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Kya Hai Virtual Reality Aur Ye Kaise Kaam Karti Hai | क्या है Virtual Reality और ये कैसे काम करती है

वर्चुअल रियलिटी ( Virtual Reality )
Virtual Reality एक ऐसा वर्ल्ड जो आपकी हर कल्पना को सच करता है. जी हाँ, अगर आप सपना देखते है कि आप बादलों पर चल रहे है, व्हेल शार्क के ऊपर बैठकर पानी में सैर कर रहे है या फिर सुपरमैन की तरह उड़ रहे है तो Virtual Reality आपके इन सभी सपनों को पूरा करती है और आपको ऐसी ही फीलिंग देती है कि मानों आप उस समय में उस जगह पर मौजूद है.

दरअसल वर्चुअल रियलिटी में Software और Hardware के द्वारा एक ऐसे आर्टिफीसियल एनवायरनमेंट को बनाया जाता है जिसमें User खुद को रियल में फील करता है. ख़ास बात ये है कि इस वर्चुअल रियलिटी के एनवायरनमेंट को हम अपनी सिर्फ 2 Senses से फील करती है, जिसमें एक है आँखें और दुसरे है कान. CLICK HERE TO KNOW क्या है OLED और ये कैसे काम करती है ...
Kya Hai Virtual Reality Aur Ye Kaise Kaam Karti Hai
Kya Hai Virtual Reality Aur Ye Kaise Kaam Karti Hai
Virtual Reality का मतलब ही एक ऐसी Imaginary दुनिया को बनाना है जो बिलकुल रियल जैसी लगे, लेकिन इसके लिए High Performance देने वाले कंप्यूटर्स, सेन्सर्सHD Quality के ग्राफ़िक्स, हेडसेट्स और ग्लव्स वगरह यूज होते है. वैसे ज्यादातर इसे गेम्स खेलने और एक एनवायरनमेंट क्रिएट करने के लिए ही यूज किया जाता है, पर अब इस टेक्नोलॉजी को एयरलाइन के Pilots की ट्रेनिंग के दौरान भी यूज किया जाने लगा है, साथ ही कुछ हॉस्पिटल्स में Operation के दौरान और साइंटिस्ट्स Complex Situation में भी वर्चुअल रियलिटी की मदद लेने लगे है और यही वजह है कि आज Virtual Reality इतनी ज्यादा पसंद की जा रही है.

क्या है वर्चुअल रियलिटी ( What is Virtual Reality ) :
जैसाकि आप जानते ही है कि Virtual Reality 2 शब्दों से मिलकर बना है पहला Virtual, जिसका मतलब है नजदीक यानी पास, वहीँ दूसरा है Reality, जिसका मतलब उस एक्सपीरियंस से है जिसे हम सच में महसूस करते है और जो हमे रियल लगता है. इसीलिए अगर वर्चुअल रियलिटी के मतलब की बात करें तो ये वो सत्य है जो हमारे नजदीक होता है, वो एक्सपीरियंस जो हमारे सपनों को हमारे पास ले आता है.
क्या है Virtual Reality और ये कैसे काम करती है
क्या है Virtual Reality और ये कैसे काम करती है
वर्चुअल रियलिटी के फीचर्स ( Features of Virtual Reality ) :
वर्चुअल रियलिटी आपको एक दूसरी दुनिया में ले जाता है जो असल में होती ही नहीं बल्कि इसे कंप्यूटर की मदद से बनाया जाता है लेकिन फिर भी इसमें 5 गजब के फीचर्स होते है जिनमे पहला है

-    Believable : मतलब जिसपर आप यकीन कर सको. जी हाँ, सबको पता होता है कि वर्चुअल रियलिटी एक कल्पना का संसार है लेकिन फिर भी जो इसे एक्सपीरियंस करता है उसे विश्वास हो जाता है कि उसने किसी असल दुनिया को देखा और जिया है.

-    Interactive : इंटरएक्टिव से मतलब है कि आप इस वर्चुअल वर्ल्ड में पूरी तरह एक्टिव रहते हो, मूव करते हो, भागते हो, कूदते हो चढ़ते हो और अगर ऐसा नहीं होगा तो ये वर्चुअल रियलिटी कहलायेगा ही नहीं.

-    Computer Generated : जैसाकि आप जानते ही है कि इस तरह के वर्चुअल वर्ल्ड को बिना पावरफुल कंप्यूटर्स और 3D ग्राफिक्स की मदद के बिना बनाना पॉसिबल ही नहीं है. इसीलिए इसे Computer Generated भी कहा जाता है.

-    Explorable : जब तक वर्चुअल रियलिटी वर्ल्ड बड़ा नहीं है, रीयलिस्टिक नहीं है और Explorable नहीं है तब तक उसे बेहतर Virtual Reality नहीं माना जाता क्योकि इसमें एक्स्प्लोर करने का ही तो मजा है.

