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Yogasan se Parichay or Uske Prakar | योगासन से परिचय और उसके प्रकार | Introduction to Yogasan and Its Types

योगासन
व्यक्ति आजकल मानसिक तनावों से परेशान रहता है जिसकी वजह से वो अपना आनंद और संतोष खो देता है और इधर उधर भटकता रहता है. ऐसे व्यक्ति शांति को महसूस करने के लिए उतावले रहते है, साथ ही ऐसे व्यक्ति अपने जीवन से स्वार्थ, क्रोध, कटुता, इर्ष्या और घृणा आदि के कांटो को दूर कर देना चाहते है. इसके लिए उनके पास सबसे अच्छा माध्यम है, योग. ये मार्ग व्यक्ति को दृढ़, बुद्धि में प्रखर और पुरुषार्थ को उत्तम बनता है. साथ ही ये उसे वो सुख देता है जिसकी तलाश में वो भटकता फिरता है. योग को करने से पहले योग के बारे में जानना बहुत जरूरी है तो आओ जानते है कि योग क्या है और वे कौन कौन से मुख्य योग है जिन्हें आपको अपने जीवन में सम्मिलित करना चाहियें.

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Yogasan se Parichay or Uske Prakar
Yogasan se Parichay or Uske Prakar 
इनके आधार पर अनेक तरह के आसन है जिन्हें आज हम आपके साथ बाँट रहे है और उन्हें करने की विधि भी बता रहे है.

·         पद्मासन :
पद्म का अर्थ होता है कमल तो पद्मासन का अर्थ हुआ कमल का आसन. ये योग का एक सामान्य आसन है, जिसमें शरीर ध्यान अवस्था में बैठता है किन्तु इसकी साधारणता ही इसके लाभ को बढाकर आपको निरोगी बनती है.

पद्मासन करने की प्रक्रिया : इसके लिए आप एक समतल जमीन का चुनाव कर लें और अपने पैरो को मोड़कर बैठ जायें. आप अपने एक पैर के पंजे को दुसरे पैर की जंघा पर रखें. ध्यान रहे कि आपके पैरो के तलवे आपके पेट की तरफ हो. आप अपनी कमर और गर्दन को बिलकुल सीधा रखें. अब आप अपने हाथो की कोहनियाँ अपने घुटनों पर रखें और अपने कंधो को भी बिलकुल सीधा कर लें. अपनी आँखों को बंद करें उर हल्की हल्की श्वास लें. CLICK HERE TO READ MORE SIMILAR POSTS ...
योगासन से परिचय और उसके प्रकार
योगासन से परिचय और उसके प्रकार 
पद्मासन से लाभ : ये आपके मन को भटकने से रोक आपका ध्यान केन्द्रित करता है, इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, गर्दन और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है. इसे तनाव कम करने का सबसे अच्छा आसन माना जाता है. इससे आपके पेट और जंघा की चर्बी कम होती है. पद्मासन को ध्यान के लिए सबसे उचित अवस्था भी माना जाता है.

·         बुद्ध पद्मासन :
इस आसन को पद्मासनो में सबसे उत्तम स्थान प्राप्त है.

बुद्ध पद्मासन करने की प्रक्रिया : आप एक चटाई पर साधारण तरीके से बैठ जायें. अब आप पाने एक पैर को अपने दुसरे पैर पर चढ़ा लें और अपनी कमर को सीधा रखें. अब आप अपना बाया हाथ अपने दाये पैर की एडी पर रखें और दाया हाथ बाये पैर की एड़ी पर रखें. आप इस अवस्था में जितना देर हो सके उतना देर बैठें. उसके बाद आप फिर से साधारण अवस्था में आ जायें.
बुद्ध पद्मासन से लाभ : ये व्यक्ति को सरल शरीर प्रदान करता है, साथ ही इससे व्यक्ति का पेट नही निकलता. इससे आपका अपने लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित रहता है और आप बुद्धिजीवी परवर्ती के हो जाते हो.

·         वज्रासन :
इस आसन को करने के लिए आपको आपके शरीर को ज्यादा नही हिलाना पड़ता बल्कि आप इसे काफी समय तक आसानी से कर सकते हो.
Introduction to Yogasan and Its Types
Introduction to Yogasan and Its Types
वज्रासन करने की प्रक्रिया : इसको करने के लिए आप अपने घुटनों को मोड़ कर बैठे और अपनी एड़ियों को पीछे की तरफ ले जायें. अब आप अपने हाथो को घुटनों पर रखे और अपनी कमर को सीधा करें. इस अवस्था में आप कुछ देर रहें. उसके बाद आप धीर धीर अपनी साधारण अवस्था में आ जायें.

वज्रासन से लाभ : ये पाचन क्रिया और रक्त प्रवाह को सुधरता है. साथ ही इससे आंतरिक अव्यव दबे नही रहते. ये योग पेट से संबंधित अनेक तरह के रोगों से मुक्ति दिलाता है और इससे घुटनों के दर्द से भी छुटकारा मिलता है.

