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Amangalkaari Raahu ke Mangalkaari Yog | अमंगलकारी राहू के मंगलकारी योग | Inauspicious Rahu with Auspicious Good Effect

राहू के शुभ योग ( Auspicious Effects of Rahu in Horoscope )
राहू एक शक्तिशाली राक्षस था जिसने समुद्र मंथन में धोखे से अमृत पान कर खुद को अमर बनाया और यही कारण है कि आज वो सभी ग्रहों में एक अहम स्थान रखता है. किन्तु राक्षस परवर्ती होने के कारण सभी को लगता है कि वो सदा दुष्ट और हानिकारक प्रभाव ही डालता है किन्तु ये सत्य नहीं है क्योकि राहू के कुछ अच्छे फल योग भी होते है जिनके बारे में आज हम आपको बताएँगे. CLICK HERE TO KNOW नव ग्रह शान्ति के टोटके उपाय ... 
Amangalkaari Raahu ke Mangalkaari Yog
Amangalkaari Raahu ke Mangalkaari Yog
·         लग्न कारक योग :
जब भी राहू के मंगलकारी योगों की बात की जाती है तो उनमे सबसे पहले बात आती है इसके लग्न कारक योग की. ये योग वृष, कर्क और मेष राशि में बनता है जिसकी कुछ स्थितियां होती है अर्थात अगर राहू कुंडली में द्वितीय, नौवे या दसवें भाव में नहीं है तो ये योग बनेगा. इनके अलावा अगर किसी भी भाव में राहू है तो वो आपको शुभ फल प्रदान करेगा.

·         परिभाषा योग :
दूसरी स्थिति जब राहू भी शुभ फल देता है वो है परिभाषा योग अर्थात जिन जातकों की कुंडली में ये योग बनता है वे भी राहू की दुष्ट प्रभावों से पुर्णतः मुक्त रहते है. परिभाषा योग कुंडली में तभी बन सकता है जब राहू की उपस्थिति लग्न में हो या वो तीसरे, छठे व ग्याहरवे भाव में हो. ऐसा होने पर राहू आप पर शुभ दृष्टि बनाएं रखता है. इस योग के बनने पर आपको धन प्राप्ति होती है, स्वास्थ्य उत्तम रहता है और कार्यों में सफलता भी मिलती है.

·         कपट योग :
अगर किसी व्यक्ति की जन्म पत्री में शनि षष्टम और राहू एकादश में बैठे है तो उससे कपट योग बनता है. ऐसे व्यक्ति इस योग के नाम के अनुसार ही कार्य करते है अर्थात वे किसी को भी धोखा देने के लिए तैयार रहते है. ऐसे लोगों पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता. हो सकता है कि वो आपके सामने आपका सम्मान करते हो किन्तु पीछे से आपको ही हानि पहुंचाने के बारे में विश्वास करते है. CLICK HERE TO KNOW राहू ग्रह अनुसार कालसर्प दोष की पहचान ... 
अमंगलकारी राहू के मंगलकारी योग
अमंगलकारी राहू के मंगलकारी योग
·         पिशाच योग :
राहू का ये योग सबसे नीच योग माना जाता है और अपने नाम के अनुरूप ही फल देता है क्योकि इसमें जातक को प्रेत बाधा सताती रहती है. इसके अलावा जातक की इच्छा शक्ति कमजोर हो जाती है, उनका मानसिक संतुलन कमजोर हो जाता है और वो आसानी से दूसरों के बहकावे में आ जाता है, धीरे धीरे जातक के मन में नकारात्मक शक्ति वास करने लग जाती है और वो खुद को ही नुकसान पहुंचाने लगता है.

·         चांडाल योग :
ये योग तब बनता है जब राहू के साथ गुरु की भी युति हो जाती है. इसीलिए ये भी एक अशुभ ग्रह योग में गिना जाता है. जिन भी व्यक्तियों की जन्म पत्री व कुंडली में ये योग बनाता है उन्हें अपने जीवन में पापों के प्रभावों को झेलना पड़ता है, ऐसे लोगों के पास पैसे की तंगी रहती है, इनकी सोच गिरने लगती है और ये नीच काम तक करने से नहीं घबराते. ऐसे लोगों के लिए एक ही दवा है और वो है ईश्वर के प्रति आस्था किन्तु ये उसमें भी जल्दी अपना मन नहीं लगा पाते.

राहू के शुभ और अशुभ योगों और फलों के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो.
Inauspicious Rahu with Auspicious Good Effect
Inauspicious Rahu with Auspicious Good Effect

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