-    Immersive :  क्योकि VR वर्ल्ड को Believable बनाना होता है इसीलिए इसमें आपके माइंड और बॉडी दोनों को थोडा Immerse करना पड़ता है, उन्हें फैलना पड़ता है. अगर इस वर्ल्ड में चीजें अट्रेक्टिव नहीं होंगी तो फिर उसमें मजा ही नहीं आएगा और ना ही वो रियल लगेंगी.
Virtual Reality ki Anokhi Duniya
Virtual Reality ki Anokhi Duniya
वर्चुअल रियलिटी के प्रकार ( Types of Virtual Reality ) :
वर्चुअल रियलिटी को उसके काम करने के तरीकों के हिसाब से 4 प्रकार में बाँटा गया है जिनमे पहला है

-    Fully Immersive : अगर आप एक Complete वर्चुअल रियलिटी एक्सपीरियंस को अनुभव करना चाहते है तो उसके लिए आपको 3 चीजों की जरूरत होगी

·         Computer Model : ताकि आप वर्चुअल वर्ल्ड को पूरी तरह से एक्स्प्लोर कर सको.

·         Powerful Computer : ताकि आप रियल टाइम में Virtual World में एक्स्प्लोर कर सको, आप डिटेक्ट कर सको कि आखिर हो क्या रहा है.

·         Hardware : जिसे आप कंप्यूटर से लिंक कर सको, ये हार्डवेयर ही हमे वर्चुअल वर्ल्ड में Immerse करता है.

इसके बाद आपको एक HMD यानि Head Mounted Display दी जाती है जिसमें Screen के साथ साथ Stereo Sound भी होता है, इसके अलावा आपको सेंसर ग्लव्स पहनाये जाते है ताकि आपको पूरा एक्सपीरियंस मिले.

-    Non Immersive : अगर आप अपने घर में अपने कंप्यूटर की मदद से Virtual Reality को एक्सपीरियंस करना चाहते है तो उसे Non Immersive Virtual Reality कहते है. लेकिन इसमें आपको 1 Wide Screen, हेडफ़ोन, अच्छा साउंड सिस्टम1 Joystick और बाकी के कंट्रोल्स की आवश्यकता होगी. हालाँकि ये आपको पूरा रियल वर्ल्ड जैसा फील नहीं कराता लेकिन फिर भी आपको काफी अच्छा एक्सपीरियंस मिल जाता है.

-    Collaborative : Second Life और Mine craft, दो ऐसे गेम्स है जोकि वर्चुअल रियलिटी के 4 फीचर्स ( Believable, Interactive, Computer Based and Explorable ) को फॉलो करते है. लेकिन पांचवें यानी Immersive को फॉलो नहीं करते. पर इसमें Cutting Edge VR जरुर होता है जोकि एक तरह का Collaboration है. जिसकी मदद से आपको वर्चुअल रियलिटी वर्ल्ड को एक्सपीरियंस कर पाते है और तो और इसे Virtual Reality का फ्यूचर भी माना जाता है.

-    Web Based : आपको बता दें कि 1990 के समय में Virtual Reality एक Fast Growing Technology हुआ करती थी, पर उसी वक़्त World Wide Web यानि www भी आ गया और इतना पोपुलर हो गया कि उसमें सब लोग Virtual Reality को भूल गये. Computer Science ने तो Web में ही Virtual World बनाने की तकनीक तक बना ली थी, जिसे Web Based Virtual Reality कहा गया, लेकिन वो भी ज्यादा नहीं चली.

वर्चुअल रियलिटी में इस्तेमाल होने वाले Equipment ( Equipment Used in Virtual Reality ) :
-    Head Mounted Displays ( HMDs ) : वर्चुअल रियलिटी के लिए सबसे पहली चीज अगर कोई है तो वो है Head Mounted Display. दिखने में ये एक हेलमेट की तरह है और यही वो चीज है जो VR और Ordinary Computer Screen के फर्क को दिखाती है. इसे आपको अपने सिर पर पहनना है, फिर जब और जहाँ आप अपने सिर को मूव करते हो आपको उसी तरह का Virtual World दीखता ही और वो भी रियल जैसा और 3D में. इसमें बाहर की लाइट पूरी तरह से ब्लाक हो जाती है.

आपको बता दें कि इसमें छोटी स्क्रीन्स और Stereo Headphones भी होते है. दोनों स्क्रीन थोड़ी थोड़ी अलग होती है और Virtual World को Realistic बनाने में हेल्प करती है. वहीं हैडफ़ोन साउंड के लिए होता है. HMD में कुछ In Built Sensors भी होते है ताकि वो हमारे हेड और बॉडी की मूव को डिटेक्ट कर सके और उसी के अकोर्डिंग काम कर सके.