·         मत्स्यासन :
ये आसन रीढ़ की हड्डी के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है. जैसाकि इसके नाम से ही पता चल रहा है कि इसमें मछली की अवस्था को धारण किया जाता है.

मत्स्यासन करने की प्रक्रिया : इसके लिए आप पद्मासन की तरह ही बैठ जायें और अपने एक पैर को दुसरे पैर पर चढ़ा लें. अब आप अपनी कमर को धीरे धीर पीछे की तरफ ले जायें और अपने सिर को धरती पर लगाने की कोशिश करें. संतुलन बनाने के लिए आप अपने पैरो के पंजो को अपने हाथो से पकड़ लें. इस बात का भी जरुर ध्यान रहे कि इस आसन को करते वक़्त आपके पैर और हाथ न छूटे. इस अवस्था में कुछ देर रहने के बाद आप साधारण अवस्था में आ जायें.

मत्स्यासन से लाभ : ये आसन कई रोगों से मुक्ति दिलाता है जैसेकि अस्थमा, छाती का दर्द और पाचन तंत्र संबंधी समस्यायें. इस योग को करने से रीढ़ की हड्डी और कमर के दर्द से भी मुक्ति मिलती है.
Process of Yog Asan
Process of Yog Asan
·         कुक्कुतासन :
ये पद्मासन का ही एक उप प्रकार माना जाता है. जिसमे आपको उसी अवस्था के अगले चरण को करना होता है.

कुक्कुतासन करने की प्रक्रिया : इसको करने के लिए आप पद्मासन की अवस्था में बैठ जायें इसके बाद आप इसी अवस्था में अपने पैरो के बीच से हाथ निकालें, जिसके लिए आप अपनी एडियों को पीछे की तरफ कर लें. अब अपने हाथो पर जोर लगाकर अपने शरीर को ऊपर हवा में करने की कोशिश करें. आपके हाथों की हथलियाँ जमीन पर हो. कुछ देर आप इस स्थिति में ही रहें. उसके बाद आप अपने शरीर को नीचे लायें और धीरे धीरे अपने पैरो को खोलें.

कुक्कुतासन से लाभ : ये भी पेट से संबंधित रोगों से मुक्ति दिलाता है, साथ ही ये आपकी भुजाओं को बल प्रदान करता है.

·         शीर्षासन :
शीर्षासन एक ऐसा योग है जो सिर के बल किया जाता है. इसे सभी योगो में सबसे अच्छा माना जाता है. साथ ही इस आसन को वृक्षासन और कपालासन के नाम से भी जाना जाता है.
योग की प्रक्रिया और लाभ
योग की प्रक्रिया और लाभ
शीर्षासन करने की प्रक्रिया : शीर्षासन को करने के लिए आप सबसे पहले एक सपाट जगह का चुनाव कर लें. इसके बाद आप वज्रासन की अवस्था में बैठ जायें. अब आप आगे झुक कर अपने हाथो को जमीन पर रखें और अपने शरीर को धीरे धीरे आगे की तरफ करते हुए अपने पैरो को हवा में उठायें. इस  स्थिति में आकर आप अपने पैरो को आसमान में उठा लें जैसे आप सीधे खड़े होते हो उसके बिलकुल विपरीत. आप कुछ देर इस स्थिति में ही रहें. फिर सामान्य स्थिति में आ जायें.

शीर्षासन से लाभ : पाचन शक्ति को मजबूत करता है, रक्त संचार सुचारू करता है, शरीर को हष्ट पुष्ट बनता है, मस्तिष्क में रक्त संचार कर याददाश्त बढाता है, कब्ज, हार्निया जैसी बिमारियों से मुक्ति दिलाता है, सफ़ेद बालो की समस्या से मुक्ति दिलाता है और शरीर को अधिक से अधिक सक्रिय कर कार्यक्षमता को बढ़ता है.

·         पश्चिमोतासन (Pachimopadasan or पश्चिमोपादासन ) :
इस आसन में कुंडलिनी शक्ति का पश्चिम यानी मस्तक की तरफ का उत्थान होता है इसलिए इसे पश्चिमोतासन कहा जाता है.

पश्चिमोतासन करने की प्रक्रिया : इसके लिए आप सीधे लेट जायें और दोनों पैरो को जोड़ लें. अब आप अपने दोनों हाथो को ऊपर की तरफ फैला लों. अब आप धीरे धीरे अंदर की तरफ सांस लेते हुए बैठें. आप साँसों को छोड़ते हुए दोनों पैरो के अंगूठो को पकडें. ध्यान रहे कि आपके घुटने न मुड़ें. आप अपने मस्तक को अपने दोनों घुटनों के बीच में लें आयें. इस अवस्था को पश्चिमोतासन कहा जाता है. आप इस अवस्था में जितनी देर हो सके रहें. फिर आप पुनः सामान्य स्थिति में आ जायें.


पश्चिमोतासन से लाभ : पश्चिमोतासन से कमर दर्द से मुक्ति मिलती है और ये रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है. इस आसन श्वसन क्रिया ठीक रहती है.
Process Benefits of Yog Asan
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