस चुम्बकीय शक्ति की वजह से ही हम हर अवस्था में खुद को संतुलित पाते है. किन्तु सोते वक़्त हम इसका ध्यान नहीं रखते, जिसकी वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसलिए जब भी आप सोने जाएँ तो सिर पूर्व दिशा में करके ही सोयें. इस तरह आपके पैर अपने आप पश्चिम दिशा की तरफ हो जाते है और आपको अच्छी नींद आती है. 

मनुष्य एक अन्य तरह से भी चुम्बकीय तत्व को दर्शाता है, जिसमें वो चुम्बक की तरफ अपने से विपरीत लिंग की तरफ आकर्षित होता है और उसे पसंद या ना पसंद करने लगता है. ये बात थी चुम्बकीय तत्व के जीवन में स्थान की. अब बात करते है चुम्बकीय चिकित्सा की. CLICK HERE TO KNOW चुम्बकीय पानी कैसे बनायें ... 
चुम्बक चिकित्सा के प्रकार
चुम्बक चिकित्सा के प्रकार
चुम्बकीय चिकित्सा के प्रकार ( Type of Magnetic Therapy ) :
चुम्बकीय चिकित्सा के मुख्यतः दो प्रकार होते है
 
1.अंग विशेष का उपचार ( Organ Specific Treatment )

2.सामान्य उपचार ( General Treatment )

अंग विशेष का उपचार ( Organ Specific Treatment ) :
इसमें सिर्फ शरीर के उस अंग का उपचार किया जाता है जिसमें समस्या होती है. इसमें ध्रुवों का मुख्य ध्यान रखा जाता है और देखा जाता है कि अगर रोग कीटाणुओं के कारण हो रहा है तो उस तरफ चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को रखा जाये. वहीँ अगर रोगी को सुजन या घाव इत्यादि है तो दर्द वाले हिस्से पर चुम्बक नहीं रखी जाती बल्कि दर्द के बिलकुल साथ जहाँ दर्द का पता नहीं लगता वहाँ रखी जाती है. साथ ही चुम्बक को चमड़ी पर रखा जाता है नाकि कपडे में लपेटकर.

यदि ऐसी अवस्था आती है जहाँ चुम्बक के दोनों ध्रुवों का प्रयोग आवश्यक है तो उस स्थिति में दोनों  ध्रुवों को कुछ दुरी पर रख दिया जाता है. जिससे दोनों ध्रुव एक दुसरे की तरफ आकर्षित होते है और बीच में उनकी ऊर्जा घाव को ठीक कर देती है. 

सामान्य उपचार ( General Treatment ) :
चुम्बकीय चिकित्सा की दूसरी पद्धति में सामान्य रूप से उपचार किया जाता है या यूँ कहें कि जब रोगी का पूरा शरीर ही रोग ग्रस्त हो तब ये प्रणाली अपनाई जाती है. इस स्थिति में रोगी के दोनों तलवों या फिर हथेलियों पर चुम्बक रख दी जाती है. अब आप ये सोच रहे होगे कि हथेलियों और तलवों पर ही चुम्बक क्यों रखी जाती है? इसका कारण ये है कि शरीर के ये दोनों अंग मस्तिष्क और हृद्य से जुड़े होते है. हृदय से जुड़े होने की कारण इनसे पैदा होने वाली ऊर्जा रक्तवाहिनियों के जरिये पुरे शरीर में पहुँचती है और पूरा शरीर प्रभावित होता है. 
Type of Magnetic Therapy

Type of Magnetic Therapy
इसके बाद अगला सवाल ये आता है कि किस वक़्त चुम्बक को हथेलियों या तलवों पर रखना चाहियें? साथ ही ये भी ध्यान रखना पड़ता है कि किस हथेली या तलवे पर चुम्बक का कौन सा ध्रुव होना सही रहता है?

इसका जवाब आसान है. अगर रोग शरीर के ऊपर वाले हिस्से में हो तो हथेलियों पर चुम्बक रखें, वहीँ अगर रोग शरीर के निचले हिस्से में है तो तलवों पर चुम्बक रखना उचित माना जाता है और यदि पूरा शरीर ही रोगग्रस्त है तो एक दिन हथेलियों में तो दुसरे दिन तलवों में चुम्बक रखें. 

चुम्बकीय ऊर्जा मुख्य रूप से स्नायु तंत्र, पाचन तंत्र, रक्त संचार, श्वसन तंत्र, मल मूत्र तंत्र और प्रजनन तंत्र को संतुलित और रोगमुक्त रखती है. अगर ये सभी सही रूप से कार्य करती रहती है तो कोई व्यक्ति स्वस्थ रहता है और उसे कोई रोग नहीं होता.  

तो इस तरह चुम्बकीय चिकित्सा रोगों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती है. चुम्बकीय चिकित्सा के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो.
अंग विशेष व सामान्य उपचार
अंग विशेष व सामान्य उपचार

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1 comment:

  1. मेरे पास एक चुम्बक हे, मै उस चुम्बक को एक हाथ में रखकर उपचार करने के पश्चात दूसरे हाथ में रखकर उपचार कर सकता हूं या नहीं।

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