-    Immersive Rooms : ये वो कमरा है जिसकी दीवारों पर इमेजेज को डिस्प्ले किया जाता है, जोकि बदलती रहती है. साथ ही साथ HMD पहनने के बाद आपको इसी रूम में मूव करना होगा. रूम में दीवारों पर इमेजेज को डिस्प्ले करने के लिए Flight Simulators Technique को यूज किया जाता है जैसेकि लैंडस्केप, सिटीज या कुछ और. ये इमाजेज ही रियल वर्ल्ड बनकर आपको गजब का एक्सपीरियंस देती है.

-    Data Gloves : इन ग्लव्स में Touch Sensors लगे होते है साथ ही इन्हें बाहर से वायर्ड भी कर दिया जाता है और इनमे फाइबर ऑप्टिक केबल्स यूज होती है. हर केबल में कुछ छोटे छोटे कट्स भी होते है. जिनकी मदद से कंप्यूटर्स को पता चलता है कि आखिर आपकी उँगलियाँ कर क्या रही है.
Virtual Reality ke Fayde Aur Nuksan
Virtual Reality ke Fayde Aur Nuksan
-    Wands : अगर बाद Wand और Data Gloves में कम्पेरिजन की आये तो Wands ज्यादा सिंपल होते है. ये एक तरह की स्टिक है, जिसे आप Touch करनेPoint To करने या फिर Virtual World में Interact करने के लिए भी यूज कर सकते हो. इसमें भी आपको Motion Sensors और Position Sensors इन्सटाल्ड मिलते है. आगे पीछे मूव करने के लिए इसमें माउस बटन या फिर स्क्रॉल व्हील मिलता है.

वर्चुअल वर्ल्ड के फायदे ( Benefits of Virtual Reality ) :
-    रियलिटी से बेहतर ( Better than Reality ) : वर्चुअल वर्ल्ड की सबसे अच्छी बात ये है कि ये रियलिटी से भी बेहतर ग्राफ़िक्स देता है और आपके हर सपने को हकीकत में बदल सकता है. इसमें आपको एक तरह की विडियो गेम वाली फीलिंग आती है और तो और इसकी साउंड क्वालिटी भी बेहतरीन है. 

-    हर फील्ड में इस्तेमाल ( Useful in Every Field ) : आज वर्चुअल रियलिटी को हर फील्ड में इस्तेमाल किया जाता है चाहे फिर वो हॉस्पिटल हो, एजुकेशन हो या फिर मिलिट्री. ये इन सब फील्ड में अलग अलग डायमेंशन देता है और कई तरह से हेल्पफुल होता है.

-    बेहतरीन एक्सपीरियंस ( Good Experience ) : ये तो सच है कि जो लोग वर्चुअल रियलिटी को यूज करते है वो रियल वर्ल्ड को भूल जाते है और उसका कारण है इसमें मिलने वाला बेहतरीन एक्सपीरियंस.

-    कम्पलीट डिटेल व्यू ( Complete Detail View ) : अगर आप किसी टूरिज्म साईट या कंपनी को चलाते है तो ये आपके लिए बेस्ट आप्शन है क्योकि वर्चुअल रियलिटी किसी भी प्लेस की कम्पलीट डिटेल्ड व्यू देता है. ऐसे में आपके व्यूअर्स अच्छे से ट्रिप प्लान कर पायेंगे और रियल लोकेशन को देख पायेंगे.

वर्चुअल रियलिटी के नुक्सान ( Disadvantages of Virtual Reality ) :
-    कीमत ( Cost ) : वर्चुअल रियलिटी की कीमत काफी ज्यादा है और इसीलिए सभी लोग इसका मजा नहीं उठा पाते. हालाँकि अभी भी इस टेक्नोलॉजी में अपडेटस हो रही है और हो सकता है कि फ्यूचर में इसकी कीमत कुछ कम हो जाए.

-    नाकाबिल होने की फीलिंग ( Feeling of Incapability ) : जी हाँ, ऐसे बहुत से लोग है जो वर्चुअल रियलिटी में इतना घुस जाते है कि उन्हें लगने लगता है कि वो असल दुनिया से भाग रहे है और ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.

-    आदि बनाता है ( Make You Addicted ) : अक्सर कुछ लोग वर्चुअल रियलिटी को इतना ज्यादा पसंद कर लेते है कि वो उसके आदि हो जाते है और वो वर्चुअल वर्ल्ड में ही रहने लगते है. ये कई तरह के हेल्थ इश्यूज को पैसा करता है.

-    टेक्नोलॉजी अभी भी कम्पलीट नहीं है ( Technology is Still Incomplete ) : बेशक अब भी आपको वर्चुअल रियलिटी टेक्नोलॉजी यूज करते वक़्त कोई कमी ना लगे लेकिन सच यही है कि अभी भी इस टेक्नोलॉजी में कुछ कमियाँ है और इसीलिए ये अभी भी Experimental मोड पर ही है.
Virtual Reality Technique